रीवा संभाग में मातृ-शिशु मृत्यु रोकने कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने डीपीओ-सीडीपीओ की जवाबदेही तय की। घर पर प्रसव रोकने, एएनसी जांच बढ़ाने और गंभीर गर्भवती महिलाओं को समयपूर्व अस्पताल पहुंचाने के निर्देश दिए।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
संभागायुक्त शीलेंद्र सिंह ने बुधवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान संभाग के सभी डीपीओ एवं सीडीपीओ को स्पष्ट हिदायत दी कि किसी भी जिले में गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान मृत्यु होने पर डीपीओ औश्र सीडीपीओ को जिम्मेदार ठहराया जायेगा। इसके साथ ही उन पर कार्रवाई भी तय होगी। इसके साथ ही कमिश्नर ने जांच शिविर में लापरवाही बरतने पर रीवा, सिंगरौली और मऊगंज के डीपीओ की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया है।
संभागायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी गर्भवती महिलाओं के प्रसव नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में ही कराए जाएं। किसी भी स्थिति में गर्भवती महिलाओं का प्रसव घर पर न कराया जाए। गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान मृत्यु होने पर संबंधित जिले के डीपीओ एवं सीडीपीओ एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता पर जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि गर्भवती महिला को प्रथम माह से 9 माह तक स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की निगरानी में रखा जाता है। गर्भवती महिला की क्रिटिकल स्थिति होने पर संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि यदि गर्भवती महिलाओं की क्रिटिकल कंडीशन है तो प्रसव के 7 दिवस पूर्व गर्भवती महिला को जिला चिकित्सालय के बर्थ वेटिंग रूम में भर्ती कराया जाए। किसी भी स्थिति में संभाग में शिशु मृत्यु एवं मातृ मृत्यु न होने पाए। उन्होंने संभाग में शिशु एवं मातृ मृत्यु की बढ़ती संख्या पर नाराजगी जाहिर की।
जांच शिविरों की संख्या बढ़ाए
कमिश्नर ने सभी डीपीओ को हिदायत दी कि गर्भवती महिलाओं की एएनसी चेकअप के लिए अपने-अपने जिले में शिविरों की संख्या बढ़ाएं। कमिश्नर ने कहा कि कई बार दूरस्थ क्षेत्र में समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती हैं उन स्थानों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के 7 दिवस पूर्व ही जिला चिकित्सालय लाकर बर्थ बैटिंग रूम में एडमिट कराया जाए ताकि क्रिटिकल स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।
90 प्रतिशत से कम एएनसी चेकअप पर जारी हुई नोटिस
कमिश्नर ने उन सभी सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश दिए जिनके क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की एएनसी चेकअप 90 प्रतिशत से कम रही है। उन्होंने सभी सीडीपीओ को हिदायत दी कि वह 15 दिन में स्थिति में व्यापक स्तर पर सुधार करें अन्यथा उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कमिश्नर ने सेम और मेम बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर उनका उपचार कर उन्हें स्वस्थ बच्चों की श्रेणी में लाया जाए। कमिश्नर ने कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने में लापरवाही बरतने पर सीधी एवं मऊगंज के सीडीपीओ के प्रति सख्त नाराजगी जाहिर की और कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
52 प्रसव घर में हुये
गर्भवती महिलाओं की घर पर प्रसव की स्थिति की समीक्षा करते हुए पाया कि रीवा में 17, सतना में 14, सीधी में 8, सिंगरौली में 7, मैहर में 2 और मऊगंज में 4 प्रसव घर में हुए हैं। उन्होंने इस स्थिति पर सख्त नाराजगी जाहिर की और जिम्मेदारी तय करते हुए रीवा एवं सतना के डीपीओ को कारण बताओं नोटिस देने के निर्देश दिए।

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