सतना के नयागांव में तालाब विस्तार के दौरान प्राचीन कुंड-कुएं क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों में आक्रोश। जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से जांच, दोषियों पर कार्रवाई और धार्मिक धरोहर संरक्षण की मांग की गई।
By: Yogesh Patel
Mar 18, 20263:35 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मझगवां विकासखंड के ग्राम नयागांव में स्थित प्राचीन धार्मिक कुंड और कुएं को क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। आस्था और इतिहास से जुड़े इस स्थल को बचाने के लिए ग्रामीण बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचे और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग द्वारा कराए जा रहे तालाब विस्तार कार्य के दौरान ठेकेदार ने भारी मशीनरी, विशेषकर जेसीबी का उपयोग करते हुए इस प्राचीन कुंड को पूरी तरह पाट दिया। इसके अलावा, पास स्थित प्राचीन कुएं की दीवार को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कार्य बिना किसी ऐतिहासिक या धार्मिक महत्व के आंकलन के किया गया, जिससे एक महत्वपूर्ण धरोहर नष्ट हो गई।
अरण्यकांड में इसका जिक्र
ग्रामीणों के अगुवा दीपेंद्र सिंह द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में बताया गया कि ग्राम नयागांव के फलाहारी आश्रम के समीप स्थित यह कुंड और कुआं वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक पहचान रहे हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थल का संबंध वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण यहां पहुंचे थे। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम के बाण चलाने से यहां जलधारा प्रकट हुई थी, जो बाद में एक पवित्र कुंड के रूप में विकसित हुई। यही कारण है कि यह स्थान ग्रामीणों के लिए केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा का केंद्र है।
आस्था पर सीधा आघात
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह कुंड और कुआं न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थे, बल्कि वर्षों से आसपास के लोगों के जल उपयोग का भी प्रमुख स्रोत रहे हैं। गर्मी के मौसम में यहां का जलस्तर क्षेत्र के लिए राहत का साधन बनता था। ऐसे में इसका क्षतिग्रस्त होना केवल आस्था ही नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरतों पर भी सीधा आघात है। जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्राचीन कुंड और कुएं का पुनर्निर्माण कर इसे संरक्षित किया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए इसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया जाए।