आस्ट्रेलिया के सिडनी में हुई गोलीबारी में अभी तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। हमले में 42 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हमला यहूदी पर्व हनुक्का के आयोजन के दौरान किया गया। इस अटैक को बाप और बेटे ने मिलकर अंजाम दिया। हमलावरों की पहचान साजिद अकरम और नवीद अकरम के रूप में हुई है।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के मौजूदा सीजन के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने भारतीय घरेलू क्रिकेट में हलचल मचा दी है। असम के चार खिलाड़ियों पर भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे हैं। असम क्रिकेट एसोसिएशन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए चार खिलाड़ियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया है।
मध्य प्रदेश के एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में हैं। मानवीय संवेदनाओं को छूने वाली और सिस्टम की खामी को उजागर करने वाली पोस्ट में सलाह दी गई है कि सरकार को ट्रेनों में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि रिजर्वेशन टिकट न ले पाने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिल सके।
मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में भारी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की वार्षिक संपरीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2021-22 में यह खुलासा हुआ है कि कई नगर निगम, नगर पालिका परिषदों और नगर परिषदों ने अपनी वास्तविक आय से अधिक राशि खर्च कर दी है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे गए अत्याधुनिक हथियारों की सप्लाई कुख्यात गैंगस्टरों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।
मध्यप्रदेश का स्वास्थ विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण गुना में एक मरीज की मौत हो गई। गुना में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है।
मध्यप्रदेश के सबसे बड़े इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर दिया है। अपस्ताल प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर होने के बाद जिम्मेदार पर्दा डालने में जुट गए हैं। हालांकि अस्पताल में चूहों की समस्या नई नहीं है। दो नवजात की मौत के कारण अब इसकी खुलकर चर्चा हो रही है।
मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। योजनाओं की डीपीआर बिना गांवों का दौरा किए कागजों पर तैयार कर दी गई। इस लापरवाही के कारण योजना की लागत बढ़ गई और केंद्र सरकार ने अतिरिक्त राशि देने से हाथ खडे कर दिए। इसके चलते राज्य सरकार को 2,813 करोड़ अपने खजाने से खर्च करने पड़ेंगे।
मध्यप्रदेश कांग्रेस की बहुप्रतीक्षित जिला अध्यक्षों की सूची जारी होते ही पार्टी के भीतर घमासान और गुटबाजी तेज हो गई है। कई जिलों में नवनियुक्त अध्यक्षों को लेकर विरोध और नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। दरअसल, शनिवार को कांग्रेस जिला अध्यक्षों की सूची जारी हुई है।





















