मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से हालात खराब है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग छिड़ी है। इस जंग का सबसे बड़ा असर पड़ा है होर्मुज की खाड़ी पर है। वो पतला समुद्री रास्ता जिससे दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है।
By: Arvind Mishra
Mar 22, 20269:44 AM
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच मिली बड़ी कूटनीति सफलता
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण हालात काफी खराब
होर्मुज पर निर्भरता कम करने अमेरिका से की आपूर्ति
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से हालात खराब है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग छिड़ी है। इस जंग का सबसे बड़ा असर पड़ा है होर्मुज की खाड़ी पर है। वो पतला समुद्री रास्ता जिससे दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है। ईरान ने धमकी दी कि जो जहाज इस रास्ते से निकलेगा, उस पर हमला होगा। बस इतना सुनते ही सैकड़ों जहाज वहीं लंगर डालकर रुक गए। भारत के भी कई जहाज खाड़ी में फंसे पड़े हैं। इसी बीच सवाल उठ रहा था कि अगर गैस के जहाज नहीं आए तो भारत में रसोई गैस का क्या होगा। क्या घरों के चूल्हे बुझ जाएंगे, लेकिन भारत पहले से तैयार था। होर्मुज पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अमेरिका से एलपीजी को लेकर संपर्क साधा और इसका नतीजा अभी सामने है। अमेरिका के टेक्सास से निकला जहाज पाइक्सिस पायनियर रविवार सुबह मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया।
72,700 टन रसोई गैस पहुंचेगी
यह अकेला नहीं है। 25 मार्च को अपोलो ओसियन 26,687 टन गैस लेकर आएगा। इंडियन आॅयल और भारत पेट्रोलियम के लिए। 29 मार्च को अमेरिका से एक और जहाज 30,000 टन गैस लेकर आएगा - यह एचपीसीएल के लिए है। यानी इस हफ्ते अकेले मंगलुरु में 72,700 टन से ज्यादा रसोई गैस पहुंचेगी। यह गैस सिर्फ मंगलुरु के लिए नहीं है।
गैस की कोई कमी नहीं होगी
एचपीसीएल की पाइपलाइन यहां से सीधे बेंगलुरु और आगे तक जाती है। यानी दक्षिण भारत के लाखों घरों के चूल्हे इसी गैस से जलेंगे। होर्मुज में जंग चल रही है, रास्ता बंद है, लेकिन भारत ने वक्त रहते अमेरिका का रुख किया और सप्लाई बनाए रखी। फिलहाल भारत के घरों में गैस की कोई कमी नहीं होगी।
जंग को लेकर ताजा हालात
मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध अपने चौथे सप्ताह में गंभीर रूप ले चुका है. अमेरिका और इजरायल ने कोडनेम आॅपरेशन रोरिंग लायन और एपिक फ्यूरी के तहत बड़े हवाई हमले जारी रखा है। जवाब में ईरान ने मिसाइलें दिमोना और यरुशलम पर दागीं, जिसके चलते बड़े पैमाने पर नुकसान और घायल हुए।
ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने का 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, अन्यथा ऊर्जा प्लांट को तबाह करने की धमकी दी। गाजा, सीरिया और रेड सी में भी संघर्ष जारी है। अब तक 1,400 से अधिक ईरानी मारे जा चुके हैं और क्षेत्र की सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में है।