मध्यप्रदेश में माननीय का रुतबा बरकरार रहेगा। अब ये शिकायत नहीं आएगी कि अफसर दफ्तरों के चक्कर कटवा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन कर दिया है।
भोपाल में उपभोक्ता फोरम ने नगर निगम के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत समय पर आवास उपलब्ध न कराने के मामले में कोर्ट ने नगर निगम पर 35 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई है। साथ ही हितग्राही को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
सतना में डाइट प्राचार्य द्वारा कलेक्टर और सीईओ को बायपास कर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी गई फाइल से एक भृत्य का निलंबन हो गया। सीनियर-जूनियर पदक्रम की अनदेखी, नियमों की व्याख्या और शिक्षक निलंबन ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देश की राजधानी में जनता का दम घुट रहा है। लोगों ने घरों से बाहर निकलना छोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने पर रोक नहीं लग पाई है। दरअसल, दिल्लीवासियों को इन दिनों भारी प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी की हवा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है।
आवारा कुत्तों के केस में राज्यों की तरफ से हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन नवंबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया है। इस दौरान पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के मुख्य सचिवों को कोर्ट में उपस्थित नहीं होना होगा।
भारत चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के सत्यापन पर मचे घमासान के बीच बड़ा और सख्त एक्शन लिया है। इससे नाम के लिए चल रहे राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है। आयोग की इस कार्रवाई से मध्यप्रदेश के भी दो दर्जन राजनीतिक दलों की मान्यता समाप्त हो गई है।
मध्यप्रदेश में माननीय मनमानी पर उतारू हैं। उनके रुतबे में कोई कमी नहीं दिख रही है। संगठन की हिदायत भी हवा में नजर आ रही है। इससे संगठन के दिग्गजों का टेंशन बढ़ रहा है। वाह-वही कम और किरकिरी ज्यादा हो रही है। दरअसल, मध्यप्रदेश में अफसरों और नेताओं के बीच पिछले एक साल में टकराव की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के कई सरकारी स्कूल खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। बरसात के दिनों में बच्चों की जान खतरे में है, लेकिन ना मरम्मत हुई और ना ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। दीवारों की दरारें, टपकती छत और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं कर रहे।
चितरंगी क्षेत्र के कुलकवार और बगदरा गांवों के लोग आज भी बेलहवा नदी में पुल के अभाव में जान हथेली पर रखकर नदी पार करने को मजबूर हैं। बरसात में ग्रामीणों ने खुद लकड़ी और बांस से पुल बनाकर रास्ता चालू किया, विकास के सरकारी दावे हुए बेनकाब।





















