सिंगरौली के विंध्यनगर स्थित बैंक लूटकांड के 15 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ है, केवल एक गिरफ्तारी हुई, व्यापारियों में आक्रोश बढ़ा, हाईटेक पुलिसिंग के दावे सवालों में घिरे हैं अब

हाइलाइट्स:
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
जिले की कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 17 अप्रैल को कोतवाली थाना क्षेत्र के विंध्यनगर रोड स्थित बैंक आॅफ महाराष्ट्र शाखा में दिनदहाड़े हुई करोड़ों की लूट की घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। हाईटेक पुलिसिंग का दावा करने वाली सिंगरौली पुलिस इस बड़े लूटकांड का खुलासा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। घटना के बाद पुलिस की सक्रियता सिर्फ दावों और बैठकों तक ही सीमित नजर आ रही है। अब तक केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि पांच हथियारबंद बदमाशों ने महज 15 मिनट में पूरी वारदात को अंजाम देकर पुलिस व्यवस्था की पोल खोल दी थी। बताते चले कि 17 अप्रैल की दोपहर जब आम दिनों की तरह बैंक में ग्राहकों की आवाजाही थी, तभी पांच हथियारबंद बदमाश अचानक बैंक में घुस गए। बदमाशों ने पहले बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को बंधक बनाया, फिर पूरी सुनियोजित तरीके से नगदी और करोड़ों के सोना-चांदी पर हाथ साफ कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि बदमाश इतने बेखौफ थे कि उन्होंने पूरे 15 मिनट तक बैंक के अंदर तांडव मचाया लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। वारदात के बाद आरोपी आराम से फरार हो गए और पुलिस मौके पर पहुंचकर सिर्फ जांच का ढोंग करती नजर आई। सूत्रों के मुताबिक, बदमाशों ने इस लूट को अंजाम देने से पहले करीब एक सप्ताह तक मोरवा क्षेत्र में रुककर बैंक और आसपास की गतिविधियों की रेकी की थी। यानी अपराधियों ने पूरी प्लानिंग के साथ वारदात को अंजाम दिया जबकि पुलिस पूरी तरह अनजान बनी रही।
बड़े अफसर पहुंचे लेकिन नतीजा जीरो
घटना की गंभीरता को देखते हुए उसी रात भोपाल से डीजीपी, रीवा से आईजी और डीआईजी सहित कई बड़े अधिकारी सिंगरौली पहुंचे थे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जल्द खुलासे के निर्देश दिए। लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की जांच दिशा हीन नजर आ रही है। कई राज्यों में दबिश देने के दावे जरूर किए जा रहे हैं लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। सवाल यह उठता है कि जब इतने बड़े अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे और सख्त निर्देश दिए, तो फिर भी पुलिस आखिर क्यों नाकाम साबित हो रही है।
व्यापारियों में आक्रोश,पुलिस पर भरोसा डगमगाया
इस घटना के बाद से शहर के व्यापारियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब दिनदहाड़े बैंक तक सुरक्षित नहीं है, तो आम लोगों की सुरक्षा की क्या गारंटी है। व्यापारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार बढ़ते अपराध और उन पर लगाम लगाने में पुलिस की विफलता चिंताजनक है। स्थानीय व्यापारियों का यह भी आरोप है कि पुलिस सिर्फ घटनाओं के बाद सक्रिय होती है लेकिन अपराध रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं अपनाई जाती।
जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल सिंगरौली पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली पर खड़े हो रहे हैं। एक ओर पुलिस खुद को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बताती है, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी वारदात का खुलासा करने में नाकामी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या जिले में इंटेलिजेंस फेल हो चुकी है? क्या पुलिस की निगरानी व्यवस्था कमजोर हो गई है या फिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें पुलिस का कोई डर ही नहीं रहा।
दबिश का दावा या सिर्फ दिखावा
पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में टीम भेजी गई है और लगातार दबिश दी जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 15 दिन बाद भी पुलिस के हाथ सिर्फ एक आरोपी लगा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दबिश का दावा सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह गया है। अगर पुलिस सच में गंभीर होती,तो अब तक पूरे गिरोह का पदार्फाश हो चुका होता।
हाईटेक पुलिसिंग पर सवाल
सिंगरौली पुलिस अक्सर हाईटेक सिस्टम, सीसीटीवी नेटवर्क और आधुनिक तकनीक का दावा करती है। लेकिन इस घटना ने उन सभी दावों की पोल खोल दी है। अगर शहर में पर्याप्त निगरानी व्यवस्था होती, तो बदमाशों की मूवमेंट पहले ही पकड़ में आ सकती थी। अगर पुलिस की खुफिया व्यवस्था मजबूत होती, तो एक सप्ताह तक रेकी कर रहे अपराधियों की जानकारी मिल सकती थी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, जिससे साफ है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही है।
15 दिन बाद भी अंधेरे में तीर
15 दिन का समय किसी भी बड़े केस के लिए अहम होता है। लेकिन इस दौरान पुलिस की कार्रवाई सिर्फ अंधेरे में तीर चलाने जैसी रही है। न तो लूट का पूरा माल बरामद हुआ,न ही गिरोह के अन्य सदस्य पकड़े गए और न ही कोई ठोस सुराग सामने आया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सिंगरौली पुलिस इस मामले में पूरी तरह असफल साबित हो रही है। अब सवाल यह है कि आखिर इस लूटकांड का खुलासा कब होगा।
अगर जल्द ही इस मामले का खुलासा नहीं हुआ, तो यह घटना पुलिस की सबसे बड़ी विफलताओं में गिनी जाएगी।


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