रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में सरकारी सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी सेंटर भेजे जाने के आरोप लगे हैं। मामले ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और निजी प्रैक्टिस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को ओपीडी, बेड और जांच सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
रीवा में आयोजित कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य बताया। संस्थागत प्रसव, नियमित जांच और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया गया।
प्रदेश की नि:शुल्क शव वाहन सेवा से हजारों परिवारों को राहत मिली है, लेकिन रीवा में 9 महीनों में 1,129 मौतों के आंकड़े ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली और इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रीवा स्वास्थ्य विभाग में लोकल पर्चेज के नाम पर लाखों की दवा खरीदी और भुगतान को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। शिकायत कलेक्टर और कमिश्नर तक पहुंचने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई और जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
रीवा-मऊगंज की बिगड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर भोपाल सख्त हुआ है। 26 अप्रैल को एसीएस और 27 अप्रैल को हेल्थ कमिश्नर औचक निरीक्षण करेंगे। विभाग में दवा खरीदी जांच को लेकर खलबली है।
रीवा में बढ़ते वायु प्रदूषण और विकास कार्यों के कारण सांस के मरीज तेजी से बढ़े। 13 महीनों में 1689 मरीज 108 एम्बुलेंस से ऑक्सीजन सहारे अस्पताल पहुंचे, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर सामने आया।
रीवा के संजय गांधी और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नवंबर-दिसंबर के दौरान दिल के मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के बीच पोस्टमार्टम के आंकड़े डराने लगे हैं। साल खत्म होने से पहले ही 1063 पीएम हो चुके हैं। डॉक्टरों की कमी, प्राइवेट प्रैक्टिस, नाइट राउंड का अभाव और लगातार रेफरल ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है।






















