सतना और मैहर वनमंडलों में अप्रैल भर जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ीं, 60 से अधिक बीट प्रभावित, नरवाई जलाने से हालात बिगड़े, सैकड़ों एकड़ जमीन प्रभावित, वन विभाग सतर्क लेकिन चुनौती बनी रही

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
भीषण गर्मी के दिनों में जंगल में आग लगने की घटनाएं आम हैं। बीते माह में भी जंगल में आग की घटनाएं सामने आई। यहां के दो वनमंडलों की पूरे माह में औसतन हर दिन 2 नई बीट में आग का अलार्म बजा।
जानकारी के मुताबिक अप्रैल का महीना दावानल का रहा। इन तीस दिनों सतना और मैहर वनमंडल की कोई भी रेंज आग से अछूती नहीं रही। 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक की सेटेलाइट रिपोर्ट भी यही कह रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सतना की 7 रेंजों की 36 बीट और मैहर वनमंडल की मात्र 3 रेंजों की 31 बीटों में आग का अलार्म बजा था। हालांकि इसमें वन और राजस्व के बीच की जमीन की आग भी दर्ज की गई। यह वो समय था जब नरवाई जलाई गई। दोनों जिलों के कई राजस्व गांव में नरवाई की आग ने फारेस्ट फायर के अलार्म भी बजाती रही।
सबसे ज्यादा मैहर रेंज
दोनों वन मंडलों की 10 बीटों को मिला दें तो सर्वाधिक मैहर रेंज की बीट में आग का अलार्म बजा। दूसरा नंबर भी मैहर वनमंडल की ही रेंज का है। सेटेलाइट के आंकड़ों के मुताबिक मैहर रेंज की 14, अमरपाटन में 10 और मुकुंदपुर में 7 बीट में आग की घटनाएं सामने आर्इं। इसी तरह सतना वनमंडल की बात करें तो सर्वाधिक आग मझगवां रेंज में लगी। यहां कि 8 बीट में घटना सामने आई। इसके अलावा चित्रकूट, उचेहरा, सिंहपुर में 7-7 बीट, नागौद में 3 और सतना-बरौंधा में 2-2 बीट में आग का अलार्म बजा।
देवलहा में 200 हेक्टर साफ
17 अप्रैल 2026 को चित्रकूट उपवनमंडल में आने वाले मझगवां वनपरिक्षेत्र के देवलहा बीट में 12 बजकर 46 मिनट और 32 सेकेंड में आग लगने का अलार्म बज गया था। यह अलार्म हवा का सहारा पाकर दावानल में बदल गया था। कक्ष क्रमांक पी 839 और पी 840 में आग लगी थी। आग के दावानल में बदलने का कारण लेंटाना और वन तुलसा की झाड़ियां बताई गई थीं। आग 15 से 20 हेक्टेयर के जंगल को प्रभावित कर गई। यह आग सतही आग थी इसका मतलब है कि आग जंगल के पेड़ों को प्रभावित नहीं कर सकी। ऐसा वन विभाग कह रहा है।
नरवाई की 295 घटनाएं
जंगल की आग का अलार्म बज रहा था लेकिन खेतों की नरवाई भी जल रही थी। सतना और मैहर जिला में करीब 295 से ज्यादा जगहों पर नरवाई की आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। सेटेलाइट के डाटा के अनुसार सतना में 185 से अधिक और मैहर जिला में 110 से ज्यादा जगहों पर नरवाई जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। इसमें करीब 730 एकड़ की जमीन प्रभावित हुई हैं। सतना में 450 एकड़ और मैहर में 280 एकड़ की जमीन प्रभावित हुई है।


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