सोम डिस्टिलरीज (Som Distilleries) के लाइसेंस रद्दीकरण मामले में MP हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनवाई से खुद को अलग किया। जानें क्या है फर्जी परमिट विवाद और अगला अपडेट।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोम डिस्टिलरीज (Som Distilleries) की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। जस्टिस विशाल मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है। उन्होंने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं कि इस केस को किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। हालांकि, न्यायाधीश ने इस बार सुनवाई से हटने का कोई विशिष्ट कारण स्पष्ट नहीं किया है।
करीब 20 दिन पहले आबकारी आयुक्त ने रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड और मेसर्स सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। यह कार्रवाई इंदौर की देपालपुर कोर्ट द्वारा 2021 के एक मामले में सुनाए गए फैसले के आधार पर की गई है।
कोर्ट ने पाया था कि कंपनी के कई वरिष्ठ कर्मचारी और प्रतिनिधि फर्जी परमिट तैयार करने और अवैध शराब परिवहन जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त थे। हालांकि हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है, लेकिन उनकी दोषसिद्धि (Conviction) अभी भी प्रभावी है, जिसे आधार बनाकर आबकारी विभाग ने यह कड़ा कदम उठाया।
यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने किसी हाई-प्रोफाइल केस से खुद को अलग किया हो। इससे पहले भाजपा विधायक संजय पाठक के अवैध उत्खनन मामले में भी उन्होंने सुनवाई से इनकार कर दिया था। उस समय उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी ने उनसे इस विशेष मामले पर चर्चा करने की कोशिश की है, जो न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है।
जांच में सामने आया है कि सोम डिस्टिलरीज से जुड़े व्यक्तियों ने बड़े पैमाने पर फर्जी परमिट तैयार किए थे, इनमें मोहन सिंह तोमर 676 फर्जी परमिट, संजय गोहे 282 फर्जी परमिट, प्रीति गायकवाड़ 279 फर्जी परमिट और वीरेंद्र भारद्वा: 272 फर्जी परमिट हैं।
मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 31 के तहत की गई इस कार्रवाई के खिलाफ कंपनी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को किसी अन्य बेंच के समक्ष होगी।

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