सिंगरौली नगर निगम की 92 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना में अनियमितता और ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। भाजपा-कांग्रेस पार्षदों ने संयुक्त जांच, भुगतान रोकने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

हाइलाइट्स:
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
नगर निगम सिंगरौली एक बार फिर अपने कार्यों को लेकर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला माजन मोड़ से नवजीवन बिहार इंद्रा चौक तक लगभग 6 किलोमीटर लंबी स्ट्रीट लाइट परियोजना का है। करीब 92 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत इस कार्य में व्यापक अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के कई पार्षदों ने एकजुट होकर अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा लगभग 92 लाख रुपये का टेंडर भोपाल की फर्म मेसर्स एमआर इलेक्ट्रिकल्स को दिया गया था। इस परियोजना के तहत माजन मोड़ से नवजीवन बिहार इंद्रा चौक तक स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य किया जाना था। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सीमित कार्य किए जाने के बावजूद नगर निगम के अधिकारियों ने अपनी टीम से स्ट्रीट लाइट लगवाकर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया। इस मामले में अब तक लगभग 55 लाख रुपये की पहली किश्त का भुगतान भी किए जाने की बात सामने आई है, जिससे विवाद और गहरा गया है। भाजपा पार्षद राम नरेश शाह, कांग्रेस पार्षद परमेश्वर पटेल, कांग्रेस पार्षद अनिल वैश्य, कांग्रेस पार्षद गोपाल पाल सहित आधा दर्जन से अधिक पार्षदों ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया है कि पूरे कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि यदि नगर निगम की टीम ने स्वयं स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य किया है तो फिर ठेकेदार को किस आधार पर भुगतान किया गया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि यदि निगम के कर्मचारियों और मशीनों का उपयोग हुआ तो क्या उसकी विधिवत अनुमति ली गई थी और क्या इसके लिए प्रतिदिन के हिसाब से टीम का शुल्क निर्धारित कर राजस्व जमा कराया गया।
ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप
पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम के संसाधनों का उपयोग कर निजी ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया है। यदि ऐसा हुआ है तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता है बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है। उनका कहना है कि इस पूरे प्रकरण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक कार्य किसने किया और भुगतान किस आधार पर जारी किया गया। पार्षदों ने यह भी दावा किया कि अभी तक केवल 55 लाख रुपये का भुगतान किया गया है जबकि शेष राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की तैयारी है। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक शेष भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच से पहले भुगतान कर दिया गया तो सरकारी धन की वसूली करना मुश्किल हो जाएगा।
पार्षदों ने दी आंदोलन की चेतावनी
पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो नगर निगम कार्यालय के सामने बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि परिषद की आगामी बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा और जब तक जवाबदेही तय नहीं होती तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल पूरा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्ट्रीट लाइट टेंडर में ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई है,इसमें भ्रष्ट्राचार की शिकायतें मुझे मिली थी,परिषद में सवाल उठाया लेकिन मेरी शिकायत को अनसुना किया गया। इसकी विधिवत जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्यवाही हो।
अनिल वैश्य, पार्षद वार्ड क्रमांक 38


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