रीवा और मऊगंज में बोर्ड परिणाम में बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया। 64 में से 38 छात्राएं मेरिट सूची में रहीं, जबकि 10वीं परिणाम घटा और 12वीं में हल्का सुधार दर्ज किया गया।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
बुधवार को जाी बोर्ड परीक्षा परिणाम में बेटियों ने बाजी मार ली। प्रदेश की प्रवीण्य सूची में रीवा और मऊगंज जिला में बेटियों का ही जलवा रहा। 64 छात्र-छात्राएं मैरिट में जगह बनाने में सफल रहे। इनमें से 38 टॉपर बेटियां ही थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद स्कूलों में टॉप करने वाले छात्रों को सम्मान किया गया। मुंह मिठा कराया गया। उनके उज्जवल भविष्य को लेकर गुरुजनों ने आशीर्वाद दिया।
आपको बता दें कि इस बार फिर से बोर्ड परीक्षा परिणाम में लड़कियों ने बाजी मारी ली है। लड़कियों ने फिर से लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा में रीवा और मऊगंज से 41 बच्चे टॉप किए हैं। इसी तरह हायर सेकेण्डरी परीक्षा टॉप 10 में कुल 23 छात्रों ने प्रवीण्य सूची में जगह बनाई है। इसमें 12 छात्र सरकारी स्कूल से और 11 छात्र प्राइवेट स्कूल से आए हैं। बोर्ड परीक्षा की यदि पूरे जिले का पासिंग प्रतिशत की बात करें तो 10वीं में पिछले साल की तुलना में पासिंग प्रतिशत घट गया है। सिर्फ 66.10 फीसदी ही छात्र पास हुए हैं। 5.98 फीसदी परीक्षा परिणाम इस साल कम रहा। वहीं 12वीं का परीक्षा परिणाम पिछले साल की तुलना में बेहतर रहा। पिछले साल जिला का प्रतिशत 64.28 फीसदी रहा, जो इस साल बढ़कर 66.29 फीसदी तक पहुंच गया है। मऊगंज जिला के परीक्षा परिणाम पर नजर डालें तो इस बार काफी पीछे रह गया है।
आईआईटी में एडमिशन का है लक्ष्य
विशेष शुक्लाने गणित संकाय से 12वीं में 9वीं रैंक हासिल की है। वह बीबीएस किड्स स्कूल के छात्र हैं। उनके पिता दिलीप कुमार शुक्ला शिक्षक हायर सेकण्डरी सिरमौर माता श्रीमती अर्चना शुक्ला, शिक्षक मीडिल स्कूल सिलपरा में है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता एवं परिजन को दिया है। विशेष आई. आई. टी में प्रवेश लेकर कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।
आईएएस बनने का है सपना
दून पब्लिक स्कूल में पढ़ने वालीी 12वीं की छात्रा सुष्मिता सिंह ने बायो ग्रुप में 10वीं रैंक हासिल की है। सुस्मिता ने बताया कि वह अपने लक्ष्य पर अड़िग रही। ध्यान भटकने नहीं दिया। पढ़ाई के साथ साथ वह हर एक्टिविटी में हिस्सा लेती थी। स्कूल प्रेसिडेंट भी रही। उनका सपना सिविल सर्विसेज की तैयारी करना है। पहले वह डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन अब उनका लक्ष्य यूपीएससी है। उनके पिता सुरेन्श सिंह है। उन्होंने बताया कि किराए के कमरे में रह कर बेटियों को बढ़ा रहे हैं। आर्थिक रूप से कोचिंग कराने के लिए बाहर भेजने में सक्षम नहीं है। यही पर रहकर तैयारी कराएंगे।
ट्रक ड्राइवर के बेटे ने प्रदेश में 9वीं रैंक लाई
सिरमौर तहसील के शाहपुर गांव के श्रीराम मिश्रा ने दसवीं की परीक्षा में 98.2% अंक लाकर नौवां स्थान प्राप्त किया है। श्रीराम मिश्रा रीवा की नोबल अकादमी स्कूल के विद्यार्थी हैं। श्रीराम के पिता पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं और माता गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और माता को दिया है। उनकी माताजी ने बताया कि श्रीराम पढ़ाई के प्रति काफी लगनशील हैं। श्रीराम का सपना एक प्रतिष्ठित पद प्राप्त कर समाज की सेवा करना है।
डॉक्टर बन समाज की सेवा करना चाहती हूं
बीबीएस किड्स स्कूल से जीव विज्ञान संकाय से 12वीं में तीसरी रैंक हासिल करने वाली प्रियांशी सिंह का सपना डॉक्टर बनना है। वह डॉक्टर बन कर समाज की सेवा करना चाहती है। उनके पिता श्याम महादुर सिंह सीमेंट फैक्ट्री में इंजीनियर है। उनकी माता का निधन हो चुका है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिजन और बड़े पिता जेपी सिंह को दिया है।
बहन डॉक्टर है इसलिए वह भी बनना चाहती हैं
बीबीएस किड्स स्कूल की छात्रा हर्षिता पाण्डेय ने जीवन विज्ञान संकाय से 12वीं में 9वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता महेन्द्र कुमार पाण्डेय माता श्रीमती प्रतिभा द्विवेदी दोनों शिक्षक हैं। बायॅज हायर सेकण्डरी मुकुन्दपुर मैहर में पदस्थ हैं। हर्षिता पाण्डेय बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। डॉक्टर बनने की प्रेरणा अपनी बहन से प्राप्त की जो स्वंय डॉक्टर हैं। माता को उन्होंने इस उपलब्धता पर विशेष श्रेय दिया हैं।
पुलिस में हैं पापा लेकिन डॉक्टर बनने का है सपना
मॉडल स्कूल की छात्रा साक्षी मिश्रा ने 12वीं में बायोलॉजी से टॉप किया है। 7वीं पॉजीशन आई है। साक्षी डॉक्टर बनना चाह रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी इस सफलता के पीछे मम्मी, पापा और स्कूल के शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। उनका कहना है कि पिता चक्रधर मिश्रा पुलिस में हैं लेकिन वह पुलिस में नहीं जाना चाहती। उन्हें डॉक्टर बनना है।
कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करना है
मॉडल स्कूल से ही मैथ ग्रुप से 12वीं में 8वीं रैंक लाने वाली उमा सोनी ने बताया कि वह दिन में 7 से 8 घंटे पढ़ती थी। उनके मम्मी पापा का फुल सपोर्ट मिला। कोचिंग भी जाती थी। वह जेईई की तैयारी कर बीटेक करना चाहती है। उन्हें कम्प्यूटर साइंस से बीई करना है।
इंजीनियर बनने का है सपना
मॉडल स्कूल के ईशांत पाठक का 12वीं मैथ में 9वीं रैंक आई है। वह रीवा में मम्मी के साथ किराए का मकान लेकर रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनका सिर्फ एक ही काम था पढ़ाई। वह दिन में 7-8 घंटे पढ़ते थे। उनका सपना इंजीनियरिंग करना है। उन्होंने बताया कि उनके पिता टीचर हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मम्मी, पापा को दिया।
साइंटिस्ट बन कर देश की सेवा करना चाहती हूं
मॉडल स्कूल की 10वीं की छात्रा अनामिका तिवारी ने 7वीं रैंक लाई। वह मैथ से आगे की पढ़ाई करना चाहती है। उनका सपना देश की प्रगति में मदद करना है। वह साइंटिस्ट बनना चाहती है। उन्होंने बताया कि वह हर दिन 5-6 घंटे पढ़ाई करती थी। उनके पिता ऋषिकेश में रत्न का व्यवसाय करते हैं। रीवा में रहकर अकेले ही खुद पढ़ाई करती हैं।
बहन ने घर में दी कोचिंग
10वीं में 9वीं रैंक लाने वाली मॉडल स्कूल की छात्रा शिवा शुक्ला ने बताया कि उनके पिता गुरुकुल स्कूल में इंचार्ज हैं। बहन हिमांशी शुक्ला इंजीनियरिंग करती है। वही उन्हें घर पर पढ़ाती थी। इसके अलावा तनु शुक्ला उनकी भी बहन है। वह बीसीए, एमसीए की है। उनका भी मार्गदर्शन मिला। हर दिन वह 5-6 घंटे पढ़ाई करती थी।
यूपीएससी निकालना है लक्ष्य
10वीं में 10वां रैंक लाने वाले मॉडल स्कूल के ही छात्र अनुराग तिवारी ने बताया कि उन्होंने खुद पढ़ाई की और कोचिंग भी ली। परिवार के सदस्यों ने मॉटीवेट किया। दादा रामनिवास तिवारी का इस सफलता में विशेष योगदान रहा। उनका लक्ष्य यूपीएससी क्लियर करना है। फिलहाल वह मैथ लेकर आगे की बढ़ाई करेंगे।
प्रोफेशनल कोर्स करना चाहती हूं
मार्तण्ड स्कूल क्रमांक एक की अंशिका शर्मा ने 12वीं में कामर्स ग्रुप से से 8वीं रैंक लाई हैं। उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का श्रेय शिक्षक और परिवार के सदस्यों को जाता है। उनके भाई ने हर स्टेज पर मदद की। उन्होंने कहा कि आगे कोई प्रोफेशनल कोर्स करेंगी। कैट की भी तैयारी करने की सोच रही हैं।
घंटे के हिसाब से नहीं पढ़ा
साक्षी चतुर्वेदी मार्तण्ड स्कूल क्रमांक 1 की छात्रा हैं। उन्होंने कक्षा 10वीं में 8वीं रैंक लाई हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने घंटे के हिसाब से पढ़ाई नहीं की। कोई भी त्यौहार हो, छुट्टी हो वह हमेशा पढ़ती रहती थी। समय का बाउंडेशन नहीं था। जब भी उन्हें समय मिला। वह तैयारी करती रही। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के शिक्षक को दिया।
होमवर्क और रिवीजन ने बनाया टॉपर
श्रृति पाण्डेय गायत्री विद्या मंदिर नेहरू नगर की छात्र हैं। उन्होंने 10वीं में चौथी रैंक प्राप्त की है। श्रृति ने बताया कि उनकी सफलता का श्रेय शिक्षक और अभिभावक को जाता है। उन्होंने मेरा बहुत सपोर्ट किया। इस सफलता के लिए वह हर दिन स्कूल से मिलने वाले होम वर्क को पूरा किया। जो भी स्कूल में पढ़ाया जाता था, उसे रिवाइज करती थी।
विधि की पढ़ाई करूंगी
कनिष्का तोमर सांदीपनी कन्या पीके स्कूल की छात्रा हैं। इन्होंने 12वीं में 8वीं रैंक प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि हर दिन कोर्स को रिवाइज करती थीं। चैप्टर अच्छे से रीड करना। नोट्स बनाती थी। इस सफलता का श्रेय उन्होंने मम्मी, पापा और टीचर को दिया है। उन्होंने बताया कि वह विधि से स्रातक की पढ़ाई करेंगी।
माता पिता की मेहनत का परिणाम
उन्नती गुप्ता सांदीपनी कन्या पीके स्कूल की छात्रा हैं। उन्होंने 10वीं में 10वीं रैंक अर्जित की है। उन्होंने बताया कि वह काफी खुश हैं। आगे मैथ लेकर पढ़ाई करेंगे। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने माता, पिता और शिक्षकों को दिया है।



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