सतना कृषि उपज मंडी में तिल, उड़द, तुअर और मूंग के भाव मजबूत रहे। किसानों को बेहतर कीमत मिली, जबकि दाल और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाने का संकेत दे रही हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
कृषि उपज मंडी के ताजा भावों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खेत और रसोई का रिश्ता सीधा है। मंडी में जिस फसल का भाव बढ़ता है, उसका असर कुछ समय बाद आम आदमी की थाली तक पहुंचता है। बुधवार को जारी मंडी के दैनिक आवक-भाव पंजी के विश्लेषण में यह साफ दिखाई दिया कि दाल और खाद्य तेल से जुड़ी फसलें मजबूत स्थिति में हैं। इसका फायदा किसानों को मिल रहा है लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए यह महंगाई का संकेत भी माना जा रहा है। बुधवार को मंडी में कुल 2,408 बोरियों की आवक दर्ज हुई। दिनभर में 132 सौदे हुए और करोड़ों रुपए का कारोबार हुआ। हालांकि आवक के आंकड़े सामान्य रहे, लेकिन भावों ने व्यापारियों और किसानों दोनों का ध्यान खींचा।
दालों के भाव ने बढ़ाई रसोई की चिंता
मंडी के आंकड़ों में दूसरी बड़ी बात दलहन फसलों की मजबूती रही। उड़द का अधिकतम भाव 7550 रुपए प्रति क्विंटल और राहर (तुअर) का भाव 7530 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। मूंग भी 7225 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी, जबकि चना 5630 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इन भावों को देखकर व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में दालों के दामों पर दबाव बना रह सकता है। इसका सीधा असर घरों के मासिक बजट पर पड़ सकता है, क्योंकि दालें भारतीय रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा हैं। जानकारों का कहना है कि यदि नई आवक नहीं बढ़ी और मांग इसी तरह बनी रही तो खुदरा बाजार में दालों की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सीजन का सबसे बड़ा फायदा
दिनभर की नीलामी में सबसे अधिक चर्चा तिल की रही। तिल का अधिकतम भाव 9290 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जो मंडी में बिकने वाली सभी प्रमुख फसलों में सबसे अधिक रहा। अलसी ने भी किसानों को निराश नहीं किया और इसका अधिकतम भाव 8,749 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तिलहन फसलों की सीमित उपलब्धता और खाद्य तेल उद्योग की बढ़ती मांग के कारण कीमतों में मजबूती बनी हुई है। कई किसानों ने बेहतर दाम की उम्मीद में अपनी उपज रोक रखी थी, जिन्हें अब इसका लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। मंडी के एक व्यापारी ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताह से तिलहन वर्ग की फसलों में लगातार मजबूती देखी जा रही है। यदि यही रुझान बना रहा तो किसानों को और बेहतर कीमत मिल सकती है।
कई फसलें मंडी से गायब
मंडी के रिकॉर्ड में धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा, कोदो और लोकमन गेहूं जैसी फसलों की आवक शून्य दर्ज की गई। सीजन बदलने के कारण इन फसलों की आवक लगभग समाप्त हो चुकी है। इससे मंडी का कारोबार फिलहाल गेहूं, दलहन और तिलहन फसलों के इर्द-गिर्द सिमट गया है।
गेहूं ने संभाली बाजार की कमान
जहां तिलहन और दलहन ने ऊंचे भावों से सुर्खियां बटोरीं, वहीं गेहूं ने अपनी मजबूत मौजूदगी से मंडी की गतिविधियों को गति दी। कुल 2408 बोरियों की आवक में अकेले 1838 बोरियां सामान्य गेहूं की थीं। यानी मंडी के कुल कारोबार का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा गेहूं पर केंद्रित रहा। गेहूं का न्यूनतम भाव 2282 रुपए प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 2530 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। भारी आवक के बावजूद कीमतों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई, जो इस बात का संकेत है कि बाजार में मांग लगातार बनी हुई है। उपभोक्ताओं के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि गेहूं के स्थिर भावों का मतलब है कि फिलहाल आटा और अन्य गेहूं उत्पादों की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।
भावों की तस्वीर
फसल अधिकतम भाव
तिल - 9,290
अलसी - 8,749
उड़द - 7,550
राहर (तुअर) - 7,530
मूंग - 7,225
चना - 5,630
गेहूं (मॉडल भाव) - 2,530
(रु./क्विंटल)


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