हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने बिना अनुमति और सूचना के फार्म हाउस के निरीक्षण पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने केयरटेकर से घोड़ों की बिक्री का पूरा ब्योरा मांगा है।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की रहस्यमयी मौत और गंभीर लापरवाही के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि तीन पशु चिकित्सकों और स्थानीय थाना प्रभारी ने संयुक्त रूप से संबंधित फार्म हाउस का निरीक्षण किया है। जांच के दौरान मौके पर डेयरी का संचालन होता हुआ पाया गया।
याचिकाकर्ता ने बिना जानकारी निरीक्षण पर जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें साथ लिए बिना और उनकी अनुपस्थिति में फार्म हाउस का औचक निरीक्षण कर लिया गया। याचिकाकर्ता ने पनागर थाना प्रभारी से इस संबंध में संपर्क भी किया था, तब थाना प्रभारी ने महाधिवक्ता कार्यालय से किसी भी तरह के निर्देश मिलने से इंकार किया था। इसके बावजूद पीठ के निर्देशों की अनदेखी करते हुए गुप्त रूप से जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दिए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई गई। इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसल्वा और अधिवक्ता सुमेश अवस्थी पैरवी कर रहे हैं।
फिलीपींस तक जुड़ा था ऑनलाइन सट्टेबाजी और हॉर्स रेसिंग का नेटवर्क
जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका में मुख्य आरोपी हैदराबाद निवासी सुरेश पाल गुडू को बनाया गया है, जो 'हॉर्स पावर लीग' का संचालक है। आरोप है कि उसने हैदराबाद रेस क्लब में दो घोड़ों की दौड़ का आयोजन कर 'ट्रोपंग करेठस्ता' नामक एप के जरिए फिलीपींस में लाइव स्ट्रीमिंग करवाते हुए अवैध ऑनलाइन सट्टा लगवाया था। इस अंतरराष्ट्रीय अवैध गतिविधि की आधिकारिक शिकायत फिलीपींस सरकार द्वारा भारत सरकार से की गई थी, जिसके बाद इस पर रोक लगाई गई।
भूख और कुपोषण से दर्जनों घोड़ों की मौत का सनसनीखेज आरोप
याचिका के मुताबिक, आरोपी सुरेश पाल गुडू के पास कुल 150 से अधिक घोड़े थे। लगभग चार महीने पहले उसने अपने कर्मचारियों का वेतन देना पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसके चलते भोजन और उचित देखभाल के अभाव में करीब 90 घोड़ों की दर्दनाक मौत हो गई। साक्ष्यों को मिटाने की नीयत से 29 अप्रैल से 3 मई 2025 के बीच इनमें से 57 जीवित घोड़ों को बिना किसी प्रशासनिक या पशु चिकित्सा विभाग की अनुमति के जबलपुर लाकर पनागर के रैपुरा स्थित सचिन तिवारी के फार्म हाउस में छिपाकर रखा गया। आरोप है कि वहां भी पर्याप्त चारा, पानी और इलाज न मिलने के कारण घोड़ों का दम तोड़ना जारी रहा।
केयरटेकर के बयानों और घोड़ों की खरीद-फरोख्त पर कोर्ट की सख्ती
इससे पहले फार्म हाउस के केयरटेकर सचिन तिवारी ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर जानकारी दी थी कि हैदराबाद से लाए गए 57 घोड़ों में से 19 की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 22 घोड़ों को अन्य लोगों को बेच दिया गया है और 3 नए घोड़े खरीदे गए हैं। उसने दावा किया था कि उसके पास वर्तमान में 19 घोड़े सुरक्षित हैं, जिनकी खुराक और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता खुद जिला पशु चिकित्सा अधिकारी और थाना प्रभारी के साथ जाकर फार्म हाउस का निरीक्षण करे। अब ताजा सुनवाई में कोर्ट ने केयरटेकर को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह लिखित रूप में स्पष्ट जानकारी दे कि कौन-से घोड़े, किसे और कब बेचे गए हैं। इस पूरे बिक्री रिकॉर्ड का विस्तृत ब्योरा अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष पेश करना होगा।

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