सतना जिला अस्पताल में प्रसूता के गर्भस्थ शिशु की मौत पर परिजनों ने उपचार और सिजेरियन में देरी का आरोप लगाया है। घटना के बाद प्रसूति सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल में एक प्रसूता के गर्भस्थ शिशु की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकीय निर्णय लेने में हुई देरी और समय पर आॅपरेशन न किए जाने के कारण शिशु को बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद अस्पताल की प्रसूति व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जानकारी के मुताबिक, पौड़ी कोठी निवासी वर्षा सिंह (26) को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर शनिवार देर रात कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल भेजा गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें रात करीब एक बजे भर्ती किया गया। परिजनों का कहना है कि भर्ती के समय प्रसूता का पानी उतर चुका था और जांच के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की हृदय गति सामान्य बताई गई थी।
भर्ती के समय भ्रूण की धड़कन सामान्य थी
परिवार का आरोप है कि रातभर महिला अस्पताल में भर्ती रही, लेकिन प्रसव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने या सिजेरियन की आवश्यकता पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका दावा है कि सुबह तक शिशु की धड़कन सामान्य थी, इसके बावजूद चिकित्सकीय हस्तक्षेप में विलंब होता रहा। बताया जा रहा है कि रात में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों के बाद सुबह विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी प्रसूता की निगरानी की, लेकिन आॅपरेशन का निर्णय दोपहर में लिया गया। अंतत: करीब दोपहर 1 बजे सीजर आॅपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार, तब तक गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो चुकी थी।
मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
यह महिला की पहली संतान थी। नवजात को जन्म से पहले ही खो देने से परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाए गए होते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह मामला प्रसूति सेवाओं में समयबद्ध निर्णय और संवेदनशील चिकित्सा प्रबंधन की आवश्यकता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।


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