भारत की चक्रवात पूवार्नुमान प्रणाली में पिछले दशक में सुधार हुआ है। हालांकि, 2025 के आंकड़े एक दूसरी चुनौती भी दिखाते हैं। इस साल चक्रवात के मार्ग का अनुमान लगाने में त्रुटि पिछले पांच वर्षों के औसत से बढ़ी, जबकि तीव्रता का अनुमान बेहतर रहा। सवाल है कि इन आंकड़ों से भारत की पूवार्नुमान क्षमता में सुधार की कितनी स्पष्ट तस्वीर उभरती है।

क्या पूवार्नुमान ने मौतों के आंकड़ों को कम किया ?
मीतेन्द्र नागेश। भोपाल
चक्रवात ‘अर्नब’ ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि भारत की पूवार्नुमान प्रणाली कितनी सटीक है और समय रहते तूफान के खतरे का आकलन कितना बेहतर हुआ है। समुद्र में उठने वाला चक्रवात कितनी दूर तक जाएगा, किस जगह तट से टकराएगा और उसकी रफ्तार कितनी होगी—इन अनुमानों पर हजारों लोगों की सुरक्षा निर्भर करती है। भारत की चक्रवात पूवार्नुमान प्रणाली में पिछले दशक में सुधार हुआ है। हालांकि, 2025 के आंकड़े एक दूसरी चुनौती भी दिखाते हैं। इस साल चक्रवात के मार्ग का अनुमान लगाने में त्रुटि पिछले पांच वर्षों के औसत से बढ़ी, जबकि तीव्रता का अनुमान बेहतर रहा। सवाल है कि इन आंकड़ों से भारत की पूवार्नुमान क्षमता में सुधार की कितनी स्पष्ट तस्वीर उभरती है।
भारत में चक्रवात आने से पहले उसकी दिशा, समुद्र से तट तक पहुंचने की संभावित जगह और हवा की रफ्तार का अनुमान लगाने की क्षमता में पिछले दशक के दौरान सुधार हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच चक्रवात के मार्ग, तट से टकराने की जगह और तीव्रता के पूवार्नुमान की सटीकता 2016 से 2020 की तुलना में बेहतर हुई। इस अवधि में मार्ग पूवार्नुमान की सटीकता में 20 से 25 प्रतिशत और तट से टकराने की जगह तथा तीव्रता के पूवार्नुमान में 35 से 45 प्रतिशत तक सुधार हुआ है।
चक्रवात पूवार्नुमान की सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह है कि चेतावनी मिलने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और नुकसान कम करने के लिए कितना समय मिला। भारत में चक्रवात संबंधी चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारियों में पिछले वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। सरकार ने संसद में बताया कि चक्रवात बिपरजॉय के दौरान 2023 में और चक्रवात दाना के दौरान 2024 में कोई मौत दर्ज नहीं हुई। सरकार ने शुरूआती चेतावनियों और केंद्र तथा राज्य सरकारों की समय पर कार्रवाई को हाल के वर्षों में जान-माल के नुकसान में कमी का महत्वपूर्ण कारण बताया है।
2025 के आंकड़े क्या कहते हैं—सुधार या गिरावट?
2025 के आंकड़े इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार की ओर से मार्च 2026 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, उस वर्ष चक्रवात के मार्ग की औसत त्रुटि 24 घंटे के लिए 80 किलोमीटर, 48 घंटे के लिए 120 किलोमीटर और 72 घंटे के लिए 204 किलोमीटर रही। 2020-2024 के औसत में ये त्रुटियां क्रमश: 72, 111 और 154 किलोमीटर थीं। इन आंकड़ों में 72 घंटे की अवधि में सबसे ज्यादा अंतर दिखाई देता है। पिछले पांच वर्षों के औसत की तुलना में 2025 में त्रुटि 50 किलोमीटर अधिक रही। यानी एक साल के आंकड़े में लंबी अवधि के मार्ग पूवार्नुमान की सटीकता कमजोर दिखाई देती है।
दस साल में कितना बदला पूवार्नुमान?
चक्रवात का पूवार्नुमान केवल यह बताना नहीं है कि समुद्र में तूफान बन रहा है। इसमें कई अलग-अलग सवालों के जवाब देने होते हैं—चक्रवात किस दिशा में बढ़ेगा, अगले 24 से 72 घंटों में उसकी स्थिति कहां होगी, हवा की रफ्तार कितनी होगी और वह तट के किस हिस्से से टकरा सकता है। आईएमडी के अनुसार, पिछले दशक में पूवार्नुमान की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए मौसम संबंधी आंकड़ों के संग्रह, उनके विश्लेषण, गणितीय मॉडल और चेतावनी जारी करने की प्रणालियों में सुधार किया गया है। सरकार ने संसद में बताया कि 2021-2025 की तुलना में 2016-2020 के दौरान पूवार्नुमान की त्रुटियों के आधार पर मार्ग की सटीकता में 20-25 प्रतिशत और तट से टकराने के स्थान व तीव्रता की सटीकता में 35-45 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया।
चक्रवात का रास्ता बताने में क्या सुधार हुआ?
मार्ग पूवार्नुमान की त्रुटि यह बताती है कि किसी निश्चित समय के लिए चक्रवात की अनुमानित स्थिति और बाद में दर्ज उसकी वास्तविक स्थिति के बीच औसतन कितना अंतर रहा। यह दूरी किलोमीटर में मापी जाती है। त्रुटि जितनी कम हो, अनुमान उतना सटीक माना जाता है। आईएमडी के मार्च 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार, 2016-2020 और 2021-2025 के बीच 24 घंटे के पूवार्नुमान में औसत त्रुटि 77 से घटकर 73 किलोमीटर हुई, जबकि 48 घंटे के अनुमान में केवल एक किलोमीटर का अंतर आया। 72 घंटे के अनुमान में त्रुटि 159 से बढ़कर 168 किलोमीटर हो गई।
तट से टकराने की जगह का अनुमान
लैंडफॉल पूवार्नुमान बताता है कि चक्रवात समुद्र से जमीन पर किस स्थान के आसपास पहुंचेगा। सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 2016-2020 की तुलना में 2021-2025 के दौरान तट से टकराने के बिंदु के पूवार्नुमान में सुधार हुआ। 24 घंटे पहले जारी अनुमान की औसत त्रुटि 31.9 किलोमीटर से घटकर 19 किलोमीटर रह गई। 48 घंटे पहले के अनुमान में यह 61.5 किलोमीटर से घटकर 34.4 किलोमीटर हो गई। 72 घंटे पहले के अनुमान की त्रुटि 91.9 किलोमीटर से घटकर 77.3 किलोमीटर रही। पांच साल के औसत में आईएमडी का अनुमान वास्तविक टकराव-बिंदु के अधिक करीब आया। खास तौर पर 24 और 48 घंटे पहले किए गए अनुमान में त्रुटि कम हुई।
चक्रवात की ताकत का अनुमान कितना सटीक हुआ?
चक्रवात की तीव्रता का अनुमान उसकी अधिकतम निरंतर हवा की गति से जुड़ा होता है। यह अनुमान बताता है कि तूफान कितना शक्तिशाली हो सकता है। यदि हवा की गति का अनुमान वास्तविकता से बहुत अलग हो, तो संभावित खतरे का आकलन और उसके अनुसार तैयारी प्रभावित हो सकती है। सरकार की ओर से जारी तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, 2021-2025 में 24 घंटे पहले जारी तीव्रता पूवार्नुमान की औसत निरपेक्ष त्रुटि 5.3 समुद्री मील रही, जबकि 2016-2020 में यह 7.9 समुद्री मील थी। 72 घंटे पहले के पूवार्नुमान में त्रुटि 14.1 से घटकर 9.1 समुद्री मील हुई। 48 घंटे की अवधि में भी त्रुटि कम हुई। 2025 का अलग से आकलन करने पर एक दिलचस्प स्थिति सामने आती है। उस वर्ष तीव्रता के अनुमान की औसत निरपेक्ष त्रुटि 24, 48 और 72 घंटे के लिए क्रमश: 3.1, 2.7 और 3.9 समुद्री मील थी। इसके मुकाबले 2020-2024 का औसत क्रमश: 5.9, 8.3 और 9.8 समुद्री मील रहा। यानी 2025 में तीव्रता का अनुमान इन तीनों समय-सीमाओं में पिछले पांच वर्षों के औसत से बेहतर रहा।
पूवार्नुमान प्रणाली के पीछे कौन-सी तकनीक है?
चक्रवात का पूवार्नुमान किसी एक उपग्रह या एक कंप्यूटर मॉडल के आधार पर नहीं होता। इसमें समुद्र और वातावरण से लगातार मिलने वाले आंकड़ों, गणितीय गणनाओं और मौसम विशेषज्ञों के विश्लेषण का इस्तेमाल होता है। सरकार ने संसद में पूवार्नुमान में सुधार के पीछे जिन प्रमुख तकनीकी बदलावों का उल्लेख किया है, उनमें ये शामिल हैं।
1. मौसम उपग्रह : उपग्रहों से समुद्र के ऊपर बादलों की बनावट, चक्रवात के फैलाव और उसके बदलते स्वरूप की निगरानी होती है। इससे उसकी स्थिति को समझने और उसके आगे बढ़ने का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।
2. डॉप्लर मौसम रडार : तट के नजदीक पहुंच रहे चक्रवात और वर्षा-तूफान की निगरानी में रडार महत्वपूर्ण हैं। इनसे वर्षा और हवा से जुड़ी स्थितियों को समझने में मदद मिलती है।
3. ओशन बॉय और तटीय निगरानी : समुद्र में लगे ओशन बॉय और तट पर मौजूद अवलोकन केंद्र समुद्री तथा वायुमंडलीय परिस्थितियों की जानकारी देते हैं। इन आंकड़ों से मौसम मॉडल को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने में मदद मिलती है।
4. संख्यात्मक मौसम पूवार्नुमान मॉडल : ये मॉडल वातावरण की वर्तमान स्थिति के आंकड़ों के आधार पर गणना करते हैं कि आगे मौसम कैसे बदल सकता है। अलग-अलग मॉडल के परिणामों की तुलना करके चक्रवात के संभावित मार्ग और तीव्रता का अनुमान लगाया जाता है।
1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
चक्रवात अर्नब से निपटने के लिए मौसम विभाग की चेतावनी के साथ केंद्र और राज्य सरकारों ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए। 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से चक्रवात के टकराने से पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में मिलाकर 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति ने 26 अक्टूबर को तैयारियों की समीक्षा की थी। राज्यों में राहत शिविर और निकासी की व्यवस्था की गई, जिला नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए गए और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल तथा राज्य आपदा मोचन बल की टीमें तैनात की गईं। सेना, नौसेना, वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल को भी बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैयार रखा गया।
उड़ानों पर रोक, रेल सेवाओं में भी बदलाव
चक्रवात के असर को देखते हुए विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर 27 अक्टूबर की दोपहर से उड़ान संचालन रोक दिया गया। विजयवाड़ा और राजमुंदरी हवाई अड्डों पर उसी दिन शाम 7 बजे के बाद उड़ानें निलंबित कर दी गईं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के 27 अक्टूबर के बयान के अनुसार, एयर इंडिया की छह और एयर इंडिया एक्सप्रेस की 13 उड़ानें रद्द की गईं। अकासा एयर की दिल्ली-भोगापुरम और वापसी की उड़ान भी रद्द हुई। इंडिगो ने संबंधित हवाई अड्डों पर उड़ानें निलंबित कीं। चक्रवात के कारण रेल यात्रियों की आवाजाही पर भी असर पड़ा। 100 से अधिक रेल सेवाएं रद्द की गईं या उनके समय और मार्ग में बदलाव किया गया।
बंदरगाहों और समुद्री गतिविधियों पर सतर्कता
समुद्र में मौजूद मछुआरों और जहाजों की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाए गए। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की 26 अक्टूबर की बैठक के बाद आंध्र प्रदेश, ओडिशा और यानम के तटों के पास मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई। जो मछुआरे पहले से समुद्र में थे, उन्हें लौटने के निर्देश दिए गए। भारतीय तटरक्षक बल ने कई जहाजों और नावों को सुरक्षित जेटी या तट तक पहुंचाने में मदद की, जबकि अन्य जहाजों को भी लौटने के लिए सतर्क किया गया।
जनहानि कितनी सीमित रही?
प्रशासन की तैयारियों के बावजूद चक्रवात से जनहानि हुई। 29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के हवाले से छह मौतों की जानकारी दी गई थी। 30 अक्टूबर को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात से कम से कम सात लोगों की मौत होने की बात कही। आंध्र प्रदेश सरकार ने शुरूआती तौर पर नुकसान का अनुमान 4,600 करोड़ रुपये बताया।
चक्रवातों से मौतें: 1999 से 2025 तक
चक्रवात और वर्ष प्रमुख प्रभावित राज्य मौते
सुपर चक्रवात, 1999 ओडिशा 10,000
हुदहुद, 2014 आंध्र प्रदेश और ओडिशा 124
फानी, 2019 ओडिशा 64
अम्फान, 2020 पश्चिम बंगाल 98
ताउते, 2021 गुजरात व पश्चिमी तटीय राज्य 118
मिचौंग, 2023 तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश 19
फेंगल, 2024 तमिलनाड 10
मोंथा, 2025 आंध्र प्रदेश 08
चक्रवातों की तबाही: 50 वर्षों का आंकड़ा

भारत की चक्रवात पूवार्नुमान प्रणाली में पिछले दशक में सुधार हुआ है। हालांकि, 2025 के आंकड़े एक दूसरी चुनौती भी दिखाते हैं। इस साल चक्रवात के मार्ग का अनुमान लगाने में त्रुटि पिछले पांच वर्षों के औसत से बढ़ी, जबकि तीव्रता का अनुमान बेहतर रहा। सवाल है कि इन आंकड़ों से भारत की पूवार्नुमान क्षमता में सुधार की कितनी स्पष्ट तस्वीर उभरती है।
यह कथा भारत के उस हृदय प्रदेश की है, जो आज भारत के नक्शे के ठीक बीचों-बीच एक समृद्ध राज्य के रूप में मुस्कुराता है। लेकिन समय के पहिए को थोड़ा पीछे घुमाइए। 1947 का वह ऐतिहासिक सवेरा, जब देश की फिजाओं में आजादी की नई सांस घुली थी, उस वक्त मध्य प्रदेश नाम की कोई पहचान अस्तित्व में ही नहीं थी।
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