दीपावली मेले से पहले सतना-चित्रकूट मार्ग की बदहाली ने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ाई। 20.64 करोड़ के निर्माण कार्य के बावजूद गड्ढे, धूल और ओवरलोडिंग ने गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
दीपावली मेले की तैयारियों के बीच सतना-चित्रकूट मार्ग की बदहाली श्रद्धालुओं के साथ आसपास के गांवों के लोगों के लिए भी मुसीबत बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं, डामर उखड़ चुका है और भारी वाहनों के गुजरते ही धूल का गुबार बस्तियों में फैल जाता है। मझगवां से चित्रकूट के बीच मिचकुरिन, पिंडरा और चौरहा सहित कई गांवों के ग्रामीणों की शिकायत है कि सड़क की दुर्दशा ने आवागमन ही नहीं, घरों और दुकानों में रहना भी मुश्किल कर दिया है।
दूसरी ओर, सड़क निर्माण और डामरीकरण पर खर्च हो रही राशि, काम की गति और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। करीब 20.64 करोड़ रुपये के निर्माण एवं डामरीकरण कार्य की लागत, ठेके की दर और सड़क की मौजूदा हालत के बीच अंतर की जांच जरूरी हो गई है। सड़क की बदहाली के बीच भारी ट्रकों और खनिज परिवहन की निगरानी का सवाल भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन की शिकायतें उठती रही हैं। निर्धारित भार से अधिक वजन वाले वाहनों की आवाजाही सड़क पर अतिरिक्त दबाव डालती है, लेकिन इस मार्ग पर ओवरलोडिंग पर अंकुश नही है।
धूल ने बढ़ाई गांवों की परेशानी
सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर उन ग्रामीणों पर पड़ रहा है, जिनके घर और दुकानें मार्ग के किनारे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, भारी वाहन गुजरते ही धूल उड़ने लगती है। घरों में रखे सामान पर धूल जम जाती है, दुकानों में गंदगी फैलती है और बच्चों तथा बुजुर्गों को परेशानी होती है। सांस संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे लोगों के लिए स्थिति और कठिन हो जाती है। इस मार्ग पर आने वाले गांवों के सरपंचों ने भी सड़क का निर्माण और स्थायी सुधार कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल गड्ढे भर देने से समस्या समाप्त नहीं होगी। सड़क की मजबूती के साथ धूल नियंत्रण और भारी वाहनों की निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है।
करोड़ों का काम, फिर भी सड़क बदहाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सतना-मझगवां -चित्रकूट मार्ग पर सड़क निर्माण और बीटी रिन्यूवल यानी डामरीकरण कार्य की लागत लगभग 20.64 करोड़ रुपये बताई गई है। जिला कांग्रेस कमेटी सतना-मैहर के पूर्व अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने इस कार्य की धीमी गति और सड़क की खराब हालत पर सवाल उठाते हुए निर्माण की गुणवत्ता की जांच की मांग की है। उनके अनुसार, ठेका 42 प्रतिशत कम दर पर दिया गया था और दिसंबर 2025 के अनुबंध के मुताबिक काम दिसंबर 2026 तक पूरा होना था। मिश्रा ने आशंका जताई है कि निर्माण कार्य और भुगतान की प्रक्रिया की जांच जरूरी है। यदि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सड़क पर सफर करने वालों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि निर्माण और मरम्मत पर खर्च के बावजूद गड्ढों से राहत क्यों नहीं मिल रही।
ओवरलोडिंंग व उत्खनन भी कारण
मझगवां क्षेत्र अवैध उत्खनन के लिए कुख्यात रहा है जहां आज भी सिलौरा, प्रतापपुर समेत विभिन्न जगहों पर व्यापक पैमाने पर उत्खनन स्थानीय प्रशासन की शह पर होता है। भारी वाहनों का लगातार दबाव सड़क की उम्र और रखरखाव को प्रभावित करता है। बारिश के बाद कमजोर हुई सड़क पर अधिक भार वाले वाहनों की आवाजाही से डामर उखड़ने और गड्ढे बढ़ने का खतरा रहता है।
मरम्मत के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा
सतना-चित्रकूट सड़क मार्ग को हर दीपावली मेला के पहले दुरूस्त किया जाता है। इसके अलावा विभाग द्वारा सड़क का निर्माण भी कराया जाता है लेकिन यह रहस्य ही बना हुआ है कि इस मार्ग पर लगातार निर्माण काम होने के बावजूद सड़क क्यों टूट रही है? सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए पिछले तीन वर्षों में हुए निर्माण और मरम्मत कार्यों का विवरण सार्वजनिक कर इसकी गहनता से यदि जांच कराई जाय तो सड़क निर्माण कराने वाले विभागों व सड़क ठेकेदारों की जुगलबंदी की पोल खुल सकती है।फिलहाल दीपावली मेले के मद्देनजर प्रभावित हिस्सों की मरम्मत, जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव, यातायात संकेतक और भारी वाहनों की जांच तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग को निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता को प्राथमिकता देना होगा अन्यथा पवित्र मंदाकिनी में डुबकी लगाकर दीपदान की मंशा से चित्रकूट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को गड्ढों में हिचकोले लेते ही चित्रकूट पहुंचना होगा। सतना-चित्रकूट मार्ग पर सवाल केवल गड्ढों का नहीं है। सवाल सरकारी धन से हुए निर्माण की गुणवत्ता, भारी वाहनों पर नियंत्रण और उन ग्रामीणों की परेशानी का भी है, जिन्हें हर दिन धूल और खराब सड़क के बीच जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क को दीपावली तक दुरूस्त कराया जाय अन्यथा वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
चित्रकूट के गड्ढे तो भरेंगे पर प्रवेश मार्गों का क्या
दीपावली मेले को देखते हुए चित्रकूट नगर परिषद क्षेत्र की बारिश से क्षतिग्रस्त प्रमुख सड़कों की मरम्मत के लिए सितंबर में लगभग 15.68 लाख रुपये की निविदा जारी की गई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कार्य अवधि 15 दिन रखी गई थी और 14 अक्टूबर को वित्तीय बोलियां खोली गईं। लेकिन नगर परिषद क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत और सतना-चित्रकूट मुख्य मार्ग के रखरखाव को एक ही काम मान लेना सही नहीं होगा।


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