मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार भोजशाला में 'सरस्वती लोक' और 'राजा भोज शोध संस्थान' बनाने की घोषणा की है। साथ ही आंदोलन के 3 शहीदों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये देने का एलान किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत गंगा दशहरा कार्यक्रम को संबोधित किया।
धार/भोपाल:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार (25 मई, 2026) को धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर पहुंचे। यहाँ उन्होंने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आयोजित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान सीएम ने मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा-अर्चना की और धार के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने एलान किया कि धार में भव्य 'सरस्वती लोक' और 'राजा भोज शोध संस्थान' की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने धार जिले को 88.04 करोड़ रुपये की लागत वाले 12 विकास कार्यों की सौगात देते हुए उनका भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोजशाला मुक्ति आंदोलन में अपनी शहादत देने वाले तीन अमर शहीदों को नमन किया। उन्होंने मंच से घोषणा की कि शहीद स्व. श्री बनसिंह, स्व. श्री अंतरसिंह और स्व. श्री लक्ष्मण सिंह के निकटतम परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित अतिथियों और नागरिकों ने शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
भोजशाला मामले पर माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "न्यायालय के निर्णय से हमारा 750 वर्षों का लंबा संघर्ष सफल हुआ है और धार में एक नए युग की शुरुआत हुई है। राज्य सरकार इस न्यायिक आदेश का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कराएगी।" उन्होंने आगे कहा कि राजा भोज द्वारा स्थापित यह भोजशाला सदियों तक ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केंद्र रही है। सरकार पुरातत्व विभाग के साथ तालमेल बिठाकर इस पुण्य धरा के गौरव को वापस लाएगी और धार के आसपास चहुंमुखी विकास की नई धारा बहाएगी।
जल गंगा संवर्धन अभियान को संबोधित करते हुए सीएम डॉ. यादव ने राजा भोज के जल प्रबंधन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राजा भोज जल संरक्षण के अग्रदूत थे। उन्होंने धार में साढ़े बारह (12.5) तालाबों का ऐसा अनूठा नेटवर्क बनाया था कि एक तालाब भरने पर पानी स्वतः दूसरे में चला जाता था।
धार का छठा स्थान: जल गंगा संवर्धन अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन में खंडवा, बड़वानी, अशोकनगर, राजगढ़ और डिंडौरी के बाद धार जिला पूरे प्रदेश में छठे स्थान पर है।
शहरी और ग्रामीण विकास: धार के ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण के 5 हजार से अधिक कार्य पूरे हो चुके हैं, वहीं नगरीय क्षेत्र की 64 प्राचीन बावड़ियों और तालाबों का संरक्षण व जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
जल संरक्षण में मध्य प्रदेश देश में नंबर वन: मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश भर में जल संवर्धन का काम चल रहा है, जिसमें एमपी शीर्ष पर है। प्रदेश में 2500 करोड़ रुपये की लागत से 2.42 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य प्रगति पर हैं। इसके तहत 89 हजार से अधिक कुओं को रिचार्ज किया गया है और 55 हजार से ज्यादा खेत तालाब बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने राजा भोज की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भोपाल के पास भोजपुर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का निर्माण कराया। इसके अलावा धार में स्थित 45 फीट लंबा ऐतिहासिक लौह स्तंभ आज भी मालवा की धरोहर है, जिस पर सदियों बाद भी जंग नहीं लगी है। अरब के इतिहासकार अलबलूनी ने भी इस स्तंभ की विशिष्टता की सराहना की थी। उन्होंने यह भी बताया कि भोपाल में राजा भोज का एक भव्य संग्रहालय (Museum) बनाया जा रहा है।
इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर और धार जिले के प्रभारी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री द्वारा किए गए 88.04 करोड़ रुपये के भूमिपूजन में सबसे प्रमुख कार्य चंबल नदी पर लेबड़-घाटाविल्लौद मार्ग पर 27.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला फोरलेन उच्च स्तरीय पुल है। इस पुल के बनने से क्षेत्र के औद्योगिक परिवहन और आवागमन को एक नई रफ्तार मिलेगी।

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मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब सीएम डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:30 बजे मंदिर पहुंचे और मां वाग्देवी (सरस्वती) के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। पद पर रहते हुए भोजशाला पहुंचने वाले डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं।
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