सतना से आठ किलोमीटर दूर छुलहनी क्षेत्र में 100 केवीए ट्रांसफॉर्मर खराब होने से 300 घरों की बिजली सात दिन से बंद है। सामूहिक बकाये के बीच नियमित बिलधारकों की परेशानी ने जवाबदेही पर सवाल उठाए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर बिजली व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है,जो व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े करती है। सतना ग्रामीण अंतर्गत आने वाले छुलहनी क्षेत्र की करीब 300 घरों में रह रही एक हजार आबादी वाली बस्तियां पिछले सात दिनों से अंधेरे में हैं। इस बस्ती में लगा 100 केवीए का ट्रांसफॉर्मर विगत 7 दिनों से जला हुआ है इससे जुड़े उपभोक्ताओं पर 14 लाख का बिजली बिल बकाया है। मामला सिर्फ बिजली कटने का नहीं है। असली सवाल यह है कि एक ट्रांसफार्मर पर तीन ग्राम पंचायतों और दो विधानसभा क्षेत्रों की बस्तियों की बिजली व्यवस्था आखिर क्यों टिकी हुई है? छुलहनी क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर में कैमा, बाठिया कला और लालपुर ग्राम की बस्तियों के उपभोक्ता निर्भर है। ग्राम पंचायत कैमा एवं ग्राम पंचायत बठिया कला सतना विधानसभा में आता है वहीं ग्राम पंचायत लालपुर रैगांव विधानसभा का हिस्सा है। प्रशासनिक सीमाएं अलग हैं, लेकिन बिजली की निर्भरता एक ही ट्रांसफार्मर पर है।
1 लाख 40 हजार रुपए कराना होगा जमा
स्थानीय स्तर पर प्रचलित जानकारी के अनुसार, किसी ट्रांसफार्मर के कुल बिल का 10 प्रतिशत बिजली बिल जमा किए जाने अथवा आधी आबादी द्वारा बिल का भुगतान किए जाने की स्थिति में ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया लागू होने की बात कही जाती है। यहां की तीनो बस्तियों पर 14 लाख का बिल बकाया है यानि कि करीब 1 लाख 40 हजार रुपए की राशि बिजली कंपनी के खाते में जमा करानी होगी तब जाकर बिजली कंपनी कार्यवाही करेगी।
नियमित रूप से बिल भुगतान फिर भी बत्ती गुल
स्थानीय लोगों के मुताबिक बस्ती में कई परिवार ऐसे हैं, जो नियमित रूप से अपने बिजली बिल का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद सामूहिक बकाये के कारण उनकी आपूर्ति भी बंद है। यानी जिसने बिल चुकाया, उसे भी उसी अंधेरे में खड़ा होना पड़ रहा है, जिसमें बकायेदार उपभोक्ता हैं। सात दिन से बिजली नहीं होने का असर अब सामान्य असुविधा से आगे बढ़ चुका है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है, रात में घरों से निकलना मुश्किल है और रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है।
उपभोक्ता की विधानसभा नहीं, कनेक्शन मायने रखता है
बिजली अधिकारीयों की मानें तो बिजली कनेक्शन किसी भी विधानसभा क्षेत्र में हो, उपभोक्ता बिजली कंपनी का ग्राहक है। इसलिए पंचायत या विधानसभा की सीमा बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी से बिजली कंपनी को मुक्त नहीं करती। नियमित बिल जमा करने वाले उपभोक्ता को केवल इसलिए बिजली से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि उसी ट्रांसफार्मर से जुड़े दूसरे उपभोक्ताओं पर बकाया है।
फैक्ट फाइल
जवाबदेही का सवाल
14 लाख रुपये की वसूली जरूरी हो सकती है, लेकिन क्या उसका बोझ उन उपभोक्ताओं पर भी डाला जाना उचित है जो अपना बिल चुका रहे हैं? बिजली कंपनी की कार्रवाई के साथ यह जवाबदेही जनप्रतिनिधियों की भी बनती है कि समस्या का समाधान केवल कनेक्शन काटने तक सीमित न रहे। सतना विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश सरकार में मंत्री तथा रैगांव विधानसभा क्षेत्र की विधायक से प्रभावित परिवारों को हस्तक्षेप की उम्मीद है। फिलहाल सवाल सीधा है-जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर बसी बस्ती के लिए रोशनी कब लौटेगी और जिम्मेदारी किसकी तय होगी? यदि किसी ट्रांसफार्मर पर लंबे समय से बड़ी आबादी निर्भर है, तो बकाया वसूली के साथ वैकल्पिक आपूर्ति और नियमित भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा भी बिजली कंपनी की जिम्मेदारी के दायरे में आती है। ऐसे में सात दिन से बिजली बंद रहने की स्थिति में विभाग से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बकायेदारों की कार्रवाई का असर बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ा और वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?


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