जबलपुर में CMHO ने नियमों की अनदेखी करने वाले 5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों का पंजीयन रद्द कर संचालन बंद करने के आदेश दिए हैं। जानें किन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई।

प्रतीकात्मक छवि
जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और नियमों की अनदेखी करने वाले चिकित्सा संस्थानों पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जिले के 5 निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त कर दिया है, साथ ही 121 निजी क्लीनिकों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए हैं।
नर्सिंग होम शाखा प्रभारी डॉ. आदर्श विश्नोई के अनुसार, नियमानुसार निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को तीन साल की अवधि के लिए लाइसेंस दिया जाता है। अवधि समाप्त होने पर नवीनीकरण अनिवार्य है। इस वर्ष 1 जनवरी से 28 फरवरी तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन मांगे गए थे, जिसके बाद मार्च में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में नियमों का उल्लंघन और सुविधाओं का अभाव पाया गया।
वर्ष 2025-26 के लिए कुल 55 अस्पतालों के नवीनीकरण की समीक्षा की गई थी, जिनमें से 5 अस्पतालों पर गाज गिरी है:
बटालिया आई हॉस्पिटल: प्रबंधन ने स्वयं अस्पताल बंद करने का आवेदन दिया।
सरकार हॉस्पिटल: स्वयं बंद करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया।
नामदेव नर्सिंग होम: नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया।
संकल्प हॉस्पिटल: नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराया।
एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर: निरीक्षण के दौरान अस्पताल में उपयुक्त मेडिकल स्टाफ अनुपस्थित पाया गया।
जिले में कुल 240 क्लीनिकों का नवीनीकरण प्रस्तावित था, लेकिन बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने नियमों की अनदेखी की। इनमें से 89 क्लीनिकों ने तो आवेदन तक नहीं किया, जबकि 32 क्लीनिक ऐसे थे जिनके पास अनिवार्य दस्तावेज अधूरे थे। डॉ. विश्नोई ने स्पष्ट किया है कि जिन क्लीनिकों का पंजीयन नहीं हुआ है, उनका संचालन अब पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि निजी केंद्रों पर मरीजों को निर्धारित मापदंडों के अनुसार इलाज मिल रहा है या नहीं। इसमें अग्नि सुरक्षा (Fire Safety), बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल, और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की जाती है। विभाग की इस सख्त कार्रवाई से शहर के अन्य निजी चिकित्सा संस्थानों में हड़कंप मच गया है।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में छत से रिस रहे पानी के कारण बेसमेंट पार्किंग जलमग्न हो गई है। जर्जर ढांचे, क्षतिग्रस्त सीवरेज लाइन और खराब रखरखाव को लेकर डॉक्टरों व कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में गर्मी के मौसम में भी हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। कार्डियोलॉजी वार्ड और आईसीयू फुल हैं, जबकि डॉक्टर बढ़ते मामलों के कारणों का अध्ययन कर रहे हैं।
रीवा जिले के चुंआ गांव में घर निर्माण के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में एक वर्षीय बालक गिर गया। पुलिस और ग्रामीणों ने करीब दो घंटे के रेस्क्यू अभियान के बाद मासूम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रीवा में समान थाना क्षेत्र के पास बाइक सवार बदमाशों ने युवक के गले से सोने की चेन झपट ली। लगातार बढ़ रही स्नेचिंग घटनाओं के बीच पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है।
सीधी जिले के खोरखा जंगल में एक अज्ञात महिला का जला हुआ शव मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस और फोरेंसिक टीम जांच में जुटी है, जबकि शव की पहचान और मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
सिंगरौली में कॉलेज भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक युवक हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया। प्रशासन उसे सुरक्षित नीचे उतारने में जुटा रहा, जबकि प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाई।
सतना में एयरफोर्स अधिकारी के घर पथराव और फायरिंग मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी समेत अन्य फरार बदमाशों की तलाश जारी है। घटना ने शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
सतना केंद्रीय जेल में तम्बाकू ले जाते पकड़े गए प्रहरी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई है। हाल के दिनों में जेल कर्मियों पर प्रतिबंधित सामग्री और नशे के सामान पहुंचाने के आरोप लगातार सामने आए हैं।
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सतना जिले के सात सांदीपनि विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र से कृषि संकाय शुरू होगा। छात्रों को आधुनिक कृषि शिक्षा मिलेगी, हालांकि नियमित शिक्षकों और व्यावहारिक संसाधनों की कमी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

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