विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को एक के बाद एक सियासी झटके लग रहे हैं। दरअसल, आज एक बार कलकत्ता हाईकोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है।

अब ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से भी झटका
ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर रोक से इंकार
विधानसभा स्पीकर का फैसला फिलहाल लागू रहेगा
कोलकाता। स्टार समाचार वेब
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को एक के बाद एक सियासी झटके लग रहे हैं। दरअसल, आज एक बार कलकत्ता हाईकोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय बरकरार रहेगा। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने ममता बनर्जी गुट की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से इंकार कर दिया।
18 जुलाई को सुनवाई
कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। प्रतिवादियों को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मिला है, जिसके बाद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए दो हफ्ते मिलेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई को होगी।
एक नजर में पूरा विवाद
यह पूरा विवाद टीएमसी के भीतर चल रहे बड़े राजनीतिक संकट से जुड़ा है। टीएमसी से निकाले जा चुके ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। ऋतब्रत ने दावा किया कि उनके पास टीएमसी के 58 बागी विधायकों का समर्थन है। इतना ही नहीं, ऋतब्रत ने एक अलग गुट बनाया जो ममता बनर्जी को तो नेता मानता है, लेकिन उनके भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के अधिकारों को खारिज करता है।
विधानसभा स्पीकर का फैसला
ऐसे में जब विवाद बढ़ा तब इसी सियासी खींचतान के बीच बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथेंद्र बोस ने बागी गुट के दावे को स्वीकार कर लिया और ममता बनर्जी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी।
ममता गुट ने कहा- फैसला नियमों के खिलाफ
विस अध्यक्ष के फैसले को ममता बनर्जी के खेमे ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में दलील दी गई थी कि स्पीकर का यह फैसला आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी को दरकिनार करता है और यह विधायी नियमों व संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा स्पीकर के फैसले पर रोक न लगाने के कारण, मामले का अंतिम फैसला आने तक ऋतब्रत बनर्जी ही बंगाल विधानसभा में मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे।
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