सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल के रहवासी इलाकों में अवैध रूप से चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर नगर निगम ने सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी है। जानिए पूरी खबर, व्यापारियों की प्रतिक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश।

राजधानी भोपाल के रहवासी इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने सोमवार सुबह 9 बजे से एक बड़ा और कड़ा अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर चलाई जा रही दुकानों, होटलों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शुरुआती कुछ घंटों के भीतर ही शहर के कई प्रमुख इलाकों जैसे रचना नगर, सर्वधर्म, अरेरा कॉलोनी और खानूगांव में 15 से अधिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया जा चुका है। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे शहर के कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

सोमवार को शुरू हुए इस अभियान के दौरान नगर निगम की टीमों ने अलग-अलग इलाकों में मोर्चा संभाला। रचना नगर में एक जूंबा डांस हाउस को सील कर दिया गया, वहीं सर्वधर्म बी सेक्टर में एक होटल को पूरी तरह बंद कराया गया। गौतम नगर के एक होटल संचालक ने निगम की सख्ती को देखते हुए खुद ही अपनी कमर्शियल गतिविधि बंद कर दी। इसके अलावा, खानूगांव और ई-3 अरेरा कॉलोनी में भी आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मिसरोद, हबीबगंज, रातीबढ़, कोहेफिजा, गोविंदपुरा, ऐशबाग और कोलार थानों का भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

कार्रवाई के दौरान अरेरा कॉलोनी में उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब नगर निगम की टीम आर्य समाज मंदिर के पास स्थित परिसरों में पहुंची। स्थानीय दुकानदारों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर के दुकानदारों का आरोप था कि निगम चुनिंदा लोगों और छोटे कारोबारियों को निशाना बना रहा है, जबकि आसपास की कई अन्य अवैध व्यावसायिक इमारतें और बड़ी दुकानें जस की तस खुली हैं। विरोध प्रदर्शन और हंगामे के आगे निगम अमले को कुछ समय के लिए आगे बढ़ना पड़ा और अधिकारी मीडिया व जनता के सवालों से बचते नजर आए।
10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि व्यापारी किसी नियम का उल्लंघन नहीं करना चाहते, बल्कि यह स्थिति सरकार की प्रशासनिक कमियों और समय पर मास्टर प्लान न आने के कारण पैदा हुई है। यदि सरकार ने समय पर भोपाल का मास्टर प्लान लागू किया होता, तो आज यह संकट खड़ा ही नहीं होता। व्यापारियों का दावा है कि इस कार्रवाई से भोपाल का 90 प्रतिशत व्यापार ठप हो जाएगा और हजारों व्यापारी सड़क पर आ जाएंगे। पिछले डेढ़ महीने से व्यापारी मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और महापौर तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही, हाईकोर्ट द्वारा दुकान संचालकों को दिए गए सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) को भी निरस्त कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसकी निगरानी में चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है, जिससे पहले नगर निगम को अपनी अनुपालन रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में पेश करनी है।
दूसरी ओर, शहर के रहवासियों ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए अपनी गंभीर समस्याएं साझा की हैं। रहवासियों का कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में कमर्शियल गतिविधियों के संचालन से लगातार शोर-शराबा, भारी भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग होने जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसके अलावा, बाहरी लोगों और असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिलाओं और स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से रोजाना सड़क हादसों का खतरा भी बना रहता है।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत अब मुख्य मार्गों के दोनों ओर, गलियों, नदी-तालाबों के किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने अवैध भवनों की भी सघन जांच की जाएगी। इसके साथ ही अवैध मैरिज गार्डनों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस सख्त कार्रवाई के बाद अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी जैसे इलाकों के कारोबारियों में भारी दहशत का माहौल है और वे सुरक्षित कमर्शियल जोन्स में अपनी दुकानें तलाशने को मजबूर हो गए हैं।

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