मध्यप्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार आंगनवाड़ी केंद्रों में शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे 5 से 6 आयु वर्ष के बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र प्रदान कर उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में एलोपैथी के बाद अब यूनानी चिकित्सा पद्धति की उर्दू में होने वाली पढ़ाई भी हिंदी में करने और परीक्षा देने की सुविधा रहेगी। इसके लिए आयुष विभाग ने उर्दू पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद कराया है। स्नातक (बीयूएमएस) प्रथम वर्ष में सात पुस्तकें लगती हैं। इनमें से पांच पुस्तकों का अनुवाद हो गया है।
इंदौर में आयोजित MP टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेश और नवाचार पर चर्चा की। जानिए 'मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2025' का मसौदा, जिसका लक्ष्य उज्जैन को स्पेस इनोवेशन केंद्र बनाना है।
मऊगंज पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने जनसुनवाई को तकनीक से जोड़ते हुए सभी थानों के प्रभारियों को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जोड़ा। फरियादियों की समस्याओं को मौके पर ही सुना गया और थाने स्तर पर त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए गए। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय आने की जरूरत से राहत देती है।
एम्स भोपाल ने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग फॉर इनोवेशन (WURI) 2025 में विजनरी लीडरशिप श्रेणी में वैश्विक स्तर पर 34वां स्थान प्राप्त किया। जानें कैसे संस्थान ने चिकित्सा शिक्षा और नवाचार में अपनी पहचान बनाई।

















