रीवा और मऊगंज में 17 शराब समूहों की नीलामी से 526 करोड़ की कमाई हुई, 14 समूह आरक्षित मूल्य से अधिक में बिके जबकि तीन में घाटा हुआ, कुल कारोबार हजार करोड़ पार जाने की उम्मीद है।
By: Yogesh Patel
Mar 29, 20262:57 PM
हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
17 शराब समूहों को आखिरकार आबकारी विभाग ने बेच ही दिया। इन समूहों को आरक्षित मूल्य बढ़ाकर बेचने से करीब 526 करोड़ की कमाई हुई है। इसमें 14 समूह आरक्षित मूल्य से भी अधिक में नीलाम हुर्इं। वहीं अंतिम की तीन समूहों ने जरूर घाटा दिया। आरक्षित मूल्य से कम ममें बोली लगी, जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया। अभी सरकार की कमाई यहीं पर नहीं रुकी है। यह सिर्फ शराब दुकानों को बेचकर कमाई की गई है। इनमें शराब रखने और उसे बेचने के लिए भी ठेकेदारों से आबकारी विभाग वसूली करेगा। कुल मिलाकर इस बार रीवा और मऊगंज में शराब का कारोबार 1 हजार करोड़ के पार पहुंच जाएगा।
आपको बता दें कि सरकार ने इस बार शराब दुकानों को नए सिरे से नीलाम करने का निर्णय लिया था। इसके लिए नई आबकारी नीति बनाई गई। इसी नीति के तहत सभी जिलों में नए सिरे से शराब समूहों का गठन किया गया और समूहों का आरक्षित मूल्य निर्धारण हुआ। इतना ही नहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के आरक्षित मूल्य में 20 फीसदी का इजाफा कर समूहों को नीलाम करने का निर्णय लिया गया। इसी नई नीति के हिसाब से रीवा में शराब समूहों की नीलाम शुरू हुई। पहले चरण में तीन चरण शामिल किए गए। इन तीन चरणों में सभी समूहों को ई टेंडर कम आक्सन में रखा गया। पहले चरण में 8 समूह बिक गर्इं। इसके बाद दूसरे चरण में शेष 9 समूहों को रखा गया। शुक्रवार को अंतिम 2 समूह आक्सन में उतारे गए। इन्हें भी ठेकेदार मिल गए। हालांकि आरक्षित मूल्य से कम में बोली लगी। अब कम दर आने पर स्वीकृति के लिए फाइनल जिला आबकारी कार्यालय से हेडआफिस भेजा गया है। लगभग इसकी स्वीकृति मिलना तय माना जा रहा है। ऊपर से हरी झंडी मिलते ही दुकान ठेकेदारों के सुपुर्द कर दी जाएगी। इसके बाद 1 अप्रैल से नए सिरे से शराब दुकानों को ठेकेदार चलाते नजर आएंगे।
तीन दुकानों के लिए आरक्षित मूल्य से कम लगी बोली
14 शराब दुकान समूहों के लिए ठेकेदार मिले। ठेकेदारों ने इन समूहों को लेने के लिए आरक्षित मूल्य से अधिक में बोलियां लगाई। विभाग ने इन्हें स्वीकार भी कर लिया और समूहों को ठेकेदारों के नाम कर दिया। वहीं अंतिम की तीन समूहों के लिए ठेकेदारों ने कम रेट लगाए। बैकुंठपुर से शुरुआत हुई। 30.48 करोड़ आरक्षित मूल्य था लेकिन ठेकेदार ने सिर्फ 29.27 करोड़ की ही बोली लगाई। हालांकि विभाग ने इसे स्वीकार कर लिया। इसी तरह शुक्रवार को डभौरा और हनुमना के लिए बोली लगी। इसमें भी आरक्षित मूल्य से कम में ठेकेदार ने दांव खेला। बोली खत्म हो गई है। स्वीकृति के लिए हेडआफिस भेजा गया है। ठेका फाइनल होने के आसार हैं।
अभी सरकार की कमाई खत्म नहीं हुई है
शराब समूहों को नीलाम करके सरकार ने अभी सिर्फ लाइसेंस फीस और ड्यूटी ही वसूली है। अभी इन शराब दुकानों में बेची जाने वाली शराब को भी ठेकेदार को बेच कर रुपए कमाएगी। ठेकेदार जितनी शराब वेयर हाउस से उठाएगा। उसकी भी राशि सरकार के खाते में जमा करेगा। इससे इस बार रीवा का शराब करोबार और सरकार की कमाई का आंकड़ा 1 हजार करोड़ के आंकड़े को भी पार कर जाएगा।
सबसे महंगी और अधिक बोली समान नाका के लिए लगी
रीवा और मऊगंज में वैसे तो सबसे अधिक आरक्षित मूल्य वाली शराब समूह सिरमौर चौराहा रही लेकिन इसे उसी मूल्य पर ठेकेदार ने ले लिया। वहीं समान नाका समूह ने सब को चौका दिया। आशीष सिंह ने समान नाका समूह पर कब्जा पाने के लिए आरक्षित मूल्य 55.44 लाख से करीब 10 करोड़ अधिक की बोली लगा दी। यह समूह सबसे महंगी दर पर गई। 65 करोड़ 16 लाख में यह समूह नीलाम हुई।
कौन सा शराब समूह किसको और कितने में मिला
| समूह | बेस प्राइज | फाइनल रेट | ठेकेदार |
| समान नाका | 55.44 करोड़ | 65.16 करोड़ | आशीष सिंह बघेल |
| ट्रांसपोर्ट नगर | 51.11 करोड | 53.68 करोड़ | जय महाकाल |
| इटौरा समूह | 36.32 करोड़ | 38.38 करोड़ | जय महाकाल |
| मऊगंज समूह | 28.44 करोड़ | 32.44 करोड़ | बीकेडी ट्रेडर्स |
| नईगढ़ी समूह | 14.59 करोड़ | 16.57 करोड़ | सिद्धार्थ सिंह |
| बरौली समूह | 12.22 करोड़ | 14.35 करोड़ | राकेश मढेसिया |
| पीटीएस समूह | 51.75 करोड़ | 53.58करोड़ | चंदेल ट्रेडर्स |
| गढ़ समूह | 22.49 करोड़ | 24.55 करोड़ | मां भगवती |
| देवतालाब समूह | 19.30 करोड़ | 20.61 करोड़ | माइडस्टोन |
| मनगवां समूह | 28.92करोड़ | 28.92 करोड़ | मां भगवती |
| सिरमौर चौराहा | 59.58 करोड़ | 59.58 करोड़ | जय महाकाल |
| सेमरिया समूह | 28.98 करोड़ | 29.51 करोड़ | प्रकाश सिंह |
| गुढ़ समूह | 19.64 करोड़ | 19.64 करोड़ | सुप्रभ |
| हनुमना समूह | 17.78 करोड़ | 15.11 करोड़ | अश्वनी सिंह |
| चाकघाट समूह | 11.58 करोड़ | 11.40 करोड़ | प्रदीप गुप्ता |
| बैकुंठपुर समूह | 30.48 करोड़ | 29.27 करोड़ | मां भगवती |
| डभौरा समूह | 16.67 करोड़ | 14.24 करोड़ | भार्गवी वाइंस |
| योग | 505.25 करोड़ | 526.99 करोड़ |