मध्यप्रदेश के सबसे बड़े इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर दिया है। अपस्ताल प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर होने के बाद जिम्मेदार पर्दा डालने में जुट गए हैं। हालांकि अस्पताल में चूहों की समस्या नई नहीं है। दो नवजात की मौत के कारण अब इसकी खुलकर चर्चा हो रही है।

एमवाय अस्पताल का चूहाकांड सरकार के लिए अब सिर दर्द बन गया है।

मध्यप्रदेश के सबसे बड़े इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के काटने से दो बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर दिया है। अपस्ताल प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर होने के बाद जिम्मेदार पर्दा डालने में जुट गए हैं। हालांकि अस्पताल में चूहों की समस्या नई नहीं है। दो नवजात की मौत के कारण अब इसकी खुलकर चर्चा हो रही है। इससे पहले भी शवों को कुतरने, नवजात के शव आवारा कुत्तों द्वारा लेकर घूमने जैसे कांड हो चुके हैं। इतना सब होने के बाद भी जिम्मेदार नहीं जाग रहे हैं। हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। दरअसल, एमवाय अस्पताल का चूहाकांड सरकार के लिए अब सिर दर्द बन गया है। इस पर राजनीति भी सियासत भी शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि एमवाय अस्पताल में सफाई का जिम्मा उठाने वाली एजाइल कंपनी समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल करती तो दो बच्चे चूहों का शिकार नहीं होते। यहां सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि पेस्ट कंट्रोल के लिए कंपनी को औसतन हर महीने दो लाख का भुगतान किया जाता है। लेकिन, हैरानी की बात है कि जनवरी 2025 से अब तक 20 लाख लेकर कंपनी ने सिर्फ डेढ़ सौ चूहे ही भगा पाई है। इससे यह साफ जाहिर है कि सब काम सिर्फ कागजों पर होता रहा, जबकि हकीकत में चूहों का कहर अस्पताल में बरकरार है।
हाल ही में इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों ने दो शिशुओं के अंग कुतर दिए। एक नवजात की तीन उंगलियां चूहे खा गए। दूसरे नवजात का सिर और कंधे चूहों ने कुतरे दिए। जहां तीन दिन में दोनों बच्चों की मौत हो गई। मामले ने तूल पकड़ा तो दौरे, जांच और निरीक्षण की खानापूर्ति शुरू हो गई। लेकिन, इस मामले में पूरी लापरवाही अपस्ताल प्रबंधन की है।
दो बच्चों की मौत के मामले को शांत करने के इरादे से जिम्मेदार अफसरों ने अस्पताल के आधा दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को सिर्फ निलंबित किया। किसी पर एफआईआर तक नहीं दर्ज कराई गई। अब जांच चल रही है।
गौरतलब है कि अस्पतालों में चूहों होना आम बात है। शहर के कई निजी अस्पतालों में चूहें हैं, जहां हजारों मरीज भर्ती होते हैं, लेकिन इन अस्पतालों में चूहों को रोकने लिए नियमित पेस्ट कंट्रोल किया जाता है। गलियारों में घूम रहे चूहों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाते हैं। लेकिन, यह सब एमवाय में नहीं हो रहा था। वहां सिर्फ कागजों में ही यह पूरी कवायद चल रही थी।
यहां हैरानी की बात यह भी है कि प्रबंधन ने एमवाय की सफाई, पेस्ट कंट्रोल, सुरक्षा और डेटा इंट्री का काम अलग-अलग देने के जगह एक ही कंपनी को दे रखा है। हर महीने इसके लिए कंपनी को डेढ़ करोड़ दिए जाते हैं। पिछले साल एजाइल कंपनी को 20 करोड़ का भुगतान एमवाय प्रबंधन ने किया था, लेकिन आडिट नहीं किया गया। दो साल पहले ठीक से सफाई नहीं होने पर कंपनी पर 20 हजार का जुमार्ना लगाया गया था। कंपनी दो साल से एमवाय अस्पताल का काम संभाल रही है।
हम लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। जो भी जिम्मेदार है, उसके खिलाफ एक्शन लिया गया है। विभाग के पीएस को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। कंपनी पर एक लाख का जुर्माना लगाया गया है। दोष सिद्ध होने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा।
डॉ. मोहन यादव, सीएम


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