सतना जिले के मझगवां में कुपोषण से मासूम की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जांच में लापरवाही, एनीमिया और सुविधाओं की कमी सामने आई, जिससे जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हुई।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मझगवां विकासखंड के सुरांगी गांव में कुपोषण से हुई मौत इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है। मासूम की मौत के बाद सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिरकार मौत का कारण क्या था जिसे प्रशासन अभी तक स्पष्ट नहीं कर सका है। बताया जाता है कि शनिवार को मझगवां विकासखंड में घर-घर दस्तक अभियान के दौरान दो बच्चियां कुपोषित पाई गई जिन्हें मझगवां एनआरसी में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। इसके अलावा जिले की जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुचित्रा अग्रवाल द्वारा शनिवार को जिला अस्पताल के पीकू वार्ड एवं मझगवां स्थित सीएचसी एवं एनआरसी का दौरा किया गया। इस दौरान उन्होंने मृतक बच्ची के एवं गर्भवती मां के रिकार्ड भी खंगाले। सूत्रों ने बताया कि इन रिकार्डों में कई कमियां सामने आई हैं। जैसे कि गर्भवती महिला को आयरन- सुक्रोज इंजेक्शन नहीं दिया गया जिससे ब्लड बढ़ सकता था। वहीं गर्भावस्था के दौरान होने वाली नियमित जांचें भी नहीं की गर्ईं। सवाल यह उठता है कि आखिरकार गलती कहां हुई है?
एनीमिक थी गर्भवती नहीं चढ़ाया गया आयरन-सुक्रोज
मझगवां जांच में गईं जिला टीकाकरण अधिकारी को रिकार्डों में कई अनियमितताएं मिली हैं। उन्होंने बताया कि 21 दिसम्बर 2025 को सुरांगी पथरा निवासी विमला प्रजापति पति नत्थू को रात 12 बजे जुड़वा संताने पैदा हुर्इं। पैदा होने के बाद दोनों बच्चे स्वस्थ थे। 22 दिसम्बर को डिलेवरी के बाद हीमोग्लोबिन की जांच की गई तो 7.9 ग्राम हीमोग्लोबिन निकला। जिस पर आयरन -सुक्रोज चढ़ाया गया। इसके बाद 24 दिसम्बर को भी आयरन-सुक्रोज का इंजेक्शन लगाया गया। बताया गया कि केस हिस्ट्री चेक की गई तो पता चला कि 9 अक्टूबर को गर्भवती की जांच में 6.3 ग्राम हीमोग्लोबिन मिला था जो कि गंभीर श्रेणी में आता है। चिकित्सकों की सलाह पर 8 नवम्बर को जिला अस्पताल में 1 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। 13 नवम्बर को दोबारा खून की जांच की गई तो 7.2 ग्राम हीमोग्लोबिन निकला। मझगवां में 14 नवम्बर को फिर आयरन-सुक्रोज चढ़ाया गया। जिसे देख पता चला कि महिला एनीमिक पीड़ित थी, महिला को बार-बार खून की कमी हो रही थी। जिला अस्पताल में महिला को 1 यूनिट ब्लड और चढ़ाया जा सकता था लेकिन चिकित्सकों ने इसे बेहतर नहीं समझा, वहीं मझगवां के सीएचओ पुष्पेन्द्र गुप्ता द्वारा भी महिला की नियमित जांच और आयरन-सुक्रोज चढ़वाने में लापरवाही बरती गई।
वजन कम, बच्चियां एनआरसी में भर्ती
शनिवार को मझगवां विकासखंड चौबेपुर के इंदिरा नगर में शिवानी मवासी पिता रामसुख मवासी उम्र डेढ़ साल वजन 5.460 कि ग्रा. एवं दूसरी कुपोषित बच्ची नीतू मवासी पिता रामनरेश मवासी उम्र 10 माह वजन 5.62 किग्रा. मिली। दोनों बच्चियां गंभीर श्रेणी के बाहर हैं लेकिन दोनों का वजन उम्र के हिसाब से कम हैं। जिसके चलते बच्चियों को मझगवां पोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव व स्वास्थ्य आयुक्त का भ्रमण आज
मध्यप्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग बर्नवाल एवं स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस. का भ्रमण सतना-मैहर जिले में 26 व 27 को प्रस्तावित है। इस दौरान जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं का औचक निरीक्षण सहित अधिकारियों के साथ बैठक भी की जाएगी।
एंबुलेंस का दरवाजा बंद करने तार का उपयोग
एंबुलेंस संविदाकार का आतंक जारी है। इन्हें सिर्फ अपनी कमाई से मतलब है। मरीजों की जान से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। शुक्रवार की शाम जिस एंबुलेंस में कुपोषण से गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चे को रीवा रेफर किया गया उसका पिछले दरवाजा खराब था। एंबुलेंस में तारबाड़ी करके गेट को बंद किया गया। एंबुलेंस के अंदर लाइट भी बंद थी। यानी अंधेरे में मासूम को रीवा ले जाया गया। मेंटीनेंस के नाम पर एंबुलेंस संविदाकार केवल अपना कोरम पूरा कर रहे हैं।
पीडियाट्रिक और गायनोलॉजिस्ट की कमी
मझगवां सीएचसी में केवल एक मेडिकल आॅफीसर और स्टाफ के भरोसे कुपोषित बच्चों और गर्भवती धात्रियों को चिकित्सकीय सुविधा दी जा रही है। यहां न तो शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक) हैं और न ही कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ। इन डाक्टरों की कमी के चलते भी बड़ी समस्याएं पैदा हो रही हैं। हितग्राहियों को उचित इलाज के लिए जिला अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।
कुपोषण पर सियासत नहीं, जवाबदेही जरूरी: नीलांशु
चित्रकूट के पूर्व विधायक व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव नीलांशु चतुर्वेदी ने मझगवां ब्लॉक में कुपोषण से जुड़ी घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बीते 6 महीनों में नवजात मासूमों की मौत और कई बच्चों का जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष करना बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक स्थिति है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की असंवेदनशीलता और विफलता को उजागर करता है। यह स्थिति सरकारी तंत्र पर बदनुमा दाग और समाज के माथे पर कलंक है।
कुपोषण पर सियासत न करे कांग्रेस : अतुल सिंह
भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी अतुल सिंह परिहार ने कांग्रेस पर मझगंवा में कुपोषण के मामले पर निम्न स्तर की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि बेहतर होगा कि कांग्रेस के लोग तथ्यों का सही आंकलन कर लें उसके बाद ही कोई बयानबाजी करें। मझगवां में करीब 36 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां पर बच्चों सहित सभी के स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई गयी हैं। मझगवां विकासखंड के कैमहा व सुरंगी गांव और हाल ही में चित्रकूट के वार्ड क्र. 7 में जो मामले आये हैं उसको प्रदेश सरकार, जिले के सांसद एवं क्षेत्रीय विधायक ने गंभीरता से लिया है और उनके द्वारा सुविधाओं को बेहतर से बेहतर करने के निर्देश दिये गए हैं साथ ही दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही भी की गई है।
कुपोषण से हुई मौतों का जिम्मेदार कौन : दिलीप मिश्रा
जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने कुपोषण से मासूम बच्चों की हुई मौतों पर गहरी चिंता व्यक्ति की है। श्री मिश्रा ने मझगवां विकासखंड का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र कुपोषण के कारण पूरे प्रदेश में बदनाम हो चुका है लेकिन इसके बावजूद यहां हालात सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। चित्रकूट क्षेत्र में उत्सवों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं जबकि दूसरी ओर गरीब परिवारों के बच्चों के कुपोषण के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं।
न्यायिक जांच हो : सुभाष शर्मा
6 माह में कुपोषण से 3 नवजातों की मौत और कई बच्चों की गंभीर स्थिति पर पूर्व प्रत्याशी सुभाष शर्मा 'डोली' ने गहरा रोष जताया है। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच और दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग की है।


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