सतना नगर निगम ने जलकर नहीं चुकाने वालों और अवैध नल कनेक्शन धारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर ली है। 5 सदस्यीय टीम घर-घर जाकर कनेक्शनों की जांच करेगी और जल कर बकायेदारों के कनेक्शन काटे जा सकते हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।

बनाई गई 5 सदस्यीय टीम, अवैध कनेक्शनों की होगी जांच
सतना, स्टार समाचार वेब
यदि आप ने नल कनेक्शन ले रखा है और जल कर नहीं जमा कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए, आपका नल कनेक्शन कट सकता है और यदि आप अवैध नल कनेक्शन धारी हैं तो अपने कनेक्शन को जल्द वैध करा लें अन्यथा आपके खिलाफ नगर निगम वैधानिक कार्रवाई करेगा। दरअसल,नगर निगम आयुक्त ने राजस्व व जल कर शाखा की एक संयुक्त टीम बनाई है जो यह देखेगी कि गैर राजस्व वाला कितना पानी शहर में है जिसको नगर निगम ट्रीट तो कर रहा है पर उसकी बिलिंग नहीं हो रही। यही टीम अवैध कनेक्शन से लेकर नियमित बिल न जमा करने वालों की भी जांच करेगी। यह टीम शहर में अवैध नल कनेक्शनों की जांच कर यह आंकलन करने का प्रयास भी करेगी कि नगर निगम को कितना नुकसान हो रहा है?
दो करोड़ से ज्यादा का खर्च
वैसे तो लोगों को सड़क, बिजली और पानी मुहैय्या कराना नगर निगम की प्राथमिकता में है और दायित्व भी है पर इसके एवज में कुछ शुल्क निगम द्वारा अधिरोपित किया जाता है, जिसके अदायगी की अपेक्षा नगर निगम करता है। वैसे भी निगम जलकर वसूली को लेकर संजीदा नहीं है जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 6 करोड़ 39 लाख रुपए की मांग में पिछले वित्तीय वर्ष में मात्र 2 करोड़ 22 लाख की वसूली आई है। इसके एवज में यदि लोगों को पेयजल मुहैया करवाने में आने वाले सामान्य सर्वे की बात की जाए तो हर साल नगर निगम बाणसागर से पानी लेने पर ही लगभग 35 लाख रुपए खर्च कर देता है। जबकि पानी को शुद्ध करने में काम आने वाले एलम पर यहीं खर्च बरसात में हर माह लगभग 25 लाख रुपए आता है, तो सामान्य दिनों में पांच से 6 लाख रुपए । इतना ही नहीं एनीकट और फिल्टर प्लांट का बिजली बिल व अन्य खर्चे अलग हैं।
38 हजार शहर में नल कनेक्शन
शहर में वैध से ज्यादा अवैध कनेक्शन बताए जा रहे हैं। नगर निगम की जल कर शाखा से जुड़े सूत्रों की मानें तो घरेलू और व्यवसायिक मिलकर लगभग 38 हजार के करीब नल कनेक्शन हैं जबकि इससे कहीं ज्यादा अवैध कनेक्शनों की संख्या है। बताया जाता है कि शहर में लगभग 72 हजार सम्पत्तियां हैं। ऐसे में मात्र 38 हजार नल कनेक्शन अपने आप में सवाल खड़ा करता है।
6 करोड़ के विरुद्ध मात्र दो करोड़ की वसूली
नगर निगम के जल कर वसूली की बात की जाए तो इस मामले में संस्था फिसड्डी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जलकर की वसूली की मांग लगभग 6 करोड़ 39 लाख रुपए रखी गई थी, इसके एवज में वसूली मात्र 2 करोड़ 22 लाख रुपए यानि 34.8 प्रतिशत ही आई है।


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