रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में गर्मी के मौसम में भी हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। कार्डियोलॉजी वार्ड और आईसीयू फुल हैं, जबकि डॉक्टर बढ़ते मामलों के कारणों का अध्ययन कर रहे हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
ठंडी के मौसम में रिकार्ड तोड़ दिल के मरीज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पहुंचे। वार्ड फुल रहा। गर्मी में दिल के मरीजों को राहत की उम्मीद थी लेकिन इस बार वह भी छिन गई। गर्मी में भी दिल ने बेचैन कर दिया है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हार्ट अटैक के मामले बढ़ गए हैं। वार्ड फुल चल रहा। आईसीयू में भी जगह नहीं है। स्ट्रेचर में मरीजों को रखना पड़ रहा। हालत खराब है।
यदि आप यह सोच रहे हैं कि ठंड के मौसम में ही दिल दगा देगा तो इस सोच को बदल डालिए। इस गर्मी में दिल के बढ़ते मामलों ने सारी बातों को झुठला दिया है। डाक्टर भी गर्मी में बढ़ते मामलों को देखकर हैरान है। वह भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर गर्मी के मौसम में इतने अधिक केस क्यों आ रहे हैं। वर्तमान समय में हालात यह हैकि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का कार्डियोलॉजी विभाग पूरी तरह से फुल चल रहा है। यहां एक बेड तक खाली नहीं है। मरीजों को अतिरिक्त बेड लगाकर भर्ती करना पड़ रहा है। स्ट्रेचर तक में आईसीयू में मरीज भर्ती हैं। कई तो वेटिंग में हैं, जिन्हें बेड न होने की वजह से संजय गांधी अस्पताल में भर्ती किया गया है। इसके पहले गर्मी के सीजन में हार्ट अटैक के मामलों में इतनी अधिक तेजी कभी देखने को नहीं मिली। अब डॉक्टर इसका कारण तलाशने में जुटे हुए हैं।
भीड़ के हिसाब से एडजस्ट कर रहे बेड
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में इस बार गर्मी में भी डॉक्टरों और स्टाफ को राहत नहीं है। आईसीयू में 10 बेड की क्षमता है। वार्ड में 50 बेड हैं, जो वर्तमान में सारे भरे हुए हैं। एमरजेंसी केस आने पर स्ट्रेचर पर भी मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर 60 बेड को किसी तरह 70 से 75 बेड बनाकर मरीजों को इलाज किया जा रहा है। यहां बेड फुल होने पर मरीजों को संजय गांधी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भी भर्ती किया जा रहा है।
ऐसा पहली बार, जब गर्मी में वार्ड हुए फुल
हार्ट अटैक के मामले वैसे तो ठंडी में ज्यादा बढ़ते हैं। जैसे ठंडी बढ़ती है, वैसे ही नसें सिकुड़ने लगती है। हार्ट पर असर पड़ने अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ठंडी में कार्डियोलॉजी विभाग में नए और पुराने दोनों तरह के मामले आते हैं लेकिन इस बार गर्मी में भी उम्मीद से कहीं अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों की संख्या देखकर डॉक्टर भी हैरान हैं। उन्हें भी समझ नहीं आ रहा है कि गर्मी में हार्ट की समस्या लोगों में कैसे बढ़ रही है।
नए मामले भी अधिक आ रहे
वर्तमान समय में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचने वाले दिल के रोगी पुराने हैं। हालांकि नए मरीजों की भी संख्या कम नहीं है। गर्मी में नए मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिनका दिल फेल हो रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बेड की संख्या सीमित है लेकिन मरीज चारों तरफ से हर जिले से पहुंच रहे हैं। रीवा संभाग के अलावा छतरपुर, पन्ना तक से मरीज आ रहे हैं। इसके कारण भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बेड का संकट खड़ा हो गया है।
हार्ट अटैक के यह हो सकते हैं कारण
हार्ट अटैक से बचना है तो यह सावधानी बरतें
यदि हार्ट अटैक से बचना है तो गर्मी के दिनों में दोपहर 12 से 4 बजे के बीच भारी शारीरिक श्रम से बचे। पर्याप्त माा में तरल पदार्थ का सेवन करें। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगी समय पर दवाइयों का सेवन करें। धूम्रपान, तंबाकू का सेवन बंद करें।
6 जून को पिछले साल 9 एडमिशन थे, इस बार 27 हुए भर्ती
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में इस गर्मी में हार्ट अटैक के मामले पिछले साल की तुलना में दोगुना से ऊपर पहुंच गए हैं। पिछले साल 6 जून 2025 को 9 एडमिशन हुए थे। वहीं इस साल 6 जून को 27 एडमिशन हुए हैं। इसके अलावा गर्मी में औसतन हर दिन 10 से 11 मरीज ही भर्ती होते रहे। वहीं इस बार यहां संख्या औसतन 20 से ऊपर पहुंच गई है।
इस बार गर्मी में हार्ट अटैक के मामले ज्यादा आ रहे हैं। पिछले साल गर्मी की तुलना में दोगुना से अधिक मरीज भर्ती हो रहे हैं। नए मामले भी तेजी से आ रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, इसका विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। बसर्तें सभी अपनी सेहत का ध्यान रखें। अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। किसी तरह की समस्या होने पर कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
डॉ वीडी त्रिपाठी, एचओडी, कार्डियोलॉजी विभाग, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा


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