सतना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही एनएचएम की जांच में सामने आई। कुपोषण, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की निगरानी में कमी और अस्पतालों में अनियमितताओं पर छह अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। इस बात का खुलासा बीते दिनों सतना दौरे पर आई एनएचएम की राज्य स्तरीय टीम ने किया है। दरअसल, कुपोषण से जिले में मौत के मामले को लेकर एनएचएम की पांच सदस्यीय टीम बीते दिनों सतना जिले के दौरे पर आई थी। टीम ने अपने निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बरती जा रही लापरवाही से संबंधित एक रिपोर्ट दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर 6 लोगों को शोकॉज जारी किया गया है। इन सभी से 7 से 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोष जनक नहीं पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिन लोगों का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उनमें जिला कार्यक्रम प्रबंधक से लेकर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी भी शामिल हैं।
अनिवार्य गृह भेंट नहीं की गई
कुपोषण के मामले में बरती गई लापरवाही को एनएचएम की टीम ने गंभीरता से लिया है, टीम ने कहा कि सुरांगी में नवजात शिशुओं के जन्म के समय वजन क्रमश: 2 किलोग्राम एवं 1.9 किलोग्राम था जो एचबीपीएनसी दिशा निर्देशों के अनुसार उच्च जोखिम श्रेणी में आता है। इसमें अस्पताल से डिस्चार्ज होने के उपरांत सात दिनों तक प्रतिदिन एवं उसके बाद दूसरे दिन अनिवार्य रूप से गृह भेट की जानी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यहां ब्लाक कम्युनिटी मोबिलाइजर द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई।
इन पर भी पाई कमियां
राज्य स्तरीय टीम द्वारा 29-30 अप्रैल को जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के दौरान प्रसव कक्ष में गंभीर अनियमितताएं एवं गुणवत्ता संबंधी कमियां पाई गई थीं।
राज्य स्तरीय टीम द्वारा आंगनवाड़ी सह ग्राम आरोग्य केन्द्र अर्जुनपुर के निरीक्षण के दौरान बुलाने पर भी कम्युनिटी हेल्थ आफीसर मौके पर नहीं आई थीं, अक्सर उन पर अनुपस्थित रहने का आरोप है एवं इनके क्षेत्र में झोलाछाप डाक्टर से शिशु का इलाज कराया गया।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक पर समीक्षा बैठकें आयोजित नहीं करने एवं सुरांगी निवासी विमला प्रजापति अनमोल पोर्टल पर दर्ज थी तथा एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला थी, बावजूद इसके न तो उसका समय पर प्रबंधन किया गया और न ही आवश्यक ट्रैकिंग की गई। जिले में एनएचएम से क्रय की जा रही सामग्रियों की जांच नहीं की जा रही।
खंड चिकित्सा अधिकारी मझगवां को जारी नोटिस में कहा गया है कि एनबीएसयू मात्र 80-90 वर्गफिट में संचालित किया जा रहा है जो मानकों के अनुरूप नहीं है। उपलब्ध दो रेडिएंट वार्मरों में से एक अक्रियाशील पाया गया तथा राज्य द्वारा प्रदत्त कुल 4 रेडियंट वार्मरों में से मात्र 2 के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इन्हें नोटिस

मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए रीवा संभाग के कमिश्नर ने बाणसागर बांध के डूब प्रभावित क्षेत्रों को 15 जून तक खाली कराने के निर्देश दिए। सभी जिलों को कंट्रोल रूम, राहत शिविर और आपदा प्रबंधन तैयारियां पूरी करने को कहा गया।
ग्रीष्मकालीन भीड़ को देखते हुए रेलवे ने रीवा-चर्लपल्ली समर स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन चार फेरों तक रानी कमलापति स्टेशन के रास्ते चलेगी, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा सुविधा मिलेगी।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट पदों के विभागवार स्थानांतरण को लेकर विवाद गहरा गया है। मरीजों की जरूरत वाले विभागों से पद हटाने और चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है।
रीवा के सेमरिया क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में दो अवैध क्लीनिक सील किए गए। जांच में बिना पंजीयन इलाज, आवश्यक संसाधनों की कमी और एलोपैथिक दवाओं की अवैध बिक्री का खुलासा हुआ।
सीधी-सिंगरौली एनएच-39 पर बने 10 फीट गहरे गड्ढे में गाय गिर गई। ग्रामीणों ने उसे सुरक्षित निकाला। 12 वर्षों से अधूरी सड़क परियोजना की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पन्ना-खजुराहो रेल परियोजना में पहले 54,578 पेड़ों की कटाई के बाद अब नए एलाइनमेंट से 50 हजार और पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। दूरी, लागत और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर रेलवे की योजना सवालों के घेरे में है।
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