सतना की स्वास्थ्य सेवाओं ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। हर माह लाखों मरीजों का इलाज हो रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी, समन्वय की समस्या और बढ़ते तनाव जैसी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर अपनी मजबूती और समर्पण का परिचय दिया है। अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के बीच के आंकड़े बताते हैं कि सतना और मैहर जिले में चिकित्सक प्रतिदिन औसतन साढ़े छह हजार से अधिक मरीजों की जांच और उपचार कर रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की निरंतर मेहनत का भी प्रमाण है।
चिकित्सक तो बढ़े लेकिन समन्वय नहीं
मेडिकल कॉलेज आने के बाद चिकित्सकों की संख्या में इजाफा देखने को मिला लेकिन समन्वय अभी भी बरकरार नहीं है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों पर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का जोर नहीं है। यहां के चिकित्सक केवल सुबह की ओपीडी को ही अपना हिस्सा मानते हैं जबकि शाम की ओपीडी जिला अस्पताल के नियमित चिकित्सकों के भरोसे रहती है। कई दफा समन्वय बनाने के लिए मीटिंग का दौर भी चला लेकिन समन्वय पर बात नहीं बनी। हालत यह है कि जिला अस्पताल से दस से ज्यादा चिकित्सकों ने जिले को ही छोड़ दिया है। शेष चिकित्सकों से ओपीडी, भर्ती राउंड और अन्य शिविरों के कार्य लिया जा रहा है। इसके चलते कई चिकित्सक अनिद्रा का भी शिकार हो रहे हैं। ऐसे हालत में जब चिकित्सक ही स्वस्थ नहीं होंगे तो मरीजों को कैसे उचित उपचार मिल पाएगा?
सबसे अधिक ओपीडी सतना में, सबसे कम रामनगर में
जिला अस्पताल सहित जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी (आउट पेशेंट विभाग) में मरीजों की भारी संख्या दर्ज की गई। सोहावल/सतना क्षेत्र इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां एक वर्ष में 7 लाख 78 हजार 758 मरीजों का उपचार किया गया। वहीं आईपीडी (इन पेशेंट विभाग) के आंकड़े भी स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीरता और प्रभावशीलता को दशार्ते हैं। सोहावल/सतना में 68 हजार 718 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया, जो जिले में सबसे अधिक है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है और लोग बड़ी संख्या में सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
20 फीसदी चिकित्सक तनावग्रस्त
चिकित्सकों ने बताया कि जिला अस्पताल में सीमित संसाधनों के बीच मरीजों की सेवा की जा रही है। वर्ष 2024 के बाद से चिकित्सकों का प्रमोशन तक रुका हुआ है। लगभग 20 फीसदी चिकित्सक मानसिक तनाव व अवसाद से ग्रसित हैं। अधिकांश चिकित्सकों को हाई बीपी और सुगर की भी समस्याएं हैं। सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल की गायनी चिकित्सक डायलिसिस में होने के बावजूद भी सेवाएं दे रही हैं।
चुनौतियां भी हैं, लेकिन सेवा जारी
मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती जरूर बन रही है, लेकिन डॉक्टरों का समर्पण इन चुनौतियों को संभाल रहा है। गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचने से लोगों को राहत मिल रही है और सरकारी अस्पतालों पर भरोसा भी बढ़ रहा है।
मरीजों की स्थिति
| ब्लॉक | ओपीडी | भर्ती |
| मैहर | 4,60,826 | 19,549 |
| मझगवां | 3,00,160 | 6,728 |
| अमरपाटन | 2,29,712 | 9,778 |
| नागौद | 2,21,681 | 11,243 |
| रामपुर बाघे | 1,82,439 | 520 |
| उंचेहरा | 1,42,271 | 8,499 |
| रामनगर | 65,603 | 4,963 |
(एक साल के आंकड़े)


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