नगर निगम की बजट काउंसिल बैठक हंगामे की भेंट चढ़ी। स्लॉटर हाउस और आदमपुर लैंडफिल टेंडर को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष में तीखा टकराव। जानें पूरी रिपोर्ट।
By: Ajay Tiwari
Mar 23, 20264:35 PM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
नगर सरकार का बजट महापौर मालती राय ने पेश किया। शहर में विकास के लिए हर वार्ड को 50 लाख रुपए वार्ड नियोजन निधि में देने और पुराने अधूरे वादों को पूरा करने का भरोसा दिलाया। करीब 3500 करोड रुपये का बजट रखा गया है। पिछली बार कुल 3611 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया था।
तालाब सौंदर्यीकरण
विसर्जन घाट और छठ घाट
कुलियों के लिए आवास
सड़क और ट्रैफिक सुधार
नव बहार सब्जी मंडी
नगर निगम की बजट काउंसिल बैठक की शुरुआत ही हंगामेदार रही। वंदे मातरम के गान के साथ शुरू हुई इस बैठक में शहर के विकास और बजट पर चर्चा होने के बजाय 'स्लॉटर हाउस' (बूचड़खाना) और 'गोमांस' का मुद्दा छाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी नोकझोंक के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
बैठक की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने स्लॉटर हाउस का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के बावजूद कथित गोहत्या मामले में असलम चमड़ा और अन्य दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई। विपक्ष ने मांग की कि इस मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हो।
जवाब में एमआईसी सदस्य आरके सिंह बघेल और चेयरपर्सन ने बताया कि आरोपी असलम चमड़ा के खिलाफ NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि, बीजेपी पार्षदों ने भी अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर कार्रवाई न होने को लेकर नाराजगी जताई।
महापौर मालती राय ने बचाव करते हुए कहा कि स्लॉटर हाउस का टेंडर पिछली सरकार के कार्यकाल में हुआ था और वर्तमान में सभी प्रक्रियाएं नियमों के अधीन हैं। गोमांस के मुद्दे पर चर्चा के दौरान महापौर और नेता प्रतिपक्ष के बीच व्यक्तिगत छींटाकशी भी देखने को मिली। वरिष्ठ भाजपा पार्षदों ने भी सुर में सुर मिलाते हुए लापरवाह अफसरों को तत्काल हटाने की मांग की।
हंगामे के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात निजी खान-पान तक पहुंच गई। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में कहा, "मैं निगम की चाय तक नहीं पीती।" इस पर एमआईसी सदस्य सुषमा बाविसा ने पलटवार करते हुए उन्हें 'झूठा' बताया और दावा किया कि उन्होंने यहां भोजन किया है। इस छोटी सी बात पर दोनों पक्षों में लंबी बहस छिड़ गई।
विवादों के बीच कांग्रेस पार्षदों ने एक नया रुख अपनाते हुए मांग की कि नगर निगम परिषद की ओर से राज्य सरकार को एक आधिकारिक प्रस्ताव भेजा जाए, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की अपील की जाए।
प्रश्नकाल के बाद जब आदमपुर लैंडफिल टेंडर का एजेंडा सामने आया, तो सदन ने एकमत से इसका विरोध किया। एमआईसी सदस्य रवींद्र यति ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली बैठक में इस टेंडर को टालने का फैसला हुआ था, लेकिन निगम अधिकारियों ने हेरफेर कर इसे 'सिफारिश' में बदल दिया। चेयरमैन ने इस धांधली पर सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम कमिश्नर को टेंडर पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है। साथ ही, फाइल में छेड़छाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं।