सतना जिले में अधूरे सड़क और पुल निर्माण कार्य लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। धीमी रफ्तार, धूल, जाम और खराब रास्तों से आमजन परेशान हैं, जबकि निर्माण कंपनियों की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। शहर और आसपास के इलाकों में कई सड़क और पुल परियोजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। हर जगह निर्माणाधीन होने के बोर्ड जरूर लगे हैं, लेकिन काम पूरा कब होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी कहीं दिखाई नहीं देती। नतीजा यह है कि आम लोगों को धूल, जाम, खराब रास्तों और डायवर्जन की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिले में चल रहे अधिकांश बड़े निर्माण कार्यों में शिवशक्ति कांस्ट्रक्शन कंपनी का नाम सामने आ रहा है। सड़क निर्माण से लेकर कई प्रोजेक्ट कंपनी के जिम्मे बताए जा रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी की कार्यशैली बेहद धीमी है और इसी वजह से परियोजनाएं तय समय से पीछे चल रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
बाईपास निर्माण बना लोगों के लिए मुसीबत
सतना-मैहर बाईपास परियोजना की स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में है। करीब 8.5 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाईपास का निर्माण कारगिल ढाबे से आगे तक किया जा रहा है। इस परियोजना की लागत लगभग 59.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। करीब एक साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की निर्धारित समय सीमा जून 2027 तय की गई है, लेकिन अब तक 20 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो पाया है। सड़क को कई जगहों पर खोद दिया गया है, जिससे आवाजाही बेहद मुश्किल हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम की गति इतनी धीमी है कि बीते कई महीनों में निर्माण आगे बढ़ता दिखाई ही नहीं दिया।
धूल और खराब रास्तों से बढ़ रहीं बीमारियां
बाईपास निर्माण की वजह से इलाके में लगातार धूल उड़ रही है। सड़क किनारे रहने वाले लोगों और व्यापारियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और धूल के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। कई जगहों पर वाहन चालकों को खराब रास्तों और डायवर्जन की वजह से लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि सड़क खुदाई के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है, वहीं वाहन चालकों को रोजाना जाम और अव्यवस्थित यातायात का सामना करना पड़
रहा है।
कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि एक वर्ष में परियोजना का छोटा हिस्सा भी पूरा नहीं हो पाया, तो बाकी काम तय समय सीमा में पूरा होना मुश्किल दिखाई देता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और काम में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, साथ ही निर्माण की गति बढ़ाकर जनता को राहत दिलाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।

रीवा में नीट परीक्षा धांधली के विरोध में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने डिप्टी सीएम आवास घेराव का प्रयास किया। पुलिस ने बैरीकेटिंग कर रोका, जिसके बाद झड़प हुई और वाटर कैनन व आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
सीधी जिले के नकवेल में तहसील कार्यालय के पास अवैध मुरुम और मिट्टी खनन लगातार जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों और खनन माफियाओं की सांठगांठ से सरकारी राजस्व नुकसान का आरोप लगाया है।
सिंगरौली के बनौली गांव के पास तेज रफ्तार कोल वाहन की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
सतना जिले में गेहूं उठाव धीमा होने से 6759 किसानों का 152 करोड़ रुपए भुगतान अटक गया है। खरीदी केंद्रों में हजारों मीट्रिक टन गेहूं पड़ा है, जिस पर प्रशासन ने परिवहनकर्ता को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
मैहर दर्शन के लिए जा रही श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि रेस्क्यू के दौरान अमदरा टीआई भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
सतना के विद्याश्री साल्वेंट प्लांट में लगी भीषण आग में ऑपरेटर की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद सुरक्षा मानकों और प्लांट संचालन को लेकर जांच शुरू हुई।
रीवा बिजली विभाग में आउटसोर्स नौकरी और ट्रांसफर के बदले लाखों रुपए मांगने का ऑडियो वायरल हुआ है। ऑडियो में दलाल, भर्ती और पोस्टिंग के लिए तय रकम पर सौदेबाजी करते सुनाई दे रहे हैं।
सतना जिले में अधूरे सड़क और पुल निर्माण कार्य लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। धीमी रफ्तार, धूल, जाम और खराब रास्तों से आमजन परेशान हैं, जबकि निर्माण कंपनियों की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
चित्रकूट विधानसभा के आदिवासी गांवों को जोड़ने वाली 40 लाख की सड़क निर्माण योजना सवालों में है। घटिया निर्माण के कारण सड़क उखड़ गई, बारिश में दलदल बनता है और ग्रामीण आज भी कठिन रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं।
सतना और मैहर में होने वाली गिद्ध गणना में इस बार हिमालयी, यूरेशियन और काला गिद्ध नजर नहीं आएंगे। गर्मी बढ़ने के साथ प्रवासी प्रजातियां लौट चुकी हैं, जबकि स्थानीय गिद्धों की आबादी और प्रजनन पर विशेष फोकस रहेगा।

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