रामनगर सीएचसी में ब्लड स्टोरेज सेंटर का लाइसेंस खत्म होने से मरीजों को सतना तक 70 किमी जाना पड़ रहा है। संसाधनों की कमी से सुविधा शुरू नहीं हो सकी, जिससे गंभीर मरीजों को परेशानी हो रही है।
सतना जिला अस्पताल में रोजाना 70-80 दंत मरीज पहुंच रहे हैं। एक साल में 50 मुख कैंसर के मामले सामने आए, तंबाकू सेवन और लापरवाही प्रमुख कारण बताए गए।
सतना के निजी अस्पताल में एंडोस्कोपी के दौरान 74 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पुलिस ने समझाइश देकर शव का पोस्टमार्टम कराने की सहमति दिलाई।
सतना जिला अस्पताल में समय से पहले डिस्चार्ज और कमीशन के आरोप, 22 आशा कार्यकर्ताओं के नाम सार्वजनिक, जांच तेज।
सतना के एक निजी अस्पताल में आग की घटना ने जिले की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल समेत करीब 30 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम बिना फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। नोटिसों की अनदेखी, जिम्मेदारों की चुप्पी और मरीजों की जान खतरे में।
सतना जिले के उचेहरा में ट्रेन से गिरकर घायल हुए युवक की मौत इलाज के अभाव में हो गई। डॉक्टर ने रेफर किया लेकिन 108 एम्बुलेंस तीन घंटे तक नहीं आई। घायल स्ट्रेचर पर तड़पता रहा और आखिरकार दम तोड़ दिया। मौत के बाद भी शव शाम तक अस्पताल के बाहर पड़ा रहा। सरकारी सिस्टम की लापरवाही ने गोल्डन आवर की हत्या कर दी।
सतना में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत बनने वाली आयुष विंग एक बार फिर विवादों में। खोवा मंडी के पास प्रस्तावित भवन स्थल पर स्थित हनुमान मंदिर को लेकर ड्राइंग-डिजाइन में आ रहा है बदलाव का पेंच। पिछले 4 साल से रुकी परियोजना के दोबारा टेंडर होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। आयुष संचालनालय को भेजा गया डिजाइन परिवर्तन का प्रस्ताव। जानिए पूरी रिपोर्ट।
सतना जिले के कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फैली गंदगी और दुर्गंध ने मरीजों के साथ डॉक्टरों को भी परेशान कर दिया है। चारों ओर अव्यवस्थाएं और आवारा कुत्तों का जमावड़ा अस्पताल के हालात को और खराब कर रहा है। बिजली, जनरेटर और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। वहीं अमरपाटन सिविल अस्पताल में झाड़फूंक जैसी घटनाएं स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
सतना के जिला अस्पताल के पोस्ट ऑपरेटिव मेटरनिटी वार्ड में भीषण गर्मी से मरीज बेहाल हैं। मरीजों को राहत देने की जगह परिजन खुद टेबल फैन लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन अब तक कूलर नहीं लगा सका।





















