सतना जिला अस्पताल में रात होते ही एम्बुलेंस दलाल सक्रिय हो जाते हैं। मरीजों को डराकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराने का खेल चल रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
By: Yogesh Patel
Mar 07, 20264:16 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल एक बार फिर एम्बुलेंस दलालों के नेटवर्क के कारण सवालों के घेरे में है। आरोप है कि रात होते ही अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में भर्ती कराने का खेल शुरू कर देते हैं। जानकारी के मुताबिक रात 10 बजे के बाद जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को कुछ लोग यह कहकर डराते हैं कि यहां रात में इलाज नहीं मिलेगा और डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते। इसके बाद वे मरीजों को अपनी निजी एम्बुलेंस में बैठाकर शहर के निजी नर्सिंग होम की ओर ले जाते हैं।
वीडियो में कैद हुआ मामला
गुरुवार रात ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में एक व्यक्ति मरीज को जिला अस्पताल से अपनी निजी एम्बुलेंस में बैठाकर भरहुत नगर स्थित शिवानी हॉस्पिटल लेकर जाता हुआ दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल अस्पताल परिसर में सक्रिय दलालों के नेटवर्क के जरिए चल रहा है।
गरीब मरीजों को बनाया जा रहा निशाना
सरकारी अस्पताल में मुफ्त या कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीज इन दलालों के झांसे में आ जाते हैं। उन्हें यह कहकर डराया जाता है कि जिला अस्पताल में इलाज संभव नहीं है, जबकि कई मामलों में मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के ही निजी अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता है, जहां उन्हें भारी खर्च उठाना पड़ता है।
पहले भी लग चुकी है रोक, फिर भी जारी खेल
गौरतलब है कि कुछ समय पहले जिला अस्पताल प्रशासन ने अनाधिकृत एम्बुलेंस संचालकों और दलालों के अस्पताल परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने का नोटिस भी चस्पा किया था। इसके बावजूद रात के समय यह अवैध गतिविधियां जारी हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल परिसर में सक्रिय एम्बुलेंस दलालों और उनके नेटवर्क की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों को गुमराह करने का यह खेल बंद हो सके।