सतना फल-सब्जी मंडी में किसानों के लिए बनाई गई पानी की टंकी वर्षों से बंद पड़ी है। अब बच्चे उस पर चढ़ रहे हैं, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
फल-सब्जी मंडी में किसानों और मंडी आने वाले लोगों की प्यास बुझाने के लिए बनाई गई पानी की टंकी वर्षों बाद भी अपने मकसद को पूरा नहीं कर सकी। आरोप है कि निर्माण के बाद टंकी कभी विधिवत चालू ही नहीं हुई और अब यह अनुपयोगी ढांचे की तरह खड़ी है। इससे भी गंभीर स्थिति यह है कि छोटे बच्चे टंकी पर चढ़कर उसके अंदर तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ निर्माण पर खर्च हुए पैसे का नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी है यदि कोई बच्चा गिरा या टंकी के अंदर हादसे का शिकार हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
अब टंकी पर चढ़ रहे बच्चे
बेकार खड़ी टंकी अब सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर खतरा बनती दिखाई दे रही है। सामने आए वीडियो में छोटे बच्चों के टंकी पर चढ़ने और उसके अंदर तक पहुंचने की स्थिति बताई जा रही है। यदि बच्चों को इतनी ऊंची संरचना तक पहुंचने से रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तो यह मंडी प्रबंधन की गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है। टंकी पर चढ़ते समय पैर फिसलने या अंदर गिरने जैसी स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि बच्चों की पहुंच रोकने के लिए टंकी की सीढ़ियों या प्रवेश वाले हिस्से को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? वहां चेतावनी बोर्ड, ताला या अन्य सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं है?
पानी को ही तरस रही टंकी
फल-सब्जी मंडी में रोजाना किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा व्यापारी, हम्माल, मजदूर और खरीदार भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। ऐसे स्थान पर स्वच्छ पेयजल बुनियादी जरूरत है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए मंडी परिसर में पानी की टंकी का निर्माण कराया गया, लेकिन आरोप है कि वर्षों गुजरने के बावजूद यह अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकी। टंकी यदि निर्माण के बाद से ही उपयोग में नहीं आई तो सबसे बड़ा सवाल इसकी उपयोगिता और उस पर खर्च की गई राशि को लेकर उठता है।
हादसे के बाद जागेगी मंडी ?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि किसी दिन कोई बच्चा टंकी से नीचे गिर गया तो जवाबदेही किसकी होगी? क्या सुरक्षा व्यवस्था तभी की जाएगी जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी? किसी अनुपयोगी संरचना को वर्षों तक खुले और असुरक्षित हाल में छोड़ देना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। खासकर तब, जब वहां बच्चों की आवाजाही हो रही हो। मंडी समिति को तत्काल टंकी तक पहुंच रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम करने चाहिए। साथ ही यह भी जांचना जरूरी है कि इतने वर्षों तक इस खतरे को नजरअंदाज क्यों किया गया।
दूसरी तरफ पानी के लिए परेशानी
विडंबना यह है कि जिस मंडी में लोगों को पेयजल की जरूरत है, वहीं पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया ढांचा वर्षों से बेकार पड़ा बताया जा रहा है। किसान और मंडी आने वाले लोग पानी के लिए परेशान हों और सामने खड़ी टंकी किसी काम न आए तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मंडी समिति को यह बताना चाहिए कि वर्तमान में किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के लिए पेयजल की कितनी व्यवस्था उपलब्ध है। यदि टंकी तकनीकी कारणों से चालू नहीं हो सकती तो उसकी जांच कर उसे उपयोगी बनाने या उसके संबंध में कोई ठोस निर्णय लेने की जरूरत है।


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