रीवा में बढ़ते वायु प्रदूषण और विकास कार्यों के कारण सांस के मरीज तेजी से बढ़े। 13 महीनों में 1689 मरीज 108 एम्बुलेंस से ऑक्सीजन सहारे अस्पताल पहुंचे, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर सामने आया।
रीवा और मऊगंज में अगस्त महीने में 90 मृतकों के शव नि:शुल्क शव वाहन से घरों तक पहुँचाए गए। सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा को मरीजों की जान बचाने के साथ ही अब शव ढोने की जिम्मेदारी भी दे दी है। यह सेवा नि:शुल्क है लेकिन इसमें कई खामियाँ हैं, जैसे-शव वाहन जिला सीमा पार नहीं कर सकता।
सतना जिले में 108 एम्बुलेंस सेवा की हालत खस्ताहाल, मरीज को छोड़ने के बाद जिला अस्पताल गेट पर बंद पड़ी एम्बुलेंस को धक्का लगाकर स्टार्ट करना पड़ा। मॉनिटरिंग की कमी और स्टाफ की लापरवाही से जीवनदायिनी सेवा अब खटारा एक्सप्रेस बन रही है।
सतना जिला अस्पताल परिसर में खड़ी 108 एम्बुलेंस मरीज को ले जाने से पहले ही बंद हो गई। ड्राइवर ने कई कोशिशों के बाद जब वाहन स्टार्ट नहीं किया तो धक्का लगाकर किनारे किया गया। कई घंटे बाद दूसरी एम्बुलेंस का इंतजाम हो पाया। जिले में 60 से अधिक 108 एम्बुलेंस होने के बावजूद मॉनिटरिंग के अभाव में मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल पा रही।
सतना जिले के रामनगर अस्पताल में गंभीर मरीज को एम्बुलेंस तक नहीं मिल सकी, जबकि तीन एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में खड़ी थीं। जांच में खुलासा हुआ कि ड्राइवर ने फर्जी तरीके से गाड़ी को ऑन-रोड दिखाया। लापरवाही के चलते ड्राइवर और EMT को सस्पेंड कर भोपाल अटैच किया गया। 108 सेवा की यह मनमानी अब आम हो गई है।


















