भोपाल के जवाहर चौक में गुरुवार दोपहर 5 दुकानों की छतें और छज्जे गिर गए। दुकानदार बाल-बाल बचे। व्यापारियों ने मेट्रो निर्माण और निगम की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार बताया है।
शहडोल शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में सीवरेज निर्माण एजेंसी की लापरवाही से सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। अधूरे कार्य और निर्माण रोकने की मनमानी से आम जनता और व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सतना जिला पंचायत की सामान्य सभा में सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अपनाया। पीएमजीएसवाई के महाप्रबंधक पर जर्जर सड़कों और अधूरे कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए, साथ ही शीघ्र कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
सतना शहर की सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है। गड्ढों और पानी से भरी गलियां दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं। ओवरब्रिज से लेकर सिविल लाइन और स्टेशन रोड तक हर रास्ता एक्सीडेंटल जोन बन गया है। नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से जनता त्रस्त और व्यापार चौपट है।
पन्ना जिले में शासकीय विद्यालयों की बदहाल व्यवस्था पर हिंदू युवा वाहिनी ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जर्जर भवन, खस्ताहाल शौचालय और पानी की समस्या को लेकर संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सतना जिले के सितपुरा-छींदा मार्ग की हालत बद से बदतर, बारिश में दलदल और गड्ढों से ग्रामीण परेशान। ट्रक-ट्रैक्टर फंसने से जाम लगा, प्रशासन चुप। एक माह से मरम्मत की मांग अनसुनी, सड़क पर धान रोपने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई। अब ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरने का एलान किया है। जानिए पूरा मामला।
पन्ना जिले के चितारबरा गांव में जर्जर स्कूल भवन में बच्चों की पढ़ाई की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। शाहनगर एसडीएम श्रुति अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर विद्यालय और सड़क का निरीक्षण किया। रिसाव वाले कमरों को फिलहाल बंद कर दिया गया है, वहीं सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
रीवा और मऊगंज जिलों की 149 स्कूलों को पूरी या आंशिक रूप से जमींदोज किया जाएगा, जबकि 439 स्कूलों की हालत मरम्मत योग्य बताई गई है। ये भवन पंचायतों द्वारा 2005–2008 में बनवाए गए थे, लेकिन घटिया निर्माण के चलते 20 साल भी नहीं टिक पाए। अब छात्र जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
सतना ज़िले के सीएम राइज विद्यालयों की हालत चिंताजनक है। सिंहपुर स्कूल में छत से प्लास्टर गिर रहा है, दीवारों में दरारें हैं और कक्षाएं जर्जर कमरों में चल रही हैं। स्कूल में शिक्षकों की भी भारी कमी है। ऐसे हालात में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों पर संकट है। सरकार के दावों और ज़मीनी सच्चाई में बड़ा अंतर सामने आ रहा है।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के कई सरकारी स्कूल खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। बरसात के दिनों में बच्चों की जान खतरे में है, लेकिन ना मरम्मत हुई और ना ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। दीवारों की दरारें, टपकती छत और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं कर रहे।






















