अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्तों के संघर्ष के बाद हुए युद्ध विराम ने जहां तनाव कम किया। वहीं अमेरिका में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप पर विपक्ष का दबाव बढ़ गया है और 85 से ज्यादा डेमोक्रेट सांसद उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

वॉशिंगटन। स्टार समाचार वेब
अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्तों के संघर्ष के बाद हुए युद्ध विराम ने जहां तनाव कम किया। वहीं अमेरिका में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप पर विपक्ष का दबाव बढ़ गया है और 85 से ज्यादा डेमोक्रेट सांसद उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच एक माह दस दिन से जारी जंग के बाद आखिरकार दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया।
पाक का प्रस्ताव ईरान ने स्वीकारा
सीजफायर से पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो वह उसकी पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे। उन्होंने अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की भी धमकी दी थी। यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई। पाकिस्तान ने 2 हफ्ते के सीजफायर का प्रस्ताव रखा था, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया।
10 अप्रैल को औपचारिक बातचीत
समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल अपने हमले रोकेंगे। ईरान भी हमले बंद करेगा। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की मदद से सुनिश्चित की जाएगी। यह सीजफायर लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होगा। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच 10 अप्रैल को औपचारिक बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी।
ईरान की शर्तों पर हुआ समझौता
ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को 10 पाइंट का प्लान भेजा है। उन्होंने कहा कि इस पर आगे बातचीत की जा सकती है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसका 10 पॉइंट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। काउंसिल के मुताबिक यह समझौता ईरान की शर्तों पर हुआ है और इसे देश की जीत बताया है।


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