सतना में सेल की बेशकीमती जमीन पर कब्जे की कोशिश, प्रशासन ने सीमांकन प्रक्रिया शुरू की, सख्त कार्रवाई के संकेत।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
करीब 153 करोड़ रुपये मूल्य की स्टील अथॉरिटी आॅफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की बहुमूल्य भूमि एक बार फिर कथित भूमाफिया के निशाने पर है। बीते दस दिनों में दूसरी बार व्यापक पैमाने पर कब्जे की कोशिश की गई।
जिसे प्रशासनिक हस्तक्षेप से फिलहाल विफल कर दिया गया। इस भूखंड को औने-पौने दाम में कथित भूमाफिया बेचने का प्रयास कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने अब सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब मामला न्यायाधिकरण की निगरानी में है, तो संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में शिथिलता क्यों दिखाई दे रही है? जब तक परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट और कारगर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आशंकाएं बनी रहेंगी। यह मामला केवल भूमि संरक्षण का नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों की गरिमा, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और सैकड़ों परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।
गोरइया मोड़ की कीमती जमीन पर नजर
विवादित भूमि बारीखुर्द ग्राम पंचायत से लगी हुई है और सतना-सेमरिया तथा बाबूपुर-गोरइया मुख्य मार्ग के मध्य गोरइया मोड़ पर स्थित है। दो प्रमुख सड़कों से सटी होने के कारण इसका बाजार मूल्य अत्यधिक है। बताया गया है कि आराजी क्र. 490/3, रकबा 34 एकड़ 89 डिसमिल, सेल के हिस्से में दर्ज है। आरोप है कि इसी भूमि पर सुनियोजित तरीके से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। सेल प्रबंधन ने अपर कलेक्टर से औपचारिक हस्तक्षेप की मांग की है। बीजेसीएल की ओर से अधिवक्ता राजबहादुर सिंह वैश्य ने राजस्व न्यायालय में स्थगन और अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की याचिका दायर की है।
प्लांट 2022 से बंद, 350 कर्मचारी उम्मीद में
गौरतलब है कि संबंधित सीमेंट प्लांट वर्ष 2022 से बंद है। इसके बावजूद लगभग 350 कर्मचारी अब भी इस उम्मीद में कार्यरत हैं कि विवाद का समाधान होगा और उत्पादन दोबारा शुरू हो सकेगा। यदि परिसंपत्तियां खुर्द-बुर्द होती हैं या अवैध कब्जे का शिकार बनती हैं, तो इससे न केवल समाधान प्रक्रिया प्रभावित होगी बल्कि इन कर्मचारियों की आजीविका की उम्मीदों पर भी गंभीर आघात पहुंचेगा।
आईआरपी की भूमिका पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब न्यायाधिकरण ने संपत्तियों की सुरक्षा की स्पष्ट जिम्मेदारी आईआरपी को सौंपी है, तो क्या उनके द्वारा स्थानीय प्रशासन और पुलिस को संभावित अतिक्रमण की औपचारिक सूचना दी गई? क्या भूमि की भौतिक निगरानी और सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की गई? क्या न्यायाधिकरण को घटनाक्रम से अवगत कराया गया? जानकारी के अनुसार, अतिक्रमण प्रयास की सूचना सेल प्रबंधन को ही प्रशासन तक पहुंचानी पड़ी। कानूनी जानकारों का कहना है कि सीआईआरपी के दौरान परिसंपत्तियां लेनदारों के हितों की धुरी होती हैं। यदि इस चरण में भूमि पर अवैध कब्जा हो जाता है, तो इससे समाधान प्रक्रिया और संभावित दावों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह उदासीनता तब है जब आईआरपी को संपत्ति संरक्षण और प्रक्रिया संचालन के लिए प्रतिमाह लगभग 8 से 9 लाख रुपये का पारिश्रमिक दिया जा रहा है। ऐसे में यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि वे केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सक्रियता दिखाएं।
मालिकाना हक सेल का, बीजेसीएल को केवल उपयोग का अधिकार
गौरतलब है कि संबंधित भूमि का मालिकाना हक पूर्णत: सेल के पास है। भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड (बीजेसीएल) को यह भूमि केवल दीर्घकालिक उपयोग (लॉन्ग टर्म लीज) के लिए प्रदान की गई थी। अत: किसी भी प्रकार का स्वामित्व दावा या स्वतंत्र लेन-देन विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।
एनसीएलटी के आदेश के बावजूद जमीन पर खतरा
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की कटक पीठ ने 15 अक्टूबर 2025 को बीजेसीएल के विरुद्ध कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) प्रारंभ की थी। आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) आशुतोष खेमानी कंपनी की परिसंपत्तियों के मूल्य की रक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करेंगे तथा कंपनी को गोइंग कंसर्न के रूप में संचालित रखने का प्रयास करेंगे। दिवालियापन संहिता की धारा 14 के तहत लागू मोरेटोरियम के दौरान कंपनी की संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यदि बार-बार कब्जे की कोशिश हो रही है, तो यह न केवल न्यायिक आदेशों की अवहेलना है बल्कि परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न भी खड़े करता है।
संगठित गतिविधि के संकेत
एक वायरल वीडियो और स्थानीय चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि कब्जे का प्रयास सुनियोजित था। प्रशासन का भी मानना है कि बार-बार हो रहे प्रयास किसी संगठित गतिविधि की ओर इशारा करते हैं। करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति पर लगातार नजरें गड़ना केवल भूमि विवाद का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों की प्रभावशीलता की भी परीक्षा है। फिलहाल सीमांकन और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
भूमि का सीमांकन कराने के लिए टीम गठित की जा रही है। सीमांकन के बाद वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सेल भारत सरकार का एक उपक्रम है जिसकी भूमि पर कोई भी निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आएगा। इस पर कब्जे के लिए किसी को भी भुगतान न किया जाए। यदि कोई भूमिहीन है और आवास बनाना है तो वह मुख्यमंत्री भू-अधिकार योजना या आवासीय भू-अधिकार योजना के तहत आवेदन करें, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र गरीब परिवारों को मुफ्त आवासीय भूखंड दिया जाता है।
राहुल सिलाड़िया, एसडीएम


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2-3 अक्टूबर को भोपाल दौरे पर रहेंगे। वे भेल मैदान में गोपालक सम्मेलन, नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी और IISER परिसर का शिलान्यास करेंगे।
मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने भोपाल में कोर कमेटी और पदाधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने नेताओं के स्वागत में जेसीबी से फूल बरसाने पर रोक लगाने और 3 महीने के भीतर गुटबाजी खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश में शिक्षकों का आंदोलन हुआ उग्र। टीईटी अनिवार्यता, ई-अटेंडेंस और वरिष्ठता जैसी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल के नीलम पार्क में प्रदर्शन। 2 अक्टूबर को प्रदेशभर में होगा उपवास और सत्याग्रह।
उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर जमीयत उलमा मप्र के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कोर्ट में तथ्य छिपाने, सड़क चौड़ीकरण के लिए तीन फीट जमीन के वैकल्पिक उपायों और गिरफ्तारियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास कार्यों, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 और 'सेवा संकल्प अभियान' की जानकारी दी।
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले में आयोग की रिपोर्ट सामने आ गई है। लापरवाही और देरी के कारण 36 से अधिक लोगों की मौत के लिए 8 अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है, जबकि जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट मिल गई है।
मध्य प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त निर्देश दिए हैं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास निगरानी, हॉट स्पॉट की पहचान और हेल्पलाइन नंबर जैसी अहम जानकारियों के साथ पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जगला गांव का दौरा किया। उन्होंने कुपोषण और मलेरिया से जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं। चुनाव में अभी दो वर्ष से अधिक का समय बाकी है, लेकिन कांग्रेस अभी से तैयारी में जुट गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक पखवाड़े के भीतर दूसरी बार मध्य प्रदेश आ रहे हैं। वह आज बालाघाट के बैहर विकासखंड के जागला गांव में कुपोषण, मलेरिया और खसरा से प्रभावित बैगा आदिवासी बच्चों के परिजनों से मुलाकात करेंगे।
विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र का गुरुवार को उत्साहपूर्ण आगाज हुआ। पर्यटन सत्र के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली गेट को आकर्षक ढंग से सजाया गया। पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यटकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया।