रीवा में बढ़ते वायु प्रदूषण और विकास कार्यों के कारण सांस के मरीज तेजी से बढ़े। 13 महीनों में 1689 मरीज 108 एम्बुलेंस से ऑक्सीजन सहारे अस्पताल पहुंचे, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर सामने आया।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
वायु प्रदूषण का साया रीवा पर भी मंडराने लगा है। पॉल्यूशन बढ़ने से मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। सांस लेना तक मुश्किल होने लगा है। मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 108 एम्बुलेंस की मदद से 13 महीनों में 1689 मरीजों को अस्पताल पहुंचाया गया है। इन मरीजों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एम्बुलेंस में आक्सीजन की मदद से इनकी जान बचाई गई। वहीं इस मामले में स्मार्ट सिटी बन रहा सागर सबसे ऊपर है।
आपको बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में डेव्हलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है। सड़क से लेकर बड़े बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक डेव्हलपमेंट की बयार बह रही है। इस बयार में हरियाली पर जमकर कुल्हाड़ियां चली। पेड़ काटे गए लेकिन इनकी पूर्ति नहीं हो पाई। अब गांव में ही हरियाली तेजी से घट रही है। इसके अलावा समर्थन मूल्य के चक्कर में किसान खेत और फसलों में जहर का छिड़काव करने लगे हैं। डेव्हलपमेंट और खेतों में जहरीले रसायन का छिड़काव सिर्फ लोगों को अंदर से ही नहीं तोड़ रहा, सांसों में भी यह प्रदूषण घोल रहा है। यही वजह है कि जहां बड़े बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। विकास की हवा बह रही हैं। वहीं के लोग सांस की बीमारियों से ज्यादा जूझ रहे हैं। रीवा भी ऐसे जिलों में एक है। पिछले एक साल के आंकड़ों पर यदि नजर डाले तो प्रदेश में रीवा 5 वां ऐसा जिला हैं, जहां सबसे अधिक श्वसन संबंधी मरीजों को 108 एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल तक पहुंचाया गया। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक कुल 1689 मरीजों को सांस लेने की तकलीफ हुई, जिन्हांने एम्बुलेंस की मदद ली। वहीं इस मामले में सागर जिला सबसे ऊपर है। यहां इसी समयावधि में 3015 मरीज अस्पताल पहुंचाए गए।
नशे का सेवन भी चरम पर पहुंच गया है
रीवा नशा के मामले में सबसे ज्यादा बदनाम रहा है। रीवा को कोरेक्स सिटी के नाम से भी लोग जानने लगे हैं। यहां नशा के नाम पर गांजा से लकर नशी कफ सिरप सबसे अधिक बिकती है। यह अवैध नशा भी लोगों की सांस का दुष्मन बन गया है। अधिक नशा करने वाले भी ब्रीदिंग समस्या से जूझ रहे हैं। सांस के रोगियां की संख्या रीवा में तेजी से बढ़ रही है। लोग प्रदूषण के कारण अस्थमा, फेफड़ों में इन्फेक्शन, टीबी जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस प्रदूषण के असर की पोल इन आंकड़ों ने खोली है।
जनवरी 25 से जनवरी 26 तक की स्थिति
जिला मरीजों की संख्या


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