सतना जिला अस्पताल में मैहर से रेफर प्रसूता ने मृत बच्चे को जन्म दिया, इसके बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल ने जांच और पोस्टमार्टम कराया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार लाने स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई कवायदें की जा रही हैं। इसके बावजूद बाल मृत्यु एवं मातृ मृत्यु में कमी नहीं आ रही है। जिला अस्पताल में शनिवार को एक ऐसा ही मामला उजागर हुआ कि जिसमें प्रसव के पहले बच्चे की एवं बाद में मां की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों द्वारा चिकित्सकीय इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया। मामला तूल पकड़ते देख सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह द्वारा मृतका का पोस्टमार्टम कराया गया ताकि सही वजह पता चल सके। सिटी एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने भी सिविल सर्जन से मामले की जानकारी जुटाई। जानकारी के अनुसार दीपांजलि साकेत पति शिवा साकेत उम्र 20 साल निवासी भदनपुर जिला मैहर को 16 सितम्बर की रात सिविल अस्पताल मैहर में प्रसव के लिए ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर सिविल अस्पताल के चिकित्सकीय स्टाफ द्वारा जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया।
ढाई घंटे बाद हुई भर्ती
बताया गया कि प्रसूता के गर्भस्थ शिशु की हलचल न होने पर जिला अस्पताल सतना रेफर करने की सलाह दी गई। रात दस बजे मैहर से प्रसूता को 108 एम्बुलेंस द्वारा रवाना किया गया। रात साढे 11 बजे वह सतना पहुंची। 17 सितम्बर की देर रात 2.17 बजे उसे प्रसूता वार्ड में भर्ती किया गया। परिजनों के अनुसार यह प्रसूता का पहला प्रसव था। ढाई घंटे बीतने के बाद भर्ती करना भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। प्रसूता का हीमोग्लोबिन 12.9 ग्राम एवं बीपी पल्स आदि सभी स्थिति सामान्य थी।
मृत बच्चे को दिया जन्म, उसके बाद मौत
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक 18 सितम्बर की रात करीब 11.20 बजे दीपांजलि ने लेवर रूम में सामान्य प्रसव से मृत बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद अचानक उसका ब्लड प्रेशर कम होने लगा और सांस लेने में कठिनाई आने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे हाई डिपेंडेंसी यूनिट एचडीयू वार्ड में वेंटीलेटर सपोर्ट में शिफ्ट किया गया लेकिन रात करीब साढे 11 बजे उसकी मौत हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दीपांजलि यानी प्रसूता को उल्टी होने के बाद ड्यूटी नर्स द्वारा इंजेक्शन लगाया गया जिसके बाद हालत बिगड़ गई। श्वांस नली में टुकड़ा फंसने के कारण प्रसूता की मौत हो गई। जानकारों ने बताया कि प्रसूता का प्रसव सीनियर रेसीडेंट डॉ. स्वाति द्वारा कराया गया, जिसमें मृत बच्चा पैदा हुआ। जबकि उस रात मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. निशाद फातिमा की ड्यूटी लगाई गई थी। सूत्रों ने बताया कि डॉ. निशाद फातिमा ड्यूटी से नदारद थीं। जिसके कारण केस बिगड़ गया।
पिता बोले- गलत इंजेक्शन से गई जान
मृतका के पिता राजकुमार साकेत ने आरोप लगाया कि बेटी को चिकित्सकों द्वारा गलत इंजेक्शन लगाया गया जिसके बाद तेज दर्द होने लगा और हालत गंभीर होती गई। स्थिति संभालने लेवर रूम ले जाया गया लेकिन प्रसूता की जान नहीं बचाई जा सके। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
मामले की जानकारी मिलते ही डाक्टरों के पैनल से मृतका का पोस्टमार्टम कराया गया है। ड्यूटी डॉ. निषाद फातिमा के अनुसार परिजनों द्वारा प्रसूता को चाय-बिस्किट दी गई जिसके बाद प्रसूता को उल्टी होने लगी और हालत गंभीर हो गई। सभी विषयों पर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद वास्तविक जानकारी पता चलेगी। लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन
मामला संज्ञान में आया है, मृतका की केस हिस्ट्री की जानकारी ली जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
डॉ. मंजू सिंह, एचओडी गायनी
गायनी चिकित्सकों द्वारा समय ज्यादा होने पर प्रसूता का सीजर कराने का निर्णय लिया गया। लेकिन परिजनों द्वारा सीजर डिलेवरी का सहमति पत्र नहीं भरा गया। परिजनों ने कहा कि सामान्य प्रसव के लिए इंतजार करना उचित है। परिजनों ने चाय-ब्रेड आदि खिलाया जिसके बाद प्रसूता की स्थिति गंभीर हो गई। आॅनकॉल ड्यूटी पर डॉ. निषाद फातिमा को देर रात बुलाया गया लेकिन तब तक प्रसूता की मौत हो गई। मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों द्वारा भी लेवर रूम में रात में महिला का चिकित्सकीय इलाज किया गया।
डॉ. धीरेन्द्र मिश्रा, मेडिकल कॉलेज पीआरओ


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