रीवा और मऊगंज में अगस्त महीने में 90 मृतकों के शव नि:शुल्क शव वाहन से घरों तक पहुँचाए गए। सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा को मरीजों की जान बचाने के साथ ही अब शव ढोने की जिम्मेदारी भी दे दी है। यह सेवा नि:शुल्क है लेकिन इसमें कई खामियाँ हैं, जैसे-शव वाहन जिला सीमा पार नहीं कर सकता।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
सरकार ने जीवन बचाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा को ही मौत के बाद शव को श्मशान पहुंचाने की जिम्मेदारी दे दी है। अब 108 ही जीवन रक्षक और जीवन मुक्ति का जरिया बन गया है। रीवा और मऊगंज मेंं अगस्त महीने में 90 मृतकों को अस्पताल से शव वाहन ने श्मशान तक पहुंचाया है। इस मामले में रीवा नंबर वन है। हालांकि इस सेवा में एक सबसे बड़ी खामी भी है। अस्पताल में यदि किसी मरीज की मौत हुई तो सिर्फ जिला के अंदर ही शव वाहन ले जा पाएगा। बार्डर पार करने की मनाही है। सरकार ने शव वाहन तो दिया लेकिन बार्डर की पाबंदियां भी साथ दे दी हैं।
ज्ञात हो कि सरकार ने अस्पताल में मरीजों के इलाज की हर सुविधा मुहैया कराई। जगह जगह अस्पताल खुलवाए। डॉक्टरों की पदस्थापना कराई। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक खोले गए। महंगी मशीनें स्थापित कराई गर्इं लेकिन एक दर्द गरीबों का पीछा नहीं छोड़ रहा था। अपनों को खोने के बाद उन्हें घर तक ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अस्पताल में शव वाहन नहीं थे। 108 एम्बुलेंस भी शव नहीं ले जाती थी। अस्पताल से घर तक शव ले जाने के लिए गरीबों के पास प्राइवेट वाहन करने की क्षमता नहीं थी। उन्हें कंधे पर, साइकिल पर या फिर रिक्शों पर शव को श्मशान या फिर घर तक ले जाना पड़ता था। आए दिन इस तरह की मार्मिक घटनाएं और तस्वीरें सामने आती रहती थी। इसके बाद सरकार ने गरीबों का दुख दूर करने एक बड़ा कदम उठाया। सभी जिलों में शव वाहन चलाने का फैसला लिया। यह सेवा पूरी तरह से फ्री की गई है। 28 जुलाई से नि:शुल्क शव वाहन सेवा शुरू हुई थी। एक महीने से अधिक समय हो गया। एक महीने में रीवा जिला के अंदर 81 मृतकों के शव नि:शुल्क घरों तक पहुंचाया गया। यह आंकड़े डराने वाले हैं लेकिन इस मामले में रीवा टॉप पर है।
अस्पताल में मरने वालों को ही मिलती है यह सुविधा
नि:शुल्क शव वाहन के लिए किसी तरह का टोल फ्री नंबर नहीं है। यह सेवा अस्पताल से ही उपलब्ध होती है। मेडिकल कॉलेज या फिर जिला अस्पताल या फिर अन्य अस्पताल में यदि कोई मरीज भर्ती है तो उनके निधन पर ही घर तक ले जाने के लिए शव वाहन दिया जाता है। किसी तरह का टोल फ्री नहीं जारी किया गया है। हालांकि लोगों की सहूलियत के लिए कुछ नंबर हाल फिलहाल शुरू किए गए है।
बार्डर पार नहीं कर सकते शव वाहन
इस सेवा में दो खमियां हैं। इसके कारण गरीबों का दर्द अभी पूरी खत्म नहीं हुआ है। एक जिला से दूसरे जिला तक शव पहुंचाने मेंं दिक्कतें आ रही हैं। अभी तक जो सेवाएं दी जा रही हैं, वह सिर्फ जिला के अंदर की ही हैं। यदि मरीज एक जिला में खत्म हुआ है तो उसे दूसरे जिला तक शव ले जाने में अभी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हैं। वहां पर आ रही हैं। मेडिकल कॉलेज में दूर दूर से दूसरे जिलों से भी मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में मरीजों की मौत के बाद उन्हें दूसरे जिला ले जाने में नियमअड़चन डाल रहे हैं। इसे लेकर मेडिकल कॉलेज ने आपत्ति उठाई है । यदि इसमें बदलाव होता है तभी राहत मिलेगी।
फिलहाल बड़े जिलों में चार और छोटे जिलों में दो शव वाहन
शव वाहन सेवा को फिलहाल शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में बड़े जिलों को जहां पर मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। वहां पर चार वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं जहां छोटे जिले में वहां पर सिर्फ दो शव वाहन दिए गए हैं। पहले चरण में इतने ही वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। अगले चरण में सभी सीएचसी तक भी वाहनों की उपलब्धता की प्लानिंग है।
इनका कोई टोल फ्री नंबर नहीं है
शव वाहन के लिए अभी किसी तरह का कंपनी ने टोल फ्री नंबर शुरू नहीं किया है। इसके कारण भी मृतकों के परिजनों को परेशान होना पड़ता है। इसका फायदा प्राइवेट एम्बुलेंस संचालक उठाते हंै। गांधी स्मृति चिकित्सालय में इसी बात को लेकर गुरुवार को बवाल भी मचा था। एक महिला के बच्चे की अस्पताल में मौत हो गई थी। नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा थी लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। प्राइवेट एम्बुलेंस वाले से 2 हजार में सौदा हुआ था। इसी बात पर बवाल मच गया था।
सबसे अधिक रीवा में मृतक
एक महीने के आंकड़े चौकाने वाले हैं। भले ही कंपनी ने कम दर पर टेंडर डाला और पुण्य कमा रही है लेकिन रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खोल रही है। एक महीने में ही मेडिकल कॉलेज सहित अस्पतालों में 81 लोगों ने दम तोड़ा। उन्हें शव वाहन से अस्पताल तक पहुचांया। यह आंकड़ा वह है जो रीवा जिला के अंदर तक शवों को पहुंचाने वाली है। दूसरे जिलों तक जो शव गए उनके आंकडेÞ यदि जोड़े जाएं तो मौत के आंकड़ों ग्राफ और डरावना हो जाएगा।
यह लोग इस सेवा के लिए हैं पात्र
योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों में रोगी, दुर्घटना पीड़ितों की इलाज के दौरान मृत्यु होने पर मृतक का शव ससम्मान घर तक नि:शुल्क पहुंचाना है। सभी जिलों में यह सेवा सुचारू रूप से संचालित हो रही है।
तरुण सिंह परिहार, सीनियर मैनेजर, 108 एम्बुलेंस और शव वाहन सेवा


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