रीवा संभाग में मनरेगा के तहत 100 दिन रोजगार की गारंटी कागजों तक सिमटी। मांग के मुकाबले बेहद कम परिवारों को काम मिला, जिससे योजना की प्रभावशीलता और सरकारी दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए।
By: Yogesh Patel
Feb 25, 20263:50 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
बहुचर्चित एक ताकिया कलाम है मजबूरी का नाम महात्मा.... यह सौ दिन रोजगार देने वाली सरकारी गारंटी में भी उपयोग किया गया लेकिन सामने आए आंकड़ों ने भी इसमें परिवर्तन लाना मजबूरी बना दिया है। अपने रीवा संभाग की बात करें तो 1 फीसदी से भी नीचे परिवारों को रोजगार मुहैया कराया गया जबकि कामों की अच्छी खासी फेहरिश्त है। तो क्या अब से मजबूरी का नाम महात्मा...नहीं रहेगा? क्या ‘गांधी’ के नाम वाली यह योजना अब से ‘राम जी’ के भरोसे है? महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत संभाग में 86 हजार से भी अधिक काम आॅनगोइंग हैं। इन कामों में राज्य औसत 1 फीसदी से कम परिवारों को रोजगार दिया गया। यह रोजगार 100 दिन वाला था। रीवा-मऊगंज जिला में 25 हजार 5 सौ 44 कार्यों आॅनगोइंग हैं यानि चल रहे हैं जबकि 81 हजार 3 सौ परिवारों ने काम की मांग कर रही है। इसमें से मात्र 232 परिवारों को ही सौ दिन का रोजगार मिला, जो लगभग 0.29 प्रतिशत है। इसी तरह सतना-मैहर जिला 22 हजार 8 सौ 95 काम आॅनगोइंग हैं जबकि 64 हजार 845 परिवारों ने रोजगार की मांग की, लेकिन केवल 155 परिवारों को ही 100 दिन का पूरा रोजगार मिल सका, जो महज 0.24 प्रतिशत है।
सीधी जिला में 23 हजार1 सौ 39 काम चल रहे। इस जिले में 81 हजार 3 सौ 34 परिवारों ने काम की मांग की, जिनमें से 519 परिवारों यानि करीब 0.64 प्रतिशत को 100 दिन का रोजगार प्राप्त हुआ। इसी तरह सिंगरौली जिले में 14 हजार 6 सौ 84 कार्य प्रचलन में हैं। यहां मांग करने वाले 79 हजार 9 सौ 28 मांग परिवार हैं जिसमें से 545 परिवारों यानि लगभग 0.68 प्रतिशत को ही पूरा रोजगार मिल सका।
प्रदेश की स्थिति
मनरेगा के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कुल 10,05,367 कार्य संचालित हो रहे हैं। जिसमे पंजीकृत परिवारों में से 43 लाख 86 हजार 540 परिवारों ने काम की मांग की। लेकिन इनमें से केवल 54 हजार 940 परिवारों को ही 100 दिन का पूरा रोजगार मिल सका। जो कि करीब करीब 1 फीसदी है।
सबसे पिछड़ा मझगवां ब्लॉक
सतना और मैहर जिला के आठ ब्लाकों में सबसे दयनीय स्थिति में मझगवां ब्लाक है। यहां की अधिकांशत: गरीब जनता है इसके बाद भी यहां 100 दिन का रोजगार देने में विफल रहे हैं। आठों ब्लाक में यह इकलौत ब्लाक है जिसमें गारंटी वाला रोजगार पाने वाले परिवार दशमलव के बाद के अंकों में दहाई में नहीं पहुंचे। मनरेगा के आंकड़ों के मुताबिक रामपुर बाघेलान ब्लॉक 4,605 कार्यों के साथ सबसे आगे है। लेकिन यहां 9 हजार 9 सौ 59 परिवारों ने रोजगार की मांग की जिसमें से 22 परिवारों को मिला 100 दिन रोजगार, मैहर ब्लाक में 3 हजार 3 सौ 99 काम चल रहे हैं। यहां पर 9 हजार 1 सौ 75 परिवारों ने रोजगार की मांग जिसमें से 12 परिवारों को मिला100 दिन रोजगार, नागौद ब्लाक में 3 हजार 3 सौ 86 काम आॅनगोइंग हैं। यहां के 10 हजार 340 परिवारों ने रोजगार की मांग जिसमें से 23 परिवारों को मिला100 दिन रोजगार, मझगवां ब्लाक में 3 हजार 2 सौ 48 काम आॅनगोइंग हैं। इस ब्लाक के 14 हजार 020 परिवारों ने रोजगार मांगा जिसमें से 13 परिवारों को मिला100 दिन रोजगार दिया गया है। उचेहरा ब्लाक में 2 हजार 5 सौ 56 आॅनगोइंग कार्य है। यहां पर 6 हजार 6 सौ 36 परिवारों ने रोजगार की मांग की थी जिसमें से 100 दिन का रोजगार 16 परिवारों को मिला। इस क्रम में अमरपाटन ब्लाक में 2 हजार 61 काम चल रहे हैं। इस ब्लाक में 4 हजार 2 सौ 30 परिवारों ने रोजगार की मांग की जिसमें से 07 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार दिया गया। रामनगर ब्लाक में 1 हजार 9 सौ 05 और इस ब्लाक के 5 हजार 3 सौ 54 परिवारों ने रोजगार की मांग की जिसमें से केवल 40 परिवारों को मिला ही 100 दिन का रोजगार दिया गया। यही नहीं प्रशासनिक नाक के नीचे के ब्लाक सोहावल में मात्र 1 हजार 7 सौ 35 कार्य संचालित हैं। इस ब्लाक में 5 हजार 8 सौ 31 परिवारों ने रोजगार की मांग की थी जिसमें से 22 परिवारों को मिला100 दिन रोजगार दिया गया।
100 दिन का रोजगार औसत
जिला प्रतिशत
(सतना में मैहर और रीवा में मऊगंज जिला भी शामिल है)
ब्लॉक वार रोजगार औसत