सतना में आयोजित नीट यूजी री-एग्जाम कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ। फिजिक्स का पेपर कठिन रहा, जबकि एक छात्र केंद्र संबंधी गलत जानकारी के कारण परीक्षा से वंचित रह गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी री-एग्जाम रविवार को सख्ती के साथ सात सेंटरों में सम्पन्न हुई। एग्जाम देकर लौटे अभ्यार्थियों के अनुसार फिजिक्स के सवालों ने अच्छी खासी दिमागी कसरत करवाई और उलझन काफी पैदा की। फिजिक्स कठिन लगी और बायोलॉजी इजी जबकि केमिस्ट्री ठीक -ठाक रही। पेपर खत्म होने के बाद कुछ अभ्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कुराहट, कुछ के चेहरों पर सिकन भी देखने को मिली। परीक्षा पेन पेपर मोड पर आयोजित हुई लेकिन छात्रों को पेन परीक्षा एग्जाम सेंटर में ही दी गई। परीक्षा को संचालित करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई थी। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सतीश कुमार एस ने परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए तगड़े इंतजाम करवाए थे। एग्जाम के लिए सिटी को-आर्डिनेटर डॉ. सूर्यकांत पाठक को बनाया गया था। परीक्षा की निगरानी के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तैनात रहे। बताया गया कि परीक्षा में 2913 अभ्यार्थी पंजीकृत थे जिसमें 322 अनुपस्थित रहे, तो वहीं 2591 शामिल हुए।
केंद्र के चक्कर में बर्बाद हुआ छात्र का साल
एडमिट कार्ड में दर्ज केंद्र पर पहुंचा परीक्षार्थी, कर्मचारियों ने गलत जगह भेजा, लौटने तक बंद हो गए परीक्षा के दरवाजे नीट यूजी री-एग्जाम में सतना में हुई एक गंभीर लापरवाही ने एक छात्र के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा देने पहुंचे छात्र को केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने गलत जानकारी देकर दूसरे सेंटर में भेज दिया। जब तक वह वापस सही केंद्र पहुंचा, तब तक प्रवेश का समय समाप्त हो चुका था और परीक्षा शुरू हो गई थी। नतीजा यह रहा कि छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गया। सेमरी ग्राम निवासी ध्रुव गौतम के प्रवेश पत्र में परीक्षा केंद्र पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2, सतना स्पष्ट रूप से अंकित था। छात्र निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचा, लेकिन गेट पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे यह कहकर लौटा दिया कि उसका केंद्र यहां नहीं, बल्कि वेंकट क्रमांक-2 विद्यालय में है। छात्र आनन-फानन में दूसरे केंद्र पहुंचा, जहां उसे बताया गया कि उसका वास्तविक केंद्र तो केंद्रीय विद्यालय ही है। जब वह दोबारा केंद्रीय विद्यालय पहुंचा तो परीक्षा शुरू हो चुकी थी और उसे प्रवेश नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रवेश पत्र में केंद्र का नाम स्पष्ट लिखा था तो आखिर छात्र को किस आधार पर भटकाया गया? यदि केंद्र पर तैनात कर्मचारियों को ही परीक्षा केंद्रों की सही जानकारी नहीं थी तो उनकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? एक प्रशासनिक चूक ने छात्र का पूरा साल दांव पर लगा दिया। घटना के बाद छात्र ने एसडीएम से शिकायत की है। हालांकि प्रशासन जांच की बात कह रहा है, लेकिन छात्र का कहना है कि जांच से उसका खोया हुआ अवसर वापस नहीं आएगा। उसने न्याय के लिए अदालत जाने की तैयारी शुरू कर दी है। विडंबना यह है कि एक ओर छात्र परीक्षा केंद्रों के बीच दौड़ता रहा।
प्रतिबंध के बाद भी मोबाइल
परीक्षा केन्द्रों में मोबाइल एवं किसी भी प्रकार की डिवाइस ले जाना सख्त प्रतिबंधित था लेकिन इसके बाद भी व्यंकट क्रमांक-2 में इस नियम की धज्जियां उड़ा दी गई। बताया जाता है कि सोशल मीडिया में एक फोटो वायरल हुई जिसमें केन्द्राध्यक्ष व अन्य प्रशासनिक स्टाफ
फोटो सेशन करवाते नजर आया।
सख्ती से जांच, मिला प्रवेश
परीक्षा में सख्ती इस कदर रही कि एग्जाम सेंटर के गेट से ही जांच शुरू हो गई थी। छात्रों की मेटल डिटेक्टर से जांच की गई तो वहीं छात्राओं की चोटी खुलवाई गई, क्लेचर व कानों के टॉप्स व गले के धागे तक उतरवाए गए, पानी की बोतल से रैपर हटवाए गए। इतना ही नहीं जूते पहन कर आने वाले छात्रों से जूते बाहर उतरवाए गए और नंगे
पैर अंदर प्रवेश दिया गया। बताया जाता है कि बेल्ट पहन कर आने वाले अभ्यार्थियों के बेल्ट भी गेट के बाहर करवाए गए थे।
प्रशासनिक अधिकारियों की लगी थी ड्यूटी
नीट री-एग्जाम में पहले से ज्यादा सख्ती बरती गई थी। परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था एवं गोपनीयता को लेकर सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती एवं पेपर को सेंटरों तक की ट्रैकिंग जीपीएस सिस्टम से की गई। प्रत्येक कैमरों में सीसीटीवी कैमरे व वीडियो ग्राफी एवं जैमर सिस्टम
लगाया गया था।


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