सतना जिले में जुलाई के 14 दिन बीतने के बाद केवल 33.17 प्रतिशत राशन कार्डधारकों तक खाद्यान्न पहुंचा। जैतवारा सबसे आगे रहा, जबकि चित्रकूट में वितरण महज 3.75 प्रतिशत दर्ज होने से व्यवस्था पर सवाल उठे।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत हर महीने लाखों परिवारों तक राशन पहुंचाने का दावा किया जाता है लेकिन सतना जिले में जुलाई माह के वितरण की रफ्तार इन दावों से मेल नहीं खाती है। महीने के 14 दिन गुजर जाने के बावजूद जिले के कुल राशन कार्डधारकों में से केवल एक-तिहाई परिवारों तक ही खाद्यान्न पहुंच सका है। खाद्य विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में वितरण में भारी असमानता है। कहीं सात में पांच परिवार राशन ले चुके हैं तो कहीं सौ में चार परिवार भी राशन नहीं ले पाए हैं। ऐसे में वितरण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं?
खाद्य विभाग की मंगलवार की दैनिक ट्रांजेक्शन रिपोर्ट के अनुसार सतना जिले में कुल 2 लाख 79 हजार 65 राशन कार्ड पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 92 हजार 580 कार्डों पर ही खाद्यान्न का वितरण दर्ज हुआ है। यानी कुल पात्र परिवारों में से केवल 33.17 प्रतिशत तक ही राशन पहुंच पाया है। इसका अर्थ है कि जिले के लगभग 1 लाख 86 हजार 485 राशन कार्डधारकों ने अभी तक राशन नहीं लिया है या उनके नाम पर वितरण दर्ज नहीं हुआ है। यदि प्रतिदिन के औसत की बात करें तो 14 दिनों में करीब 6 हजार 600 कार्डधारकों तक ही प्रतिदिन राशन पहुंचा। इस गति से वितरण होने पर महीने के अंत तक भी शत-प्रतिशत वितरण आसान नहीं दिखता, हालांकि महीने के अंतिम सप्ताह में आमतौर पर वितरण बढ़ जाता है।
चित्रकूट ने चौंकाया, जैतवारा बेहतर
सबसे अधिक चौंकाने वाले आंकड़े नगर परिषद चित्रकूट के सामने आए हैं। यहां 1 हजार 813 राशन कार्ड हैं लेकिन मंगलवार तक केवल 68 कार्डधारकों ने ही राशन प्राप्त किया। यानी वितरण 3.75 प्रतिशत रहा। इसके विपरीत नगर परिषद जैतवारा जिले में सबसे आगे रहा। यहां 1 हजार 703 कार्डों में से 1 हजार 227 कार्डधारकों तक राशन पहुंच चुका है। यानी 72.04 प्रतिशत वितरण हो चुका है। यह जिले का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इसी तरह नगर परिषद कोटर में 60.46 प्रतिशत और नगर परिषद उचेहरा में 53.78 प्रतिशत वितरण दर्ज किया गया। नगर निगम सतना, जहां सबसे अधिक 33 हजार 956 राशन कार्ड हैं, वहां भी 16 हजार 119 कार्डों तक राशन पहुंचा है। यह 47.47 प्रतिशत उपलब्धि है जो जिला औसत से काफी बेहतर है।
उत्साह जनक नहीं गांव की स्थिति
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। जनपद नागौद में 36.52 प्रतिशत, रामपुर बघेलान में 35.95 प्रतिशत, सोहावल में 32.37 प्रतिशत और मझगवां में केवल 27.11 प्रतिशत वितरण हुआ। वहीं जनपद उचेहरा का प्रदर्शन और कमजोर रहा, जहां उपलब्धि 21.39 प्रतिशत ही रही। रिपोर्ट के अनुसार पूरे जिले में 6 हजार 964 ट्रांजेक्शन हुए। इनमें 582 ओटीपी आधारित और 1 हजार 133 पोर्टेबिलिटी के माध्यम से वितरण किया गया। पार्शियल आॅफलाइन ट्रांजेक्शन शून्य रहे जिससे यह संकेत मिलता है कि ई-पीओएस मशीनों के जरिए आॅनलाइन वितरण सामान्य रूप से संचालित हुआ।
एक जिले में इतनी बड़ी खाई क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एक ही जिले में जैतवारा 72 प्रतिशत तक पहुंच सकता है तो चित्रकूट 4 प्रतिशत तक भी क्यों नहीं पहुंच पाया? कोटर और उचेहरा नगर परिषदों में आधे से ज्यादा कार्डधारक राशन ले चुके हैं जबकि कई अन्य क्षेत्रों में एक चौथाई से भी कम वितरण हुआ है। यह अंतर केवल लाभार्थियों की सुविधा या आदत का परिणाम है या फिर स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था में भी अंतर है इसकी समीक्षा जरूरी है।

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