Twisha Sharma Case: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में त्विषा शर्मा मौत मामले में सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने सीबीआई जांच के बीच गिरफ्तारी को 'ट्रायल से पहले सजा' बताया और सभी आरोपों को खारिज किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में नया मोड़ आया है। बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में मृतका की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर तीखी बहस हुई। भोपाल जिला अदालत द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष ने उन पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता मृगेन्द्र सिंह ने अदालत के समक्ष जवाब पेश करते हुए दावा किया कि उनकी मुवक्किल ने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया है और उन्होंने न तो जांच को प्रभावित किया और न ही किसी सबूत के साथ छेड़छाड़ की।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के सामने दलील दी कि अब इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई है, इसलिए गिरिबाला सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का कोई ठोस औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मोड़ पर गिरफ्तारी करना 'ट्रायल (मुकदमे) से पहले सजा देने' जैसा होगा। वकीलों ने साफ किया कि घटना के अगले ही दिन यानी 13 मई को पुलिस ने घर के बड़े हिस्से को सील कर दिया था, जिससे सबूत मिटाने या हेरफेर करने की कोई गुंजाइश ही नहीं बची।
मीडिया और जांच एजेंसियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज लीक करने के आरोपों पर बचाव पक्ष ने कहा कि घटना से संबंधित डीवीआर (DVR) पहले दिन से ही पुलिस के कब्जे में था, इसलिए इसमें उनकी मुवक्किल की कोई भूमिका नहीं है। इसके अलावा, पुलिस और सीबीआई ने बिना किसी बाधा के घर की तलाशी ली और मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, पासपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेज पहले ही जब्त कर लिए हैं।
एम्स भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम में कथित रूप से गड़बड़ी करने के आरोपों पर बचाव पक्ष ने कहा कि इसमें गिरिबाला सिंह की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं है। वहीं, मृतका को दी गई गर्भपात की दवाओं के आरोप पर वकीलों ने दावा किया कि त्विषा शर्मा ने डॉक्टरों की सलाह पर खुद वह दवा ली थी। साथ ही यह भी बताया गया कि वह अत्यधिक चिंता (एंग्जायटी) से जूझ रही थीं और इसके लिए उनका मनोरोग संबंधी इलाज चल रहा था।
गिरिबाला सिंह के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि इस मामले में आत्महत्या की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें मौत का कारण 'एंटेमॉर्टम हैंगिंग' (मृत्यु पूर्व फंदा लगना) बताया गया है। फिलहाल, कोर्ट इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं और सीबीआई की दलीलों पर विचार कर रहा है।

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