रतहरा-चोरहटा सड़क पर पहली बारिश के बाद कई हिस्सों में धंसाव और क्षति सामने आई। स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में फर्जी भुगतान का बड़ा घोटाला सामने आया है। रायपुर–भलुहा–मनगवां रोड, जिसका निर्माण एमपीआरडीसी के अधीन था, उसके नाम पर फर्जी मेजरमेंट बुक बनाकर एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया। इस घोटाले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री केके गर्ग और एसडीओ ओंकार मिश्रा की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। चीफ इंजीनियर आर.एल. वर्मा ने मामले पर टिप्पणी से इंकार किया है।
सतना और मैहर जिले के टोल प्लाजाओं पर फास्टैग को दरकिनार कर नकद में पाँच गुना तक अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई हैं। वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि टोल कर्मी फास्टैग मशीन की खराबी का बहाना बनाकर जबरन नकद वसूलते हैं और श्रेणी बदलकर अधिक राशि वसूलते हैं। विरोध करने पर अभद्रता तक की जाती है। स्थानीय लोगों ने एमपीआरडीसी और प्रशासन से टोल कर्मियों पर कार्रवाई और जांच की माँग की है। उधर, केंद्र सरकार ने राहत देते हुए यूपीआई से टोल भुगतान की सुविधा शुरू करने की घोषणा की है।
रीवा के इटौरा बायपास पर 11 केवी लाइन शिफ्टिंग के दौरान ठेका कंपनी की लापरवाही ने एक कर्मचारी की जान ले ली। करंट लगे खंभे में काम करवाने से युवक सिर के बल गिर गया और मौके पर ही मौत हो गई। विद्युत विभाग ने चेतावनी दी थी, लेकिन कंपनी ने अनियंत्रित कार्य करवाया।
रीवा जिले में एमपीआरडीसी ने गोविंदगढ़ से भरतपुर तक वन भूमि पर बिना अनुमति सड़क चौड़ीकरण कर डाला। वन विभाग ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच रिपोर्ट भोपाल भेजी है। अब यह मामला पर्यावरण मंत्रालय तक पहुंच गया है। एमपीआरडीसी पहले भी खराब सड़कों और अवैध टोल वसूली के कारण विवादों में रहा है।
सिंगरौली में दशकों से पदस्थ एमपीआरडीसी के सहायक प्रबंधक पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे हैं। फोरलेन और शहर की सड़कों की जर्जर हालत से जनता में भारी आक्रोश, स्थानांतरण की उठी मांग।
पन्ना-अमानगंज स्टेट हाईवे पर टोल वसूली तो हो रही है, लेकिन सड़क के किनारे शोल्डर नहीं। हादसे बढ़े, जिम्मेदार बने मूकदर्शक। जानिए पूरी स्थिति।



















