रीवा में फर्जी हलफनामा देकर अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी पर कार्रवाई हुई है। लोकायुक्त जांच के बाद निलंबन, वेतनवृद्धि की रिकवरी और विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
स्कूल शिक्षा विभाग में एक बार फिर से फर्जी अनुकंपा नियुक्ति का मामला सामने आया है। लोकायुक्त में शिकायत पहुंचने के बाद मामले का खुलासा हुआ। जांच में एक लिपिक की करतूत उजागर हुई। मां के सरकारी नौकरी में रहते हुए भी फर्जी हलफनामा देकर बेटे ने अनुकंपा नियुक्ति पाई। फर्जीवाड़ा यहीं पर नहीं रुका। दो साल की सेवा पूरी करने के बाद बिना कम्प्यूटर दक्षता परीक्षा पास किए ही परिवीक्षा भी खत्म करा ली और वेतनवृद्धि का लाभ लेने लगा। भोपाल से जांच और कार्रवाई का पत्र पहुंचा। इसके बाद जेडी ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित करने के साथ रिकवरी निकाली है।
आपको बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी अनुकंपा नियुक्ति का बड़ा मामला एक साल पहले सामने आया था। परिजनों के बिना सरकारी नौकरी किए ही 6 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति बांट दी गई थी। इस मामले में फर्जी अनुकंपा लेने वाले सहित एक लिपिक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। डीईओ, लिंक अधिकारी और संबंधित लिपिक को निलंबित तक किया गया था। फर्जी अनुकंपा नियुक्ति का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि फिर से एक मामला सुर्खियों में आ गया है। यह मामला लोकायुक्त में पहुंचने के बाद सामने आया है। लोकायुक्त का पत्र लोक शिक्षण संचालनालय पहुंचने के बाद मामले की जांच कराई गई। अब एक्शन लिया गया है। फर्जी अनुकंपा पाने वाले लिपिक को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। साथ ही गलत तरीके से परिवीक्षा खत्म करने के बाद वेतनवृद्धि का लाभ लेने पर रिकवरी निकाली गई है।
जांच में हुआ था फर्जीवाड़े का खुलासा
6 मार्च 2026 को भोपाल लोक शिक्षण संचालनालय से एक पत्र जारी किया गया था। इस पत्र में कहा गया था कि रत्नेश्वर प्रसााद द्विवेदी पिता रामायण प्रसाद द्विवेदी ग्राम पोस्ट पटेहरा मऊगंज जिला रीवा के द्वारा प्राप्त की गई अनुकंपा नियुक्ति को निरस्त किया जाए। श्री द्विवेदी वर्तमान में सहायक ग्रेड 3 के पद पर कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी रायपुर कर्चुलियान में कार्यरत हैं। भोपाल कार्यालय के निर्देश के अनुक्रम में संबंधीजन के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित किए जाने के लिए कार्यालय से पत्र 13 जनवरी 2026 को आरोप पत्रादि जारी किए गए थे। निर्धारित समयावधि में प्रतिवाद प्रस्तुत न करने पर कार्यालयीन आदेश दिनांक 4 फरवरी 2026 द्वारा विभागीय जांच संस्थित की गई। जांचकर्ता अधिकारी ने 21 मई 2026 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर श्री द्विवेदी के ऊपर अधिरोपित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया। द्विवेदी के ऊपर अधिरोपित आरोप क्रमांक 1 पूर्ण रूप से प्रमाणित पाया गया है। प्रकरण में वस्तु स्थिति से अवगत कराते हुए कार्यालयीन पत्र दिनांक 1 जून 2026 द्वारा आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय मप्र भोपाल को जानकारी भेजी गई। लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने 30 जून 2026 को पत्र भेज कर शीघ्र कार्रवाई पूरी कर लोकायुक्त के समक्ष आगामी पेशी 21 जुलाई 2026 को अवगत कराने के निर्देश दिए गए। लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश पर संयुक्त संचालक लोक शिक्षण रीवा ने तत्काल प्रभाव से रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी सहायक ग्रेड 3 कार्यालय बीईओ रायपुर कर्चुलियान को निलंबित कर दिया है। उनका निलंबन अवधि में मुख्यालय बीईओ कार्यालय रीवा नियत किया गया है।
इस तरह से हथियाई थी नौकरी
मिली जानकारी के अनुसार रायपुर कर्चुलियान में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी पिता रामायण प्रसाद द्विवेदी को वर्ष 2014 में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। इस नौकरी को पाने के लिए रत्नेश्वर ने फर्जी तरीका अपनाया था। इसकी शिकायत लोकायुक्त से हुई थी। शिकायत में कहा गया था कि उनके पिता सहायक शिक्षक थे। वहीं माता गुरुजी के पद पर पदस्थ हैं। पिता की मृत्यु के बाद विभाग को गलत जानकारी और हलफनामा दिया गया कि परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं है। मां शिक्षक के पद पर पदस्थहोने के बाद भी उन्होंने हलफनामा में गलत जानकारी दी थी। इसी आधार पर नौकरी मिली थी। लोकायुक्त में मामला पहुंचने के बाद लोक शिक्षण से मामले में जांच कराकर प्रतिवेदन चाहा गया था।
बिना कम्प्यूटर दक्षता परीक्षा पास किए कर दिया परिवीक्षा समाप्त
रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने गलत तरीके से सिर्फ नौकरी ही नहीं पाई। परिवीक्षा अवधि समाप्त कराने के साथ ही वेतनवृद्धि का भी लाभ लिया। इसकी शिकायत राजबहोर तिवारी निवासी सतान रीवा ने की थी। शिकायत पत्र की जांच विकासखंड शिक्षा अधिकारी रायपुर कर्चुलियान को सौंपी गई थी। जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। बीईओ रायपुर कर्चुलियान ने जांच उपरांत 15 जून 2026 को प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि श्री द्विवेदी द्वारा परिवीक्षा अवधि के दौरान व्यापमं से कम्प्यूटर दक्षता की परीक्षा उत्तीर्ण संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। तत्कालीन प्राचार्य शाउमावि बरका जिला सिंगरौली ने शासन के निर्देशों के विपरीत परिवीक्षा अवधि समाप्त कर दी थी। इतना ही नहीं जेडी कोष एवं लेखा की भी गड़बड़ी इसमें सामने आई। जांच अधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन पर 20 जून 2026 को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया था।
रिकवरी के जारी किए गए आदेश
इस पूरे मामले में लक्ष्मीकांत पाण्डेय प्राचार्य शाउमावि बरका जिला सिंगरौली वर्तमान में सेवानिवृत्त ने श्री द्विवेदी की सेवा पुस्तिका में की गई प्रविष्टि अनुसार दिनांक 24 सितंबर 2016 को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण करने एवं 24 सितंबर 20216 को वेतनवृद्धि की पात्रता प्रदान किए जाने संबंधी आदेश की प्रविष्टि की गई थी। जेडी ने जांच के बाद पाया कि 24 सितंबर 2016 से श्री द्विवेदी को वेतनवृद्धि का लाभ दिया जा रहा है। इस पर उन्होंने नियम विरुद्ध तरीके से की गई वेतनवृद्धि की वसूली ब्याज सहित किए जाने के आदेश 15 दिन में किए जाने के आदेश दिए हैं।

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