इंदौर में पूर्वी आउटर रिंग रोड के खिलाफ किसानों ने अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट घेरा। 1200 किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहण का विरोध, जानें क्या हैं किसानों की मांगें।
By: Ajay Tiwari
Feb 26, 20264:42 PM
इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रस्तावित पूर्वी आउटर रिंग रोड परियोजना के खिलाफ किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। अपनी उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए इंदौर, महू, देवास और सांवेर के सैकड़ों किसान अर्धनग्न होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया। विशेष बात यह रही कि किसान अपने साथ खेती और नवाचार के लिए मिले सम्मान के मेडल और शील्ड भी पहनकर आए थे, जिन्हें उन्होंने प्रशासन के खिलाफ विरोध का प्रतीक बनाया।
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा खुद किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने बगीचे में जमीन पर बैठकर किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं के उचित समाधान का आश्वासन दिया। लगभग पांच घंटे तक चले इस घेराव के दौरान भीषण गर्मी के कारण एक किसान बेहोश भी हो गया, जिसे तुरंत उपचार दिया गया।
किसानों का आरोप है कि सिंहस्थ 2026 के बहाने उनकी आजीविका छीनी जा रही है। किसान नेता गौतम बंटू गुर्जर और संतोष सोनतिया ने कहा:
पर्याप्त विकल्प मौजूद: पूर्वी इलाके में पहले से ही RI-2, RI-3 और बाईपास जैसी 3-4 कनेक्टिंग सड़कें हैं।
अस्तित्व का संकट: इस परियोजना से करीब 1,200 किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित होगी, जो उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र साधन है।
भूमाफिया को लाभ: किसानों का कहना है कि पश्चिमी आउटर रिंग रोड बनने के बाद पूर्वी रोड की जरूरत नहीं है, यह केवल भूमाफियाओं को फायदा पहुँचाने और कंक्रीट का जंगल बनाने की तैयारी है।
"जब खेती की जमीन ही नहीं बचेगी, तो इन सरकारी मेडल और सम्मान का हम क्या करेंगे? खेती हमारी आत्मा है और सरकार इसे छीनना चाहती है।"
- संतोष सोनतिया, किसान
एडीएम (ADM) रोशन राय ने बताया कि किसान अलाइनमेंट बदलने और बाजार दर से अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रशासन पिछले 6 महीनों से किसानों के संपर्क में है। जो मुद्दे जिला स्तर पर सुलझ सकते हैं, उन्हें यहीं हल किया जाएगा और अन्य मांगों को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा।
जमीन का बाजार दर के अनुसार उचित मुआवजा।
सर्वे प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता।
स्पष्ट पुनर्वास नीति।
अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों की आपत्तियों पर व्यक्तिगत सुनवाई।