पन्ना के मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र में औषधीय महत्व वाला केवकंद पौधा मिला है। विशेषज्ञ ने इसकी पहचान की। प्राकृतिक जंगलों में इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वनौषधीय संपदा को दर्शाती है।

हाइलाइट्स:
पन्ना, स्टार समाचार वेब
दक्षिण वनमंडल के मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र के प्राकृतिक जंगलों में औषधीय महत्व वाला पौधा केवकंद पाया गया है। वन क्षेत्र में इसकी मौजूदगी दक्षिण वन मंडल के जंगलों में मौजूद समृद्ध पादप विविधता और वनौषधीय संपदा को दशार्ती है। औषधीय वनस्पतियों के जानकार वनपाल जगदीश प्रसाद अहिरवार ने इसकी पहचान करते हुए बताया कि दक्षिण पन्ना के जंगल विभिन्न प्रकार की वनौषधियों से समृद्ध हैं। केवकंद को लेकर बताया गया कि इसका वर्तमान स्वीकृत वैज्ञानिक नाम हेलेनिया स्पेसिओसा है, जबकि इसे पूर्व में कॉस्टस स्पेसिओसस नाम से भी जाना जाता था। यह कॉस्टेसी कुल का बहुवर्षीय प्रकंदीय पौधा है।
अंग्रेजी में इसे क्रेप जिंजर के नाम से जाना जाता है। केवकंद के भूमिगत प्रकंद सहित इसके विभिन्न भागों का पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उपयोग होता रहा है। क्षेत्र में मिलने वाली ऐसी वनौषधियां स्थानीय स्तर पर पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि जंगलों में इन पौधों की मौजूदगी केवल वनस्पति विविधता की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पारंपरिक ज्ञान की दृष्टि से भी इसका महत्व माना जाता है। आधुनिक अध्ययनों में भी केवकंद में पाए जाने वाले विभिन्न जैव-सक्रिय घटकों तथा इसके संभावित सूजनरोधी, रक्त शर्करा कम करने वाले और रोगाणुरोधी गुणों को लेकर शोध किया गया है।
हालांकि इन संभावित औषधीय गुणों को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इसके किसी भी औषधीय उपयोग के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है। दक्षिण वन मंडल पन्ना के प्राकृतिक वनों में केवकंद जैसे औषधीय पौधों का पाया जाना क्षेत्र की वन संपदा और जैव विविधता की समृद्धि को रेखांकित करता है। जंगलों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों की मौजूदगी पारिस्थितिक संतुलन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पारंपरिक ज्ञान और वनौषधीय संपदा के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वनपाल जगदीश प्रसाद अहिरवार द्वारा की गई केवकंद की पहचान से दक्षिण पन्ना के जंगलों में मौजूद वनौषधियों की विविधता एक बार फिर सामने आई है। ऐसे पौधों की जानकारी और पहचान से जंगलों की प्राकृतिक संपदा को समझने तथा उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा एयरपोर्ट पर बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा सुविधा, सर्वे और विद्युत आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए।
रीवा के उपरहटी मोहल्ले में प्राचीन शिवलिंग ‘पड़ोसी बाबा’ के नाम से पूजित है। मान्यता है कि यह हजार वर्ष पुराना है। टेढ़ी जलहरी, भस्म आरती और रंगपंचमी का आयोजन इसकी विशेष पहचान है।
रीवा के सोहागी क्षेत्र में भारी बारिश से बाढ़ ने तबाही मचाई। मझिगवां के ककरहा टोला में करीब 40 कच्चे मकान ढह गए। ग्रामीणों ने नुकसान, राहत की कमी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का आरोप लगाया।
रीवा के शान-ए-विंध्य सम्मान समारोह में डॉली चायवाला, सुनील पाल और अभय शर्मा ने दर्शकों का मनोरंजन किया। प्रतिभाओं का सम्मान हुआ, संगीत ने समां बांधा और बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी गई।
रीवा में जनवरी से जुलाई के बीच 250 से अधिक साइबर ठगी के मामले पुलिस तक पहुंचे। जालसाजों ने करीब एक करोड़ रुपए ठगे। वर्क फ्रॉम होम, फर्जी क्रेडिट मैसेज और एपीके फाइल प्रमुख माध्यम बने।
सीधी के शिकारगंज-भंवरसेन मार्ग पर लगातार बारिश से सड़क किनारे मिट्टी का कटाव बढ़ गया है। कई जगह आधार कमजोर हो चुका है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच हादसे की आशंका बढ़ी, सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं।
पन्ना के मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र में औषधीय महत्व वाला केवकंद पौधा मिला है। विशेषज्ञ ने इसकी पहचान की। प्राकृतिक जंगलों में इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वनौषधीय संपदा को दर्शाती है।
सतना में ऑपरेशन प्रहार के तहत पुलिस ने मेडिकल नशे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। दो युवकों से 39 और सप्लायर से 22 शीशी कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुई।
जसो थाना पुलिस ने अर्जुनखोह जंगल में युवक की हत्या का तीन महीने बाद खुलासा किया। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में बदनामी और कथित अवैध संबंधों के विवाद में हत्या सामने आई।
चित्रकूट में बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर घटने लगा है। बाबूपुर में जलभराव की समस्या दूर की गई। प्रशासन ने पुल-रपटों से दूरी, जलभराव में सेल्फी रोकने और सुरक्षित रहने की अपील की।

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