संयुक्त किसान मोर्चा की 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' भोपाल पहुंच गई है। मूंग की 100% सरकारी खरीदी और खाद वितरण की मांग को लेकर किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ी। जानिए आंदोलन और जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले से जुड़ी पूरी अपडेट।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 19 किसान संगठनों की 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' भोपाल पहुंच चुकी है।
मंडीदीप सीमा पर कलियासोत नदी के पास पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर करीब 2 हजार किसान राजधानी में दाखिल हुए हैं।
किसान अपने साथ 7 दिन का राशन-पानी और रसद लेकर आए हैं, उनका संकल्प मांगें पूरी होने तक डटे रहने का है।
दूसरी ओर, जबलपुर हाईकोर्ट ने कृषि आदान विक्रेता संघ की याचिका खारिज कर ई-विकास (उर्वरक वितरण) प्रणाली को सही ठहराया है।
मध्यप्रदेश में मूंग की 100% सरकारी खरीदी और खाद वितरण प्रणाली में सुधार की प्रमुख मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर के 19 किसान संगठनों से जुड़े हजारों किसान मंगलवार को भोपाल की सीमा पर पहुंच गए।
प्रशासन द्वारा मंडीदीप के पास कलियासोत नदी के ब्रिज और सिमराई क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैरिकेडिंग की गई थी। हालांकि, पुलिस के भारी फोर्स को दरकिनार करते हुए उग्र किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। हाथों में तिरंगा झंडा थामे और 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाते हुए किसानों का पैदल मार्च और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला राजधानी में प्रवेश कर चुका है। आंदोलनकारी अब सीधे मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़ रहे हैं।

राजधानी कूच करने वाले किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। किसान अपने साथ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में 7000 से अधिक लोगों के लिए 7 दिन का राशन और पानी लेकर आए हैं। कई किसान यात्रा के दौरान रास्ते में खाने के लिए पहले से दाल-बाटी तैयार कर साथ लाए हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार मूंग खरीदी और खाद वितरण की व्यवस्था में सुधार की गारंटी नहीं देती, तब तक उनका यह आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप से जारी रहेगा।
एक तरफ जहां सड़कों पर किसान आंदोलनरत हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यायपालिका से खाद वितरण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने कृषि आदान विक्रेता संघ की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें ऑनलाइन खाद वितरण व्यवस्था को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और ई-टोकन प्रणाली से होने वाली परेशानियों का हवाला दिया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के अवैध गैर-कृषि उपयोग पर लगाम कसने के लिए यह केंद्र सरकार का एक नीतिगत फैसला है। अदालत ने कहा कि ऐसे नीतिगत मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।

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